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Class 9
PHYSICS
सोनार की कार्यविधि तथा उपयोगों का वर्णन ...

सोनार की कार्यविधि तथा उपयोगों का वर्णन कीजिए।

लिखित उत्तर

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सोनार में एक प्रेषित्र व एक संसूचक होता है। यह किसी नाव या जहाज में लगाय जाता है।
प्रेषित्र पराध्वनि तरंगें उत्पन्न करता है तथा उन्हें संचरित करता है। ये तरंगे समुद्री जल में होती हुई समुद्र तल में स्थित वस्तु से टकराती एवं परावर्तित होती है। जब वे वस्तु से परावर्तित होकर वापस लौटती हैं तो संसूचक इन्हे संसूचित करके विश्लेषित करता है। इस कार्य के लिए पहले इन तरंगों को विद्युत संकेतों में रूपांतरित किया जाता है और फिर विश्लेषित किया जाता है। स्रोत से धवनि उत्पादन से लेकर संसूचक तक पहुंचने का समय नोट कर लिया जाता है। यदि पानी में ध्वनि की चाल । ज्ञात हो तो समुद्र की गहराई या जल के भीतर कि वास्तु कि दुरी d ज्ञात कि जा सकती है। इसके लिए निम्न सम्बन्ध उपयोग में लिया जाता है
`t=(2d)/(v)`
या `d=(vt)/2`

सोनार के उपयोग-
1. पानी के भीतर की वस्तुओं जैसे पनडुब्बी, प्लाची बर्फ (हिमशैल), डूबे हुए जहाज आदि की दूरी, दिशा एवं चाल ज्ञात की जाती है।
2. समुद्र तल की गहराई ज्ञात की जाती है।
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