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PHYSICS
अप्रगामी तरंगों में प्रस्पन्द वे बिन्दु ...

अप्रगामी तरंगों में प्रस्पन्द वे बिन्दु हैं, जहाँ :

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चीटियाँ ईर्ष्यालु नहीं होती दौड़ती भागती एक-दूसरे को संदेश पहुँचाती जीवन को परखती पहुँचती हैं वहाँ, जहाँ कोई नहीं पहुंचा कभी चींटियों से पहले। संकेतों में करती हैं, वे शब्द संधान रास्ता नहीं भूलती कभी स्मृति में रखती हैं संजोकर दोस्त और दुश्मन के चेहरे बिखरती है कभी-कभार वे मगर हर बार नए सिरे टटोलती हैं वे पूर्वजों द्वारा छोड़ी गई गंध फिर से एकजुट होते हुए। चीटियों के स्वभाव में नहीं है ।

चीटियाँ ईर्ष्यालु नहीं होती दौड़ती भागती एक-दूसरे को संदेश पहुँचाती जीवन को परखती पहुँचती हैं वहाँ, जहाँ कोई नहीं पहुंचा कभी चींटियों से पहले। संकेतों में करती हैं, वे शब्द संधान रास्ता नहीं भूलती कभी स्मृति में रखती हैं संजोकर दोस्त और दुश्मन के चेहरे बिखरती है कभी-कभार वे मगर हर बार नए सिरे टटोलती हैं वे पूर्वजों द्वारा छोड़ी गई गंध फिर से एकजुट होते हुए। काव्यांश में 'मगर' का अर्थ है

चीटियाँ ईर्ष्यालु नहीं होती दौड़ती भागती एक-दूसरे को संदेश पहुँचाती जीवन को परखती पहुँचती हैं वहाँ, जहाँ कोई नहीं पहुंचा कभी चींटियों से पहले। संकेतों में करती हैं, वे शब्द संधान रास्ता नहीं भूलती कभी स्मृति में रखती हैं संजोकर दोस्त और दुश्मन के चेहरे बिखरती है कभी-कभार वे मगर हर बार नए सिरे टटोलती हैं वे पूर्वजों द्वारा छोड़ी गई गंध फिर से एकजुट होते हुए। बिखरी हुई चीटियाँ फिर से एकजुट कैसे होती हैं?

चीटियाँ ईर्ष्यालु नहीं होती दौड़ती भागती एक-दूसरे को संदेश पहुँचाती जीवन को परखती पहुँचती हैं वहाँ, जहाँ कोई नहीं पहुंचा कभी चींटियों से पहले। संकेतों में करती हैं, वे शब्द संधान रास्ता नहीं भूलती कभी स्मृति में रखती हैं संजोकर दोस्त और दुश्मन के चेहरे बिखरती है कभी-कभार वे मगर हर बार नए सिरे टटोलती हैं वे पूर्वजों द्वारा छोड़ी गई गंध फिर से एकजुट होते हुए। मित्र और शत्रु के चेहरों को चीटियाँ

चीटियाँ ईर्ष्यालु नहीं होती दौड़ती भागती एक-दूसरे को संदेश पहुँचाती जीवन को परखती पहुँचती हैं वहाँ, जहाँ कोई नहीं पहुंचा कभी चींटियों से पहले। संकेतों में करती हैं, वे शब्द संधान रास्ता नहीं भूलती कभी स्मृति में रखती हैं संजोकर दोस्त और दुश्मन के चेहरे बिखरती है कभी-कभार वे मगर हर बार नए सिरे टटोलती हैं वे पूर्वजों द्वारा छोड़ी गई गंध फिर से एकजुट होते हुए। 'ईर्ष्यालु' किसे कहा जाता है?