भारत में वन्य जीव भारत का भूमि क्षेत्र विश्व के कुल स्थलीय क्षेत्रफल का मात्र 2.4 प्रतिशत है लेकिन फिर भी भारत की विश्व की कुल जैव विविधता में हिस्सेदारी 8.1 प्रतिशत है। स्पष्ट है भारत एक जैव विविधता समृद्ध देश है। भारत को, इसी कारण विश्व के 12 महा जैव विविधता या मेगाडाइवर्सिटी देशों (megadiveristy countries) में शामिल किया गया है। भारत में पौधों की लगभग 45000 प्रजातियाँ तथा इनसे लगभग दो गुनी जन्तु प्रजातियाँ अभिलेखित की जा चुकी हैं।
अगर रॉबर्ट मे के आकलनों को भारतवर्ष के परिपेक्ष्य में देखें तो ज्ञात होता है कि भारत में पौधों की लगभग 100,000 प्रजातियाँ तथा जन्तुओं की लगभग 300,000 प्रजातियों की खोज बाकी है। रॉबर्ट मे के अनुमानों के अनुसार भारत में अब तक कुल 22 प्रतिशत प्रजातियों को ही अभिलेखित किया जा सका है।
विविध जलवायुगत परिस्थितियों, पारिस्थितिक क्षेत्रों के कारण ही भारत जीवों की विविधता से समृद्ध है।
भारत के प्रमुख स्तनधारी जन्तु हैं। एशियाई शेर, बाघ, एशियाई हाथी राइनोसिरॉस, जंगली गधा, एंटीलोप, काला हिरन, भारतीय बाइसन। प्रमुख पक्षी हैं—मोर (राष्ट्रीय पक्षी) हॉर्नबिल, तोते, कबूतर, सोन चिरैया सहित पक्षियों की लगभग 1200 प्रजातियाँ |
रेप्टाइल्स में क्रोकोडाइल, घड़ियाल, कछुओं की विभिन्न प्रजातियाँ, विषहीन व विषधारी सर्पो की अनेक जातियाँ।
दक्षिणी भारत में पूर्वी घाट में विभिन्न प्रकार के उभयचर पाए जाते हैं। मछलियों में राहू, मृगाल, कतला सहित कार्प व कैट फिश की अनेक प्रजातियाँ हैं। भारत में अपृष्ठवंशियों (non-chordates) की भी हजारों प्रजातियाँ पायी जाती हैं।
पश्चिमी घाट व पूर्वोत्तर भारत अनेक प्रकार के आर्किड्स, पिचरप्लांट सहित अनेक दुर्लभ एन्डेमिक पादप प्रजातियों के केन्द्र है। राउवोल्फिया सर्पेन्टाइना जैसे औषधीय पादप, अनेकानेक प्रकार के दुर्लभ अनावृतबीजी व आवृतबीजी पादप यहाँ पाए जाते हैं।
इन्हीं वन्यजीवों को दृष्टिगत रखते हुए इनके संरक्षण हेतु प्रोजेक्ट टाइगर, प्रोजेक्ट एलीफेंट, हंगुल परियोजना, क्रोकोडाइल परियोजना जैसी परियोजनाएँ सफलतापूर्वक संचालित की जा रही हैं।