चुंबक के चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र को प्रदर्शित करने वाले वक्र बंद आरेख पथ को चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ कहते हैं। चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं के गुण निम्नलिखित हैं -
(i) यह चुंबक के बाहर उत्तरी ध्रुव से वक्ररेखा में चलकर दक्षिणी ध्रुव में आ जाती है और चुंबक के अंदर सीधी दक्षिणी ध्रुव से उत्तरी ध्रुव की ओर आ जाती है।
(ii) ये बंद वक्र में होती हैं और तीर का चिह्न चुंबकीय क्षेत्र की दिशा को प्रदर्शित करते हैं।
(ii) चुंबक के ध्रुव के पास ये एक-दूसरे के बहुत निकट होती हैं क्योंकि वहाँ चुंबकीय क्षेत्र अत्यधिक प्रबल होता है।
(iv) ये क्षेत्र रेखाएँ कहीं एक-दूसरे को प्रतिच्छेद नहीं करती हैं।
(v) ये एक ही दिशा में गमन करते हुए एक-दूसरे को विकर्षित करती हैं।
प्रमाण : एक कार्डबोर्ड लेकर उसे स्थिर कर देते हैं ताकि हिल-डुल न सके। कार्डबोर्ड के केन्द्र में एक छिद्र कर देते हैं। छिद्र से होते हुए एक चालक तार को इस प्रकार रखते हैं कि वह कार्डबोर्ड तल पर लंबवत् रहे। चालक तार को बैटरी एवं कुंजी से चित्रानुसार जोड़ देते हैं। तत्पश्चात् चालक तार से धारा प्रवाहित करते हैं। अब बोर्ड के ऊपर कुछ लौह चूर्ण को छितरा देते हैं।
तत्पश्चात् चालक तार से धारा प्रवाहित करते हैं और देखते हैं कि लौह-चूर्ण तार के चारों ओर संकेद्री वृत्तों के रूप में सज जाते हैं। ये वृत्त चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं को दर्शाते हैं और वृत्त में तीर का चिह्न उत्पन्न चंबकीय दिशा को दर्शाता है।
