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PHYSICS
चरक का विश्व के पहले आयुर्वेद चिकित्सक क...

चरक का विश्व के पहले आयुर्वेद चिकित्सक के रूप में आयुर्वेद चिकित्सा के क्षेत्र में क्या योगदान रहा है ?

लिखित उत्तर

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(1) चरक विश्व के पहले चिकित्स्क थे, जिन्होंने पाचन उपापचय और शरीर प्रतिरक्षा की अवधारणा प्रस्तुत की |
(2) चरक ने बिमारी का कारण शरीर में उपस्थित तीन दोषों (वात, पित्त और कफ) के असंतुलन को बताया, जो आज भी प्रासंगिक माना जाता है |
(3) विश्व स्तर पर प्रख्यात उनके द्वारा लिखा गया ग्रंथ .चरक संहिता. आयुर्वेद चिकित्सा विज्ञान का प्राचीनतम ग्रंथ है, जो आयुर्वेद चिकिस्ता की समस्याओं का समाधान सुझाता है |
(4) चरक द्वारा आज से लगभग 2000 वर्ष पहले ही आनुवंशिकी के मूल सिद्धान्त को जान लिया गया था | जिसमे शिशु के लिंग निर्धारण के कारण, बच्चों में पाए जाने वाले आनुवांशिक दोषों के कारण का स्पष्टीकरण प्रस्तुत किया गया |
(5) चरक ने ह्रदय को शरीर के नियंत्रण केंद्र के रूप में माना, जिसका संबंध शरीर की मुख्य धमनियों से होता है |
(6) चरक ने अपने मुख्य ग्रंथ .चरक संहिता. में चिकित्सको एवं चिकित्सा विज्ञान के विद्यार्थियों के लिए कुछ निर्देशों और प्रतिज्ञाओं का उल्लेख किया जो एक अच्छा आयुर्वेद चिकित्स्क बनने के लिए आज भी प्रासंगिक है |
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