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Class 10
BIOLOGY
मूत्र निर्माण की गुच्छीय निस्पंदन क्रिया...

मूत्र निर्माण की गुच्छीय निस्पंदन क्रियाविधि को समझाइये।

लिखित उत्तर

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(अ) शरीर में होने वाली उपापचयी क्रिया के फलस्वरूप निर्मित नाइट्रोजनी विषाक्त अपशिष्टों को शरीर से बाहर निकालने की क्रिया उत्सर्जन कहलाती है।
(ब) गुच्छी निस्यंदन की क्रिया विधि-यह क्रिया बोमेन केप्सूल में स्थित केशिका गुच्छ में सम्पन् होती है।
• अभिवाही धमनिका द्वारा केशिका गुच्छ में रक्त अधिक दाब के साथ आता है। अधिक दाब के कारण रक्त ग्लोमेरूलस अर्थात् केशिका गुच्छ व बोमेन सम्पुट की पतली भित्ति से होते हुए छन जाता है।
• छनित या निस्पंदित तरल पदार्थ बोमेन सम्पुट की अवकाशिका (गुहा) में आ जाता है जिसे निस्यद या ग्लोमेरूलर फिल्ट्रेट कहते हैं।
इस निस्यंद में ग्लूकोज, अमीनो अम्ल, लवण, यूरिया आदि पदार्थ होते
• प्रति मिनट लगभग 1000-1200 ml रक्त का निस्पंदन होता है।
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