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PHYSICS
विराम में स्थित किसी सरल लोलक (simple pe...

विराम में स्थित किसी सरल लोलक (simple pendulum) के गोलक (bob) का द्रव्यमान 100 g है तथा इसपर 5.4 nC का आवेश है। गोलक के ठीक नीचे 10 cm की दूरी पर किसी कण पर कितना विद्युत-आवेश होना चाहिए ताकि लोलक की डोरी तनाव मुक्त हो जाए?

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The ratio of the number of boys to the number of girls in a school of 640 students is 5:3. If 30 more girls are admitted in the school, then how many more boys should be admitted so that the ratio of boys to that of the girls, becomes 14:9 640 छात्रों वाले एक विद्यालय में लड़कों की संख्या तथा लड़कियों की संख्या में 5 : 3 का अनुपात है | यदि इस विद्यालय में 30 और लड़कियों का नामांकन हो जाता है, तो कितने अतिरिक्त लड़कों का नामांकन होना चाहिए ताकि लड़कों और लड़कियों की संख्या का अनुपात 14 : 9 हो जाए |

गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प चुनिए। जिनमें सहिष्णुता की भावना होती है, केवल ऐसे लोग अध्यापक होने योग्य होते हैं। जिनका बच्चों से प्यार भरा लगाव होता है, उनमें धैर्य स्वभावतः आ जाता है। अध्यापकों को जिस अननिहित गंभीर समस्या से जूझना पड़ता है. वह यह है कि उन्हें जिनको देखना है वे शक्ति और प्रभुता में उनकी बराबरी के नहीं होते। अध्यापक के लिए एकदम तुच्छ या बिना किसी कारण के या फिर वास्तविक की बजाए किसी काल्पनिक कारण के चलते अपने छात्रों के सामने धैर्य खो देना, उनकी खिल्ली उड़ाना, उन्हें अपमानिच या दंडित करना एकदम आसान और संभव है। जो एक निर्बल अधीन राष्ट्र पर शासन करते हैं, उनमें न चाहते हुए भी गलत काम करने की प्रवृचि पाई । जाती है। उसी तरह ऐसे अध्यापक होते हैं जो बच्चों के कपर अपने प्रभुत्व का शिकार हो जाते हैं। जो शासन के अयोग्य होते हैं, उन्हें न केवल कमजोर लोगों पर अन्याय करते हुए कोई अपराध-बोध नहीं होता, बल्कि ऐसा करने में उन्हें एक खास तरह का मजा मिलता है। बच्चे अपनी माँ की गोद में कमजोर, असहाय और अज्ञानी होते हैं। माता के हृदय में स्थित प्रचुर प्यार हो उनकी रक्षा की एकमात्र गारंटी होता है। इसके बावजूद हमारे घरों में इस बात के उदाहरण कम नहीं है कि कैसे हमारे स्वाभाविक प्यार पर धीरज का अभाव और उद्धत प्राधिकार विजय प्राप्त कर लेते हैं और बच्चों को अनुचित कारणों से बाँडित होना पड़ता है। किस तरह के लोग कमजोर लोगों पर अन्याय करते है?

छात्र की सहायता करना अत्यावश्यक है कि उसका मन वैज्ञानिक, स्पष्ट, निश्चित और सूक्ष्मता से सोचने वाला तथा उसके साथ ही साथ मन की गहराईयों को अनावृत करने वाला हो। क्या छात्र को इस प्रकार शिक्षित करना संभव है कि वह सभी लेबिलों के परे जो कर सके तथा उस वस्त का पता लगा सके, उसका अनुभव कर सके, जिसको मन नहीं माप सकता, जो किसी पुस्तक में नहीं लिखा है। यदि इस प्रकार के एक विद्यालय में ऐसी शिक्षा संभव हो सके, तो वह अनूठी होगी। आप सभी को यह देखना चाहिए कि इस प्रकार के विद्यालय का निर्माण कितना मूल्यवान होगा। केवल नृत्य, संगीत, गणित और दूसरे पाठों पर ध्यान देना समस्त जीवन नहीं है। शांत बैठना तथा अपने को देखना, सूक्ष्म दृष्टि प्राप्त करना, अवलोकन करना भी जीवन का अंग है। विचार कैसे किया जाए. किस पर विचार किया जाए, तथा आप विचार क्यों कर रहे हैं, इसको देखना भी आवश्यक है। लेखक की दृष्टि में सर्वाधिक महत्वपूर्ण क्या है?

छात्र की सहायता करना अत्यावश्यक है कि उसका मन वैज्ञानिक, स्पष्ट, निश्चित और सूक्ष्मता से सोचने वाला तथा उसके साथ ही साथ मन की गहराईयों को अनावृत करने वाला हो। क्या छात्र को इस प्रकार शिक्षित करना संभव है कि वह सभी लेबिलों के परे जो कर सके तथा उस वस्त का पता लगा सके, उसका अनुभव कर सके, जिसको मन नहीं माप सकता, जो किसी पुस्तक में नहीं लिखा है। यदि इस प्रकार के एक विद्यालय में ऐसी शिक्षा संभव हो सके, तो वह अनूठी होगी। आप सभी को यह देखना चाहिए कि इस प्रकार के विद्यालय का निर्माण कितना मूल्यवान होगा। केवल नृत्य, संगीत, गणित और दूसरे पाठों पर ध्यान देना समस्त जीवन नहीं है। शांत बैठना तथा अपने को देखना, सूक्ष्म दृष्टि प्राप्त करना, अवलोकन करना भी जीवन का अंग है। विचार कैसे किया जाए. किस पर विचार किया जाए, तथा आप विचार क्यों कर रहे हैं, इसको देखना भी आवश्यक है। जीवन का सबसे महत्वपूर्ण अंग है

छात्र की सहायता करना अत्यावश्यक है कि उसका मन वैज्ञानिक, स्पष्ट, निश्चित और सूक्ष्मता से सोचने वाला तथा उसके साथ ही साथ मन की गहराईयों को अनावृत करने वाला हो। क्या छात्र को इस प्रकार शिक्षित करना संभव है कि वह सभी लेबिलों के परे जो कर सके तथा उस वस्त का पता लगा सके, उसका अनुभव कर सके, जिसको मन नहीं माप सकता, जो किसी पुस्तक में नहीं लिखा है। यदि इस प्रकार के एक विद्यालय में ऐसी शिक्षा संभव हो सके, तो वह अनूठी होगी। आप सभी को यह देखना चाहिए कि इस प्रकार के विद्यालय का निर्माण कितना मूल्यवान होगा। केवल नृत्य, संगीत, गणित और दूसरे पाठों पर ध्यान देना समस्त जीवन नहीं है। शांत बैठना तथा अपने को देखना, सूक्ष्म दृष्टि प्राप्त करना, अवलोकन करना भी जीवन का अंग है। विचार कैसे किया जाए. किस पर विचार किया जाए, तथा आप विचार क्यों कर रहे हैं, इसको देखना भी आवश्यक है। 'विद्यालय' का संधि-विच्छेद है

छात्र की सहायता करना अत्यावश्यक है कि उसका मन वैज्ञानिक, स्पष्ट, निश्चित और सूक्ष्मता से सोचने वाला तथा उसके साथ ही साथ मन की गहराईयों को अनावृत करने वाला हो। क्या छात्र को इस प्रकार शिक्षित करना संभव है कि वह सभी लेबिलों के परे जो कर सके तथा उस वस्त का पता लगा सके, उसका अनुभव कर सके, जिसको मन नहीं माप सकता, जो किसी पुस्तक में नहीं लिखा है। यदि इस प्रकार के एक विद्यालय में ऐसी शिक्षा संभव हो सके, तो वह अनूठी होगी। आप सभी को यह देखना चाहिए कि इस प्रकार के विद्यालय का निर्माण कितना मूल्यवान होगा। केवल नृत्य, संगीत, गणित और दूसरे पाठों पर ध्यान देना समस्त जीवन नहीं है। शांत बैठना तथा अपने को देखना, सूक्ष्म दृष्टि प्राप्त करना, अवलोकन करना भी जीवन का अंग है। विचार कैसे किया जाए. किस पर विचार किया जाए, तथा आप विचार क्यों कर रहे हैं, इसको देखना भी आवश्यक है। कौन सा शब्द पुस्तक का पर्याय है?

छात्र की सहायता करना अत्यावश्यक है कि उसका मन वैज्ञानिक, स्पष्ट, निश्चित और सूक्ष्मता से सोचने वाला तथा उसके साथ ही साथ मन की गहराईयों को अनावृत करने वाला हो। क्या छात्र को इस प्रकार शिक्षित करना संभव है कि वह सभी लेबिलों के परे जो कर सके तथा उस वस्त का पता लगा सके, उसका अनुभव कर सके, जिसको मन नहीं माप सकता, जो किसी पुस्तक में नहीं लिखा है। यदि इस प्रकार के एक विद्यालय में ऐसी शिक्षा संभव हो सके, तो वह अनूठी होगी। आप सभी को यह देखना चाहिए कि इस प्रकार के विद्यालय का निर्माण कितना मूल्यवान होगा। केवल नृत्य, संगीत, गणित और दूसरे पाठों पर ध्यान देना समस्त जीवन नहीं है। शांत बैठना तथा अपने को देखना, सूक्ष्म दृष्टि प्राप्त करना, अवलोकन करना भी जीवन का अंग है। विचार कैसे किया जाए. किस पर विचार किया जाए, तथा आप विचार क्यों कर रहे हैं, इसको देखना भी आवश्यक है। लेखक ने अनूठी शिक्षा में ____ बल दिया है।

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