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Class 11
BIOLOGY
निम्नलिखित में विभेद करों - अ. ट्रेकीड...

निम्नलिखित में विभेद करों -
अ. ट्रेकीड तथा वाहिका। ब. पैरेंकाइमा तथा कॉलेंकाइमा।
स. रसदारू तथा अंतः काष्ठ। द. खला तथा बंद संवहन बंडल।

लिखित उत्तर

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(अ) ट्रेकीड-जाइलम मूल से पानी तथा खनिज लवण को तने तथा पत्तियों तक पहुंचाने के लिए एक संवहन ऊतक की तरह कार्य करता हैं। यह पौधे के अंगों को यांत्रिक सहारा भी देती हैं वह वाहिनीकी (ट्रैकीड) कहलाती है। इसके दोनों सिरे बन्द होते हैं। वाहिका-यह कम लंबी व अधिक चौड़ी नली हैं। इसमें बहुत-सी कोशिकाएँ होती हैं, जिन्हें वाहिका अवयव कहते हैं। प्रत्येक की भित्ति लिग्निनी होती हैं और उसमें बड़ी केन्द्र गुहिका होती हैं। दोनों सिरे खुले होते हैं।
(ब) पैरेंकाइमा-पैरंकाइमा अंगों के अंदर के मुख्य घटक हैं। पैरेंकाइमा की कोशिकाएं समव्यासीय (आइसोडामिट्रिक) होती है। उनका आकार गोलाकार, अंडाकार, बहुकोणीय अथवा लंबाकार हो सकता है।
कॉलेंकाइमा-कॉलेंकाइमा द्विबीजपत्री पौधों की बाह्यत्वचा के नीचे होते हैं। यह या तो एक समान सतह में होते हैं अथवा चकती में होते हैं। इनकी कोशिकाओं की भित्ति पतली होती हैं।
(स) रसदारू तथा अंतः काष्ठ-पदार्थ अंतःकाष्ठ को कठोर, चिरस्थायी बनाते हैं और लकड़ी को सूक्ष्म जीवियों तथा कीड़ों से भी बचाते है। इस क्षेत्र में मृत तत्त्व होते हैं जिनकी भित्ति बहुत ही लिग्नी होती हैं। हृदयदारू कहते हैं। अंतःकाष्ठ पानी का संवहन नहीं करता। यह केवल तने को यांत्रिक सहारा देता हैं। द्वितीयक जाइलम की परिधि क्षेत्र को रसदारू कहते हैं, जो हल्के रंग का होता हैं। यह मूल से पानी तथा खनिज लवण को पत्तियों तक पहुँचाता हैं।
द. खुला तथा बंद संवहन बंडल-द्विबीजपत्री तने में प्राथमिक जाइलम तथा प्राथमिक फ्लोएम के बीच में स्थित कैंबियम है तो उसे खुला और यदि कैबियम अनुपस्थित तो उसे बन्द संवहन बंडल कहते हैं।
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