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CHEMISTRY
निम्न को बढ़ते हुए इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थै...

निम्न को बढ़ते हुए इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी के क्रम में व्यवस्थित करें।
`(1)` Be `(2)` B `(3)` C `(4)` N `(5)` O `(6)` F `(7)` Ne

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`NeltBeltNltBltCltOltF`
(D) विघुतऋणता (Electronegativity)
`1.` किसी यौगिक में परमाणु की बन्धित इलेक्ट्रॉनों को अपनी ओर आकर्षित करने की आपेक्षिक क्षमता को उस परमाणु की विघुतऋणता कहते है।
`A to B`
`2.` विघुतऋणता को मापने के कई मापक्रम हैं जो विभित्र वैज्ञानिकों द्वारा दिये गये हैं -
(a) पॉलिंग मापक्रम (b) मुलीकन मापक्रम (c ) आलेड रोशों मापक्रम
(a) पॉलिंग मापक्रम ( Paulling scale )- यह सर्वाधिक प्रयुक्त स्केल है तथा बन्ध ऊर्जा आंकड़ों पर आधारित है। बन्ध A-B की वास्तविक बंध ऊर्जा `=(E_(A-A)xxE_(B-B))]^(1//2)` बन्ध ऊर्जा के प्रायोगिक मान से सदैव कम होती है। यह आधिक्य बन्ध ऊर्जा `(DeltaE)` कहलाती है। यह सह - संयोजी बन्ध में ध्रुवणता के कारण उतपत्र (arise) होती है तथा दोनों तत्वों की विघुतऋणताओं पर निर्भर करती है।
`DeltaE` = आधिक्य बन्ध ऊर्जा
`=E_(A-B)[E_(A-A)xxE_(B-B)]^(1//2)`
यदि बन्ध ऊर्जा किलो कैलोरी प्रति मोल में ली जाये तो तत्वों A तथा B की विघुतऋणता निम्न सम्बन्ध से दी जाती है -
`xx_(A)-xx_(B)=0.208(DeltaE)^(1//2`
S.I. इकाइयों में अर्थात् बन्ध ऊर्जा का मान k joule//mole में लेने पर उपरोक्त सम्बन्ध का रूप निम्नवत् हो जाता है -
`xx_(A)-xx_(B)=0.088(DeltaE)^(1//2)`
मुलीकन मापक्रम (Mulliken scale)- मुलीकन के अनुसार किसी तत्व की विघुतऋणता उसके आयनन एन्थैल्पी तथा इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी का ओसत होती है।
अर्थात् तत्व की विघुतऋणता
`=("इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी +आयनन एन्थैल्पी")/(2)`
पॉलिंग ने फ्लोरीन की विघुतऋणीयता `4.0` ( आवर्त सारणी में अधिकतम ) मानकर अन्य तत्वों के I.E. का मान होने पर उनकी विघुतऋणीयता की गणना की।
आयनन एन्थैल्पी तथा इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी का मान अधिक होने पर विघुतऋणीयता का मान अधिक होगा।
पॉलिंग तथा मुलीकन के स्केलों में परस्पर सम्बन्ध है -
`x_("पॉलिंग ")=(x_("मुलीकन"))/(2.8)`
(c ) आलरेड रोशो मापक्रम (Allred and Rochow scale ) सन `1958` में आलरेड रोशो ने विघुत ऋणता को प्रभावी नाभिकीय आवेश (Effective Nuclear Charge) `Z_(eff)` से परिकलित किया, उनके अनुसार,
विघुत ऋणता = `=0.744+(0.359Z_(eff))/(r^(2))`
r=सहसंयोजक त्रिज्या
`Z_(eff)=Z-sigma(sigma="परिरक्षण स्थिरांक है" )` इस विधि से प्राप्त विघुत ऋणता के मान पॉलिंग के द्वारा ज्ञात मानों से काफी मेल खाते हैं।
विघुत ऋणता को प्रभावी करने वाले कारक
(a) परमाण्वीय आकार - परमाण्वीय बढ़ने के साथ बाह्मतम इलेक्ट्रॉनों के प्रति नाभिकीय आकर्षण घटता जाता है अतः इनके विघुत ऋणता के मान भी घटते जाते हैं।
विघुतऋणता `prop(1)/("आकार ")`
`{:(Li,Be,B,C,N,O,F):}`
किसी आवर्त में बायें से दाये चलने पर
आकार घटता जाता हैं।
अतः बन्धित es पर नाभिकीय आकर्षण बल बढ़ता है।
अतः विघुत ऋणता बढ़ती है।
Li किसी वर्ग में ऊपर से नीचे की चलने पर
Na आकार क्रमश : बढ़ता जाता है।
K अतः बन्धित es पर नाभिकीय आकर्षण बल घटता जाता है।
Rb अतः विघुत ऋणता घटती है।
Cs
(b) प्रभावी नाभिकीय आवेश - किसी परमाणु के नाभिकीय आवेश में वृद्धि से बाह्मतम इलेक्ट्रॉनों के प्रति आकर्षण बढ़ता है, अतः विघुत ऋणता बढ़ती है।
विघुत ऋणता `prop` प्रभावी नाभिकीय आवेश
`{:(Li,Be,B,C,N,O,F):}`
किसी आवर्त में बायें से दाये चलने पर
प्रभावी नाभिकीय आवेश का मान क्रमश : बढ़ता है।
`:.` बन्धित es पर नाभिकीय आकर्षण बल बढ़ता है।
`:.` वैघुत ऋणता का मान बढ़ता है।
(c ) ऑक्सीकरण अवस्था ( oxidation state )
विघुत ऋणता `prop` ऑक्सीकरण अवस्था
अतः ऑक्सीकरण अवस्था बढ़ने पर विघुत ऋणता बढ़ती है।
`O^(-)ltOltO^(+)` ( विघुत ऋणता का क्रम )
`C^(-)ltCltC^(+)` ( विघुत ऋणता का क्रम )
`Mn^(2+)ltMn^(+3)ltMn^(+4)ltMn^(+6)ltMn^(+7)` ( विघुत ऋणता का क्रम )
उपरोक्त सदस्यों में बायें से दाये चलने पर
ऑक्सीकरण अवस्था क्रमश : बढ़ती है।
अतः आकार घटता जाता है। अतः विघुत ऋणता बढ़ती है।
(d) संकरण अवस्था (Hybridisation State)
यदि किसी तत्व की अपने विभित्र यौगिकों में संक्रमण अवस्था भिन्न - भिन्न हो तो उस तत्व की विघुतऋणता भी भिन्न होगी। जैसे - कार्बन तीन प्रकार की संक्रमण अवस्थायें प्रदर्शित करता है।
जैसे `BeH_(2),BH_(3)` व `CH_(4)` में उपस्थित केन्द्रीय परमाणु ( Be, B व C ) पर संकरण अवस्था क्रमश : sp, `sp^(2)` व `sp^(3)` है।
`{:(sp,sp^(2),sp^(3)):}`
नए कक्षक `{:(2,3,4):}`
`%s` गुण `{:(50%,33.33%,25%):}`
`%p` गुण `{:(50%,66.67%,75%):}`
अतः जिस संकरित कक्षक में `%s` गुण अधिक होगा वह आकार में छोटा होगा। [ क्योंकि s केन्द्र के अधिक निकट होता है। ] अतः वैघुत ऋणता अधिक होगी। अतः
`spltsp^(2)ltsp^(3)` (आकार क्रम )
`spgtsp^(2)gtsp^(3)` `( %s गुण)`
`spltsp^(2)ltsp^(3)` `( %p गुण)`
`spgtsp^(2)gtsp^(3)` ( वैघुत ऋणता क्रम )
अतः sp संकरण वाले तत्व की वैघुत ऋणता `sp^(2)` व `sp^(3)` संकरण वाले तत्वों से अधिक होगी।
कार्बन परमाणु अपने यौगिकों में तीन प्रकार की संकरण अवस्था प्रदर्शित करता है।
sp, `sp^(2)` व `sp^(3)` अतः sp संकरित C परमाणु की वैघुत ऋणता `sp^(2)` व `sp^(3)` संकरित C से अधिक होगी।
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