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PHYSICS
एक ट्रक तथा कार समान गतिज ऊर्जा से गतिमा...

एक ट्रक तथा कार समान गतिज ऊर्जा से गतिमान हैं । वे ब्रेकों द्वारा समान मंदन बल लगाकर रोके जाते हैं । ट्रक पहले रुकेगा या कार ।

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चीटियाँ ईर्ष्यालु नहीं होती दौड़ती भागती एक-दूसरे को संदेश पहुँचाती जीवन को परखती पहुँचती हैं वहाँ, जहाँ कोई नहीं पहुंचा कभी चींटियों से पहले। संकेतों में करती हैं, वे शब्द संधान रास्ता नहीं भूलती कभी स्मृति में रखती हैं संजोकर दोस्त और दुश्मन के चेहरे बिखरती है कभी-कभार वे मगर हर बार नए सिरे टटोलती हैं वे पूर्वजों द्वारा छोड़ी गई गंध फिर से एकजुट होते हुए। मित्र और शत्रु के चेहरों को चीटियाँ

निम्न कविता की पंक्तियाँ पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प चुनिए: नदी के उस पार जाने को मेरा बहुत मन करता है माँ वहाँ कतार में बँधी हैं नावें बाँस की खूटियों से। उसी रास्ते दूर-दूर जाते हैं हल जोतने किसान कंधों पर हल रखे, रभाते हुए गाय-बैल तैरकर जाते हैं उस पार घास चरने शाम को जब वे लौटते हैं घर ऊँची-ऊँची घास में छिपकर हुक्के-हो करते हैं सियार। माँ तू बुरा न माने तो बड़ा होकर मैं नाव खेने वाला एक नाविक बनूँगा। तैरकर जाते हैं उस पार' पंक्ति में तैरकर' शब्द को पहले रखा गया है क्योंकि

चीटियाँ ईर्ष्यालु नहीं होती दौड़ती भागती एक-दूसरे को संदेश पहुँचाती जीवन को परखती पहुँचती हैं वहाँ, जहाँ कोई नहीं पहुंचा कभी चींटियों से पहले। संकेतों में करती हैं, वे शब्द संधान रास्ता नहीं भूलती कभी स्मृति में रखती हैं संजोकर दोस्त और दुश्मन के चेहरे बिखरती है कभी-कभार वे मगर हर बार नए सिरे टटोलती हैं वे पूर्वजों द्वारा छोड़ी गई गंध फिर से एकजुट होते हुए। बिखरी हुई चीटियाँ फिर से एकजुट कैसे होती हैं?

चीटियाँ ईर्ष्यालु नहीं होती दौड़ती भागती एक-दूसरे को संदेश पहुँचाती जीवन को परखती पहुँचती हैं वहाँ, जहाँ कोई नहीं पहुंचा कभी चींटियों से पहले। संकेतों में करती हैं, वे शब्द संधान रास्ता नहीं भूलती कभी स्मृति में रखती हैं संजोकर दोस्त और दुश्मन के चेहरे बिखरती है कभी-कभार वे मगर हर बार नए सिरे टटोलती हैं वे पूर्वजों द्वारा छोड़ी गई गंध फिर से एकजुट होते हुए। 'ईर्ष्यालु' किसे कहा जाता है?

चीटियाँ ईर्ष्यालु नहीं होती दौड़ती भागती एक-दूसरे को संदेश पहुँचाती जीवन को परखती पहुँचती हैं वहाँ, जहाँ कोई नहीं पहुंचा कभी चींटियों से पहले। संकेतों में करती हैं, वे शब्द संधान रास्ता नहीं भूलती कभी स्मृति में रखती हैं संजोकर दोस्त और दुश्मन के चेहरे बिखरती है कभी-कभार वे मगर हर बार नए सिरे टटोलती हैं वे पूर्वजों द्वारा छोड़ी गई गंध फिर से एकजुट होते हुए। काव्यांश में 'मगर' का अर्थ है

चीटियाँ ईर्ष्यालु नहीं होती दौड़ती भागती एक-दूसरे को संदेश पहुँचाती जीवन को परखती पहुँचती हैं वहाँ, जहाँ कोई नहीं पहुंचा कभी चींटियों से पहले। संकेतों में करती हैं, वे शब्द संधान रास्ता नहीं भूलती कभी स्मृति में रखती हैं संजोकर दोस्त और दुश्मन के चेहरे बिखरती है कभी-कभार वे मगर हर बार नए सिरे टटोलती हैं वे पूर्वजों द्वारा छोड़ी गई गंध फिर से एकजुट होते हुए। चीटियों के स्वभाव में नहीं है ।

निर्देशः कविता को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प का चयन कीजिए। चीटियाँ ईर्ष्यालु नहीं होती दौड़ती भागती एक-दूसरे को संदेश पहुँचाती जीवन को परखती पहुँचती हैं वहाँ, जहाँ कोई नहीं पहुंचा कभी चींटियों से पहले। संकेतों में करती हैं, वे शब्द संधान रास्ता नहीं भूलतीं कभी स्मृति में रखती हैं संजोकर दोस्त और दुश्मन के चेहरे बिखरती हैं कभी-कभार वे मगर हर बार नए सिरे टटोलती हैं वे पूर्वजों द्वारा छोड़ी गई गंध फिर से एकजुट होते हुए। चींटियाँ आपस में बातचीत कैसे करती हैं?

दिए गए पद्यांश को ध्यान से पढ़िए और उसके आधार पर पूछे गए प्रश्न का यथोचित उत्तर दीजिए। पद्यांश 27 नदी के उस पार जाने को मेरा बहुत मन करता है माँ, वहाँ कतार में बँधी है, नावें बॉस की खूँटियों से। उसी रास्ते दूर-दूर जाते हैं हल जोतने किसान कन्धों पर हल रखें, रँभाते हुए गाय-बैल तैरकर जाते हैं उस पार घास चरने शाम को जब वे लौटते हैं घर ऊँची-ऊँची घास में छिपकर हुक्के-हो करते हैं सियार । माँ तू बुरा न माने तो बड़ा होकर में नाव खेने वाला एक नाविक बनूँगा। 'तैरकर जाते हैं उस पार' पंक्ति में 'तैरकर' शब्द को पहले रखा गया है, क्योकि

कविता को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प का चयन कीजिए। चीटियाँ ईर्ष्यालु नहीं होती दौड़ती भागती 'एक-दूसरे को संदेश पहुँचातीं जीवन को परखती पहुँचती हैं वहाँ, जहाँ कोई नहीं पहुंचा कभी चींटियों से पहले। संकेतों में करती हैं, वे शब्द संधान रास्ता नहीं भूलती कभी स्मृति में रखती हैं संजोकर दोस्त और दुश्मन के चेहरे बिखरती हैं कभी-कभार वे मगर हर बार नए सिरे टटोलती हैं वे पूर्वजों द्वारा छोड़ी गई गंध फिर से एकजुट होते हुए। काव्यांश में 'मगर' का अर्थ है

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