(अ) मेण्डल में अपने प्रयोगों के लिए उधान मटर पादप का चयन किया, क्योंकि-
(i) यह छोटा शाकीय पादप है एवं कम जगह में कई पादप उगाए जा सकते है |
(ii) यह एकवर्षीय पादप है एवं जीवनचक्र छोटा होने के कारण वर्ष में 2-3 पीढ़ी प्राप्त कर सकते हैं |
(iii) यह स्वपरागित पौधा है क्योंकि पुष्प द्विलिंगी होते है |
(iv) इसका पुष्प नौकाकार होता है एवं विपुनसं विधि से कृत्रिम परागण कराया जा सकता है |
(v) इमसें युग्म विकल्पि लक्षण (विपर्यासी लक्षण) स्पष्ट दिखाई देते है |
(ब) मेण्डल का प्रभावित का नियम (Mendel.s law of dominance)-एक संकर संकरण के प्रयोग में जब एक ही लक्षण के दो विरोधी गुणों वाले पौधों के बिच संकरण कराया जाता है, तो प्रथम पीढ़ी `(F_(1))` में वही गुण प्रदर्शित होता है जो प्रभावी होता है, इसी को प्रभावित का नियम कहते हैं |
इस क्रिया में जो गुण या प्रकट होता है या जो दूसरे गुण को प्रदर्शित नहीं होने देता, उसे प्रभावी गुण या कारक कहते हैं | जबकि वह गुण जो प्रकट नहीं होता, उसे अप्रभावी गुण या कारक कहते हैं |
उदाहरण-मेण्डल ने नियम कई पुष्टि हेतु जब मटर के समयुग्मजी लम्बे (TT) पौधे तथा समयुग्मजी बौने (tt) पौधों के बीच संकरण कराया तो संकरण के फलस्वरूप प्रथम पीढ़ी `(F_(1))` में जो पौधे प्राप्त करता है |
प्रभावी विशेषता समयुग्मजी (TT) और विषमयुग्मजी (Tt) दोनों परिस्थितियों में प्रकट होती है | जबकि अप्रभावी विशेषता केवल समयुग्मजी (tt) अवस्था में ही प्रकट होती है |
