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BIOLOGY
जैव विविधता क्षति के कारण लिखिए।...

जैव विविधता क्षति के कारण लिखिए।

लिखित उत्तर

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जैव विविधता की क्षति के कारण
सम्पूर्ण विश्व जैव विविधता क्षति की बढ़ती हुई दर का सामना कर रहा है। जैव विविधता क्षति के चार मुख्य कारण हैं-
1. आवासीय क्षति तथा विखण्डन (Habitat Loss and Fragmentation)—आवासीय क्षति जन्तु व पौधे के विलुप्तीकरण का मुख्य कारण है। उष्ण कटिबन्धीय वर्षा वनों का घटता क्षेत्रफल इसका सबसे अच्छा उदाहरण है। इनका क्षेत्रफल 14% से घटकर लगभग 6% रह गया है। इसी प्रकार विशाल अमेजन वर्षा वन को सोयाबीन की खेती तथा जानवरों के चरागाहों के लिए काट कर साफ कर दिया गया है। इसमें निवास करने वाली करोड़ों जातियाँ प्रभावित हुई हैं और उनके जीवन को खतरा उत्पन्न हो गया है। आवासीय क्षति के अतिरिक्त प्रदूषण भी जातियों की क्षति का एक बहुत बड़ा कारण है। मानव के क्रियाकलाप भी जातीय आवासों को प्रभावित करते हैं। मानव द्वारा बड़े आवासों को छोटे-छोटे खण्डों में विभक्त कर देने से स्तनधारियों और पक्षियों की समष्टि में कमी होती है। प्रदूषण इसे और गम्भीर बना रहा है।
2. अतिदोहन (Over Exploitation)-मानव की बढ़ती जनसंख्या एवं सभ्यता के विकास के कारण मानव की आवश्यकताएँ भी बढ़ती गई है। मानव प्रगति के लिए सड़क निर्माण, रेलमार्ग निर्माण, बाँध निर्माण आदि करके पारितन्त्र को क्षति पहुँचा रहा है। इसी के साथ मानव भोजन तथा आवास के लिए प्रकृति पर निर्भर रहा है, परन्तु लालच के वशीभूत होकर जब मानव प्राकृतिक सम्पदा का अत्यधिक दोहन शुरू कर देता है तो बहुत-सी जातियाँ विलुप्त हो जाती हैं। अतिदोहन के कारण गत 500 वर्षों में अनेक प्रजातियाँ विलुप्त हो गई हैं। अनेक समुद्री मछलियों की संख्या शिकार के कारण निरन्तर कम होती जा रही है जिसके कारण अनेक प्रजातियाँ संकटग्रस्त हैं।
3. विदेशी जातियों का आक्रमण (Invasions of Alien Species)---जब बाहरी जातियाँ अनजाने में या जानबूझकर किसी भी उद्देश्य से एक क्षेत्र में लायी जाती हैं, तब उनमें से कुछ आक्रामक होकर स्थानीय जातियों में कमी या उनकी विलुप्ति का कारण बन जाती हैं। गाजर घास (पार्थीनियम) लैंटाना .और हायसिंथ (आइकॉनिया) जैसी आक्रामक खरपतवार जातियाँ पर्यावरण तथा अन्य देशज जातियों के लिए खतरा बन गई हैं। इसी प्रकार मत्स्य पालन के उद्देश्य से अफ्रीकन कैटफिश क्लैरियस गैरीपाइनस मछली को हमारी नदियों में लाया गया, लेकिन अब ये मछली हमारी नदियों की मूल अशल्कमीन (कैटफिश) जातियों के लिए खतरा पैदा कर रही हैं।
4. सहविलुप्तता (Co-extinctions)-एक जाति के विलुप्त होने से उस पर आधारित दूसरी जन्तु व पादप जातियाँ भी विलुप्त होने लगती है। उदाहरण के लिए एक परपोषी मत्स्य जाति विलुप्त होती है, तब उसके विशिष्ट परजीवी भी विलुप्त होने लगते हैं। पुष्पों व उनके परागणकर्ताओं में भी यही सम्बन्ध है।
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