`C_(2)` और `C_(3)` का श्रेणीक्रम संयोजन , धारिता C. के बराबर है जहाँ
`(1)/(C)=(1)/(C_(2))+(1)/(C_(3))`
या `C.=(C_(2)C_(3))/(C_(2)+C_(3))=(200xx200)/(200+200)`
या `C.100pF`
दिया गया परिपथ , चित्र 4.38(b) में दिखाए परिपथ जैसा हो जाता है। क्योंकि `C_(1)` और C समांतर क्रम में जुड़े हैं , इसलिए उनकी परिणामी धारिता `C^(n)` और `C_(4)` श्रेणीक्रम में जुड़े हैं [ चित्र 4.38(c )] और उनकी परिणामी धारिता C है जहाँ
`(1)/(C)=(1)/(C_(4))+(1)/(C^(n))` या `C=(C_(4)C^(n))/(C_(4)+C^(n))=((100xx200)/(100+200))pF`
`C=((200)/(3))pF`
मान लें कि `C_(1),C_(2),C_(3)` और `C_(4)` के सिरों वोल्टताएँ क्रमशः `V_(1),V_(2)V_(3)` और `V_(4)` हैं। यह भी मान लें कि C. और `C^(n)` के सिरों पर वोल्टताएँ क्रमशः V और `V^(n)` हैं। चित्र 4.38 (d) से
`(V^(n))/(V_(4))=(C_(4))/(C^(n))=(100pF)/(200pF)=(1)/(2)`
या `V_(4)=2V^(n)`
क्योंकि `V_(4)+V^(n)=300V`, इसलिए `V_(4)=200` और `V^(n)=100V`
यहाँ वोल्टता `V^(n),C^(n)` के सिरों पर है (जो `C_(1)` और C. का समांतर संयोजन है ।
स्पष्टतया `V_(1)=100V` और V.=100V परन्तु `V_(2)+V_(3)=V.=100V`
क्योंकि `C_(2)=C_(3),V_(2)=V_(3)=50V`,
इसलिए `V_(1)=100V,V_(2)=50V,V_(3)=50V_(4)=200V संधारित्र `C_(1)`पर आवेश `=C_(1)V_(1)=(100xx10^(-12)F)(100F)=10^(-8)C`
संधारित्र `C_(2)पर आवेश `=C_(2)V_(2)=(200xx10^(-12)F)(50V)=10^(-8)C`
संधारित्र `C_(3)` पर आवेश `=C_(3)V_(3)=(200xx10^(-12)F)(50V)=10^(-8)C`
संधारित्र `C_(4)` पर आवेश
`=C_(4)V_(4)=(100xx10^(-12)F)(200V)=2xx10^(-8)C`