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Class 11
BIOLOGY
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निम्न पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए- किण्वन

लिखित उत्तर

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सुनने की क्रियाविधि (Mechanism of Hearing)- कॉर्टी का अंग वास्तविक श्रवण अंग होता है। सर्वप्रथम ध्वनि तंरगे बाह्य कर्ण कुहर में प्रवेश कर कर्ण पटह (Ear drum) से टकराती है जिससे उसमें कम्पन्न उत्पन्न होते हैं । यहाँ से कम्पन्न मध्य कर्ण की तीनों कर्ण अस्थियों द्वारा फेनेस्ट्रा ओवेलिस में पहुँचते हैं। कर्ण अस्थिकाएँ ध्वनि के कम्पनों को 20 गुना बढ़ा देती है। फेनेस्ट्रा ओवेलिस के कम्पन्न कॉक्लिया के स्केलावेस्टीब्यूलाई में आने के बाद दो दिशाओं में जाते हैं। प्रथम ये हेलिकोट्रोमा से स्केला टिम्पेनाई में आते हैं और यहाँ आते-आते ध्वनि तंरगे लगभग समाप्त हो जाती है। दूसरी कम्पन्न तरंग स्कैला मिडिया के एण्डोलिम्फ में जाती है जिससे कॉर्टी का अंग व टैक्टोरियल कला विपरीत दिशा में गति करते हैं, इसके कारण कॉर्टी के अंग के संवेदी रोम टैक्टोरियल कला से टकराते हैं। यह टैक्टोरियल कला कॉक्लियर तन्त्रिका शाखा द्वारा श्रवण तन्त्रिका को सन्देश भेजती है और मस्तिष्क में सुनने का सही ज्ञान होता है।
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