Home
Class 12
MATHS
मेरे पास 4 पैंट , 3 कमीज और 2 बनियानी...

मेरे पास 4 पैंट , 3 कमीज और 2 बनियानी हैं । मैं उन्हें कितने प्रकार से पहन सकता हूँ ?

Promotional Banner

Similar Questions

Explore conceptually related problems

C and D together can make a chair in 4 days and C alone can make this chair in 12 days. In how many days D alone can make this chair? C और D मिलकर 4 दिन में एक कुर्सी बना सकते हैं और C अकेले इस कुर्सी को 12 दिनों में बना सकता हैं। D कितने दिनों में अकेले इस कुर्सी को बना सकता है?

दिए गए पद्यांश को ध्यान से पढ़िए और उसके आधार पर पूछे गए प्रश्न का यथोचित उत्तर दीजिए। पद्यांश 11 सामने कुहरा घना है और मैं सूरज नहीं हूँ क्या इसी अहसास में जाऊँ या जैसा भी हूँ नन्हा-सा इक दीया तो हूँ क्यों न उसी की उजास में जाऊँ? हर आने वाला क्षण मुझे यही कहता है अरे भई, तुम सूरज तो नहीं हो और मैं कहता हूँ न सही सूरज एक नन्हा दीया तो हूँ जितनी भी है तो मुझ में उसे लेकर जिया तो हूँ। कम-से-कम मैं उनमें तो नहीं जो चाँद दिल के बुझाए बैठे हैं हर रात को अमावस बनाए बैठे है उड़ते फिर रहे थे, जो जुगनू आँगन में उन्हें भी मुट्ठियों में दबाए बैठे हैं। 'कुहरा' किसका प्रतीक है?

दिए गए पद्यांश को ध्यान से पढ़िए और उसके आधार पर पूछे गए प्रश्न का यथोचित उत्तर दीजिए। पद्यांश 11 सामने कुहरा घना है और मैं सूरज नहीं हूँ क्या इसी अहसास में जाऊँ या जैसा भी हूँ नन्हा-सा इक दीया तो हूँ क्यों न उसी की उजास में जाऊँ? हर आने वाला क्षण मुझे यही कहता है अरे भई, तुम सूरज तो नहीं हो और मैं कहता हूँ न सही सूरज एक नन्हा दीया तो हूँ जितनी भी है तो मुझ में उसे लेकर जिया तो हूँ। कम-से-कम मैं उनमें तो नहीं जो चाँद दिल के बुझाए बैठे हैं हर रात को अमावस बनाए बैठे है उड़ते फिर रहे थे, जो जुगनू आँगन में उन्हें भी मुट्ठियों में दबाए बैठे हैं। 'मुट्ठियों में जुगनू दबाना' का आशय है

दिए गए पद्यांश को ध्यान से पढ़िए और उसके आधार पर पूछे गए प्रश्न का यथोचित उत्तर दीजिए। पद्यांश 11 सामने कुहरा घना है और मैं सूरज नहीं हूँ क्या इसी अहसास में जाऊँ या जैसा भी हूँ नन्हा-सा इक दीया तो हूँ क्यों न उसी की उजास में जाऊँ? हर आने वाला क्षण मुझे यही कहता है अरे भई, तुम सूरज तो नहीं हो और मैं कहता हूँ न सही सूरज एक नन्हा दीया तो हूँ जितनी भी है तो मुझ में उसे लेकर जिया तो हूँ। कम-से-कम मैं उनमें तो नहीं जो चाँद दिल के बुझाए बैठे हैं हर रात को अमावस बनाए बैठे है उड़ते फिर रहे थे, जो जुगनू आँगन में उन्हें भी मुट्ठियों में दबाए बैठे हैं। 'दिनकर' किसका पर्यायवाची है?

दिए गए पद्यांश को ध्यान से पढ़िए और उसके आधार पर पूछे गए प्रश्न का यथोचित उत्तर दीजिए। पद्यांश 11 सामने कुहरा घना है और मैं सूरज नहीं हूँ क्या इसी अहसास में जाऊँ या जैसा भी हूँ नन्हा-सा इक दीया तो हूँ क्यों न उसी की उजास में जाऊँ? हर आने वाला क्षण मुझे यही कहता है अरे भई, तुम सूरज तो नहीं हो और मैं कहता हूँ न सही सूरज एक नन्हा दीया तो हूँ जितनी भी है तो मुझ में उसे लेकर जिया तो हूँ। कम-से-कम मैं उनमें तो नहीं जो चाँद दिल के बुझाए बैठे हैं हर रात को अमावस बनाए बैठे है उड़ते फिर रहे थे, जो जुगनू आँगन में उन्हें भी मुट्ठियों में दबाए बैठे हैं। यह कविता क्या प्रेरणा देती है?

दिए गए पद्यांश को ध्यान से पढ़िए और उसके आधार पर पूछे गए प्रश्न का यथोचित उत्तर दीजिए। पद्यांश 11 सामने कुहरा घना है और मैं सूरज नहीं हूँ क्या इसी अहसास में जाऊँ या जैसा भी हूँ नन्हा-सा इक दीया तो हूँ क्यों न उसी की उजास में जाऊँ? हर आने वाला क्षण मुझे यही कहता है अरे भई, तुम सूरज तो नहीं हो और मैं कहता हूँ न सही सूरज एक नन्हा दीया तो हूँ जितनी भी है तो मुझ में उसे लेकर जिया तो हूँ। कम-से-कम मैं उनमें तो नहीं जो चाँद दिल के बुझाए बैठे हैं हर रात को अमावस बनाए बैठे है उड़ते फिर रहे थे, जो जुगनू आँगन में उन्हें भी मुट्ठियों में दबाए बैठे हैं। 'सूरज' किसका प्रतीक है?

दिए गए पद्यांश को ध्यान से पढ़िए और उसके आधार पर पूछे गए प्रश्न का यथोचित उत्तर दीजिए। पद्यांश 11 सामने कुहरा घना है और मैं सूरज नहीं हूँ क्या इसी अहसास में जाऊँ या जैसा भी हूँ नन्हा-सा इक दीया तो हूँ क्यों न उसी की उजास में जाऊँ? हर आने वाला क्षण मुझे यही कहता है अरे भई, तुम सूरज तो नहीं हो और मैं कहता हूँ न सही सूरज एक नन्हा दीया तो हूँ जितनी भी है तो मुझ में उसे लेकर जिया तो हूँ। कम-से-कम मैं उनमें तो नहीं जो चाँद दिल के बुझाए बैठे हैं हर रात को अमावस बनाए बैठे है उड़ते फिर रहे थे, जो जुगनू आँगन में उन्हें भी मुट्ठियों में दबाए बैठे हैं। 'अमावस' किसका प्रतीक है?