Home
Class 10
PHYSICS
विश्व अंतरिक्ष अभियान में भारत का महत्त्...

विश्व अंतरिक्ष अभियान में भारत का महत्त्व समझाइये।

लिखित उत्तर

Verified by Experts

विश्व अंतरिक्ष अभियान में भारत का महत्त्व- भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ( इसरो) के 1969 से अस्तित्व में आने के बाद अंतरिक्ष अभियान में भारत ने विश्व पटल पर महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
(i) भारत ने पहला रॉकेट रोहिणी-75 को 1969 में अंतरिक्ष में भेजा।
(ii) रूसी रॉकेट की सहायता से अपना पहला अंतरिक्ष यान 1975 में भेजा, जो सफलतापूर्वक कक्षा में स्थापित हुआ।
(iii) रूस की ही मदद से रूसी प्रक्षेपण यानों की सहायता से भास्कर श्रृंखला के दो कृत्रिम उपग्रह प्रक्षेपित कराके कक्षा में स्थापित किये गये।
(iv) 1981 में एप्पल उपग्रह यूरोपीयन अंतरिक्ष एजेंसी के एरियन रॉकेट की सहायता से प्रक्षेपित कराके 36000 किलोमीटर की ऊँचाई पर कक्षा में स्थापित किया गया।
(v) भारत अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के विकास के साथ उपग्रह प्रक्षेपण वाहन की क्षमता बढ़ाने में सफल हुआ तथा जल्दी ही उपग्रह प्रक्षेपक वाहन, एस.एल.वी.-3 के रूप में तैयार कर लिया जो उपग्रहों को अंतरिक्ष में भेजने में सक्षम था। इसने अपनी दूसरी उड़ान से रोहिणी उपग्रह को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में भेजकर कक्षा में स्थापित कर दिया।
(vi) एस.एल.वी.-3 की सफल उड़ान के बाद भारत ने अपने बल पर अपने ही प्रक्षेपण वाहन से देश की सेवा के लिये अनेक उपग्रह अंतरिक्ष में भेजे हैं, जो पृथ्वी की कक्षा में चक्कर लगाते हुये दूर संचार, दूर संवेदन एवं महत्वपूर्ण जानकारियाँ उपलब्ध कराने की सेवाएँ देते आ रहे हैं।
(vii) भारत ने जून 2016 में अपने प्रक्षेपण यान से 20 अंतरिक्ष यान एक साथ प्रक्षेपित किये हैं, जिनमें 17 विदेशी हैं।
(viii) 2008 में स्पेस क्राफ्ट चन्द्रयान-1 को चन्द्रमा की कक्षा में स्थापित कर जल की चन्द्रमा पर उपस्थिति का पता लगाया है। भारत जल्दी ही चन्द्रयान-2 को चन्द्रमा की कक्षा में स्थापित कर एक गाड़ी चन्द्रमा की सतह पर उतारने वाला है। इस गाड़ी पर लगे यंत्र चन्द्रमा की सतह की जानकारी देश को उपलब्ध करायेंगे।
(ix) भारत ने मंगल ग्रह की कक्षा में मंगल यान. भी सफलतापूर्वक प्रक्षेपित कर स्थापित किया है तथा मंगलयान को भेजकर भारत ने अंतरिक्ष अध्ययन के क्षेत्र में प्रथम स्थान बना लिया है।
(x) भारत की एक बड़ी सफलता शक्तिशाली रॉकेट ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण वाहन (PSLV) के विकास के रूप में पाई गई है। यह अंतरिक्ष यान को पृथ्वी के ध्रुवों की परिक्रमा करने की स्थिति में पहुँचाता है। इस वाहन की विश्वसनीयता सर्वाधिक होने के कारण प्रत्येक देश इस अंतरिक्ष वाहन से ही अपने अंतरिक्ष यान भेजना पसन्द करते हैं।
(xi) भारत ने अपना भूतुल्यकाली उपग्रह प्रक्षेपण वाहन (GSLV) विकसित किया है, जिसका उपयोग भूतुल्यकाली यानों के प्रक्षेपण में किया जाता है।
(xii) अभी हाल में फरवरी 2017 में भारत ने मात्र 18 मिनट में एक ही रॉकेट से 104 उपग्रह प्रक्षेपित किये हैं। यह भारत की सर्वश्रेष्ठ एवं महान उपलब्धि है जो अंतरिक्ष अध्ययन के क्षेत्र में विश्व में भारत को शीर्ष पर पहुँचाती है।
(xiii) भारत का अध्ययन करने हेतु आदित्य यान भेजने की योजना को शीघ्र क्रियान्वयन देने के लिए प्रयत्नशील है।
Promotional Banner
Recommended Questions
  1. विश्व अंतरिक्ष अभियान में भारत का महत्त्व समझाइये।

    Text Solution

    |

  2. C(3)वC(4)चक्र में क्या अन्तर है?  समझाइये।

    Text Solution

    |

  3. प्रतिस्पर्धा एवं संघर्ष, स्वतंत्र भारत में संघर्ष, नेपाल का संघर्ष

    Text Solution

    |

  4. यूरोप में मुद्रण का इतिहास| 19वीं सदी में भारत में प्रेस का विकास

    Text Solution

    |

  5. मध्य प्रदेश बोर्ड|बांग्लादेश का उदय#!#भारत में आपातकाल#!#भारत का आणविक...

    Text Solution

    |

  6. वसंत - अक्षरों का महत्त्व | निबंध | अक्षरों का महत्त्व भाग -1

    Text Solution

    |

  7. वसंत - अक्षरों का महत्त्व | निबंध | अक्षरों का महत्त्व भाग -2

    Text Solution

    |

  8. अंतरिक्ष में रेखा का समीकरण|दो रेखाओं के मध्य कोण#!#उदाहरण

    Text Solution

    |

  9. रिवीजन|प्रतिस्पर्धा एवं संघर्ष#!#नेपाल का संघर्ष#!#भारत में संघर्ष

    Text Solution

    |