Home
Class 11
PHYSICS
एक ही आकार की तेल की बँद तथा जल की बूँद ...

एक ही आकार की तेल की बँद तथा जल की बूँद एक ऊँची मीनार की चोटी से गिरायी जाती हैं। तेल का घनत्व जल से अधिक है।
(i) वायु को श्यानता तथा उत्प्लावकता को ध्यान में रखते हुए बताइये कि कौन-सी बूँद पृथ्वी पर पहले पहुँचेगी? (ii) यदि बायु का घनत्व तथा श्यानता नगण्य माने तो कौन-सी बूंद पृथ्वी पर पहले पहुँचेगी?

Promotional Banner

Similar Questions

Explore conceptually related problems

यदि बालक में अक्षरों एवं शब्दों के सही आकार, क्रम तथा अक्षरों और शब्दों के बीच की दूरी से सही अन्तर को समझने की योग्यता का विकास करना है, तो बालकों को कौन-सी दक्षता का प्रशिक्षण देना चाहिए

दिए गए पद्यांश को ध्यान से पढ़िए और उसके आधार पर पूछे गए प्रश्न का यथोचित उत्तर दीजिए। पद्यांश 27 नदी के उस पार जाने को मेरा बहुत मन करता है माँ, वहाँ कतार में बँधी है, नावें बॉस की खूँटियों से। उसी रास्ते दूर-दूर जाते हैं हल जोतने किसान कन्धों पर हल रखें, रँभाते हुए गाय-बैल तैरकर जाते हैं उस पार घास चरने शाम को जब वे लौटते हैं घर ऊँची-ऊँची घास में छिपकर हुक्के-हो करते हैं सियार । माँ तू बुरा न माने तो बड़ा होकर में नाव खेने वाला एक नाविक बनूँगा। 'तैरकर जाते हैं उस पार' पंक्ति में 'तैरकर' शब्द को पहले रखा गया है, क्योकि

दिए गए पद्यांश को ध्यान से पढ़िए और उसके आधार पर पूछे गए प्रश्न का यथोचित उत्तर दीजिए। पद्यांश 27 नदी के उस पार जाने को मेरा बहुत मन करता है माँ, वहाँ कतार में बँधी है, नावें बॉस की खूँटियों से। उसी रास्ते दूर-दूर जाते हैं हल जोतने किसान कन्धों पर हल रखें, रँभाते हुए गाय-बैल तैरकर जाते हैं उस पार घास चरने शाम को जब वे लौटते हैं घर ऊँची-ऊँची घास में छिपकर हुक्के-हो करते हैं सियार । माँ तू बुरा न माने तो बड़ा होकर में नाव खेने वाला एक नाविक बनूँगा। नावों को बाँसों की खूँटियों से क्यों बाँधा गया होगा?

निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उसके नीचे दिये गये बहुविकल्पी प्रश्नों में सही विकल्प का चयन करों। क्रोध को हम एक बहुत ही हानि रहित कमजोरी की तरह देखने के लिए प्रवृत होते हैं। इसे हम महज एक प्राकृतिक दुर्बलता,एक पारिवारिक असफलता, एक स्वभाव संबधी विषय के रूप वर्णित करते हैं न कि किसी व्यक्ति के चरित्र का आकलन करने हेतु गम्भीरता से गणना में सम्मिलित करने का तत्व है और बाइबल मानव स्वभाव के सर्वाधिक विनाशकारी तत्वों में से एक के रूप में इसकी भर्त्सना करती है। क्रोध की एक विशेषता यह है कि यह गुणवान लोगों का एक अवगुण है तथा उच्च चरित्र वाले माने जाने वाले व्यक्ति पर यह अक्सर एक कलंक की तरह होता है। क्रोधी स्वभाव और उच्च नैतिक चरित्र के बीच में यह अनुकूलता आचार शास्त्र की सर्वाधिक विलक्षण एवं दुखद समस्यायों में से एक है। किसी भी प्रकार का पाप, कोई भी शराबखोरी या नशेबाजी समाज को इतना मानवता विहीन नहीं बनाते जितना क्रोध बनाता है। जीवन को कडुआ बना देने, जन समुदायों को तोड़ने ,पवित्रतम रिश्तों-नातों को नष्ट करने, घरों को बर्बाद करने, पुरुष तथा महिलाओं को मुरझा देने, बचपन से उसकी ताजगी और खिलखिलाहट छिन लेने, संक्षिप्त में एक शुद्ध स्वयमेव दुखोत्पादक शक्ति के रूप में क्रोध की सत्ता सर्वोपरि है। ईर्ष्या, घमंड, अनुदारता, निर्दयता, स्वयं को सही समझने की प्रवृति, भड़कीलापन , अड़ियलपन, उदासी- कम ज्यादा मात्रा में ये सब उग्र स्वभाव के ही तत्त्व है। इस प्रकार के स्वभाव के लिए स्वर्ग में सचमुच ही कोई स्थान नहीं है। इस प्रकार की मनःस्थितिवाला व्यक्ति स्वर्ग में स्थित सभी लोगों के लिए जीवन केवल यातनापूर्ण ही बनाएगा। प्रस्तुत गद्यांश में आचार शास्त्र की सबसे जटिल समस्या एक कौन सी है?

दिए गए पद्यांश को ध्यान से पढ़िए और उसके आधार पर पूछे गए प्रश्न का यथोचित उत्तर दीजिए। पद्यांश 27 नदी के उस पार जाने को मेरा बहुत मन करता है माँ, वहाँ कतार में बँधी है, नावें बॉस की खूँटियों से। उसी रास्ते दूर-दूर जाते हैं हल जोतने किसान कन्धों पर हल रखें, रँभाते हुए गाय-बैल तैरकर जाते हैं उस पार घास चरने शाम को जब वे लौटते हैं घर ऊँची-ऊँची घास में छिपकर हुक्के-हो करते हैं सियार । माँ तू बुरा न माने तो बड़ा होकर में नाव खेने वाला एक नाविक बनूँगा। इस कविता में कौन किसे सम्बोधित कर रहा है?

निर्देशः गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प चुनिए। हमारे विशाल देश में हिमालय की अनन्त हिमराशि वाले ग्लेशियरों ने जिन नदियों को जन्म दिया है, उनमें गंगा और यमुना नाम की नदियाँ हमारे जीवन की धमनियों की तरह रही हैं। उनकी गोद में हमारे पूर्वजों ने सभ्यता के प्रांगण में अनेक नए खेल खेले। उनके तटों पर जीवन का जो प्रवाह प्रचलित हुआ, वह आज तक हमारे भूत और भावी जीवन को सींच रहा है। भारत हमारा देश है और हम उसके नागरिक हैं यह एक सच्चाई हमारे रोम-रोम में बिंधी हुई है। नदियों की अन्तर्वेदी में पनपने वाले आदि युग के जीवन पर हम अब जितना अधिक विचार करते हैं हमको अपने विकास और वृद्धि की सनातन जड़ों का पृथ्वी के साथ संबंध उतना ही अधिक घनिष्ठ जान पड़ता है। हमारे धार्मिक पर्वो पर लाखों लोग नदी और जलाशयों के तटों पर एकत्र होते हैं। पृथ्वी के एक-एक जलाशय और सरोवर को भारतीय भावना ने ठीक प्रकार से समझने का प्रयत्न किया, उनके साथ सौहार्द का भाव उत्पन्न किया जो हर एक पीढ़ी के साथ नए रूप में बँधा रहा। किन्तु आज स्थिति बड़ी विचित्र और एक सीमा तक चिन्ताजनक हो गई है। हमारी औद्योगिक क्रांति ने इन्हें प्रदूषित कर विषैला बना दिया है। जीवनदायिनी नदियाँ आज प्राणघातिनी होती जा रही हैं। मिल-बैठकर सोचने की आवश्यकता है कि क्या करें कि ये पुनः जीवनदायिनी हों और उन सोची हुई योजनाओं को अमल में लाने की भी आवश्यकता है। गंगा-यमुना को जल कहाँ से मिलता है ?

गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प चुनिए। हमारे विशाल देश में हिमालय की अनन्त हिमराशि वाले ग्लेशियरों ने जिन नदियों को जन्म दिया है, उनमें गंगा और यमुना नाम की नदियाँ हमारे जीवन की धमनियों की तरह रही हैं। उनकी गोद में हमारे पूर्वजों ने सभ्यता के प्रांगण में अनेक नए खेल खेले। उनके तटों पर जीवन का जो प्रवाह प्रचलित हुआ, वह आज तक हमारे भूत और भावी जीवन को सींच रहा है। भारत हमारा देश है और हम उसके नागरिक हैं यह एक सच्चाई हमारे रोम-रोम में बिंधी हुई है। नदियों की अन्तर्वेदी में पनपने वाले आदि युग के जीवन पर हम अब जितना अधिक विचार करते हैं हमको अपने विकास और वृद्धि की सनातन जड़ों का पृथ्वी के साथ संबंध उतना ही अधिक घनिष्ठ जान पड़ता है। हमारे धार्मिक पर्वो पर लाखों लोग नदी और जलाशयों के तटों पर एकत्र होते हैं। पृथ्वी के एक-एक जलाशय और सरोवर को भारतीय भावना ने ठीक प्रकार से समझने का प्रयत्न किया, उनके साथ सौहार्द का भाव उत्पन्न किया जो हर एक पीढ़ी के साथ नए रूप में बँधा रहा। किन्तु आज स्थिति बडी विचित्र और एक सीमा तक चिन्ताजनक हो गई है। हमारी औद्योगिक क्रांति ने इन्हें प्रदूषित कर विषैला बना दिया है। जीवनदायिनी नदियाँ आज प्राणघातिनी होती जा रही हैं। मिल-बैठकर सोचने की आवश्यकता है कि क्या करें कि ये पुनः जीवनदायिनी हों और उन सोची हुई। योजनाओं को अमल में लाने की भी आवश्यकता है। गंगा-यमुना को जल कहाँ से मिलता है?

Recommended Questions
  1. एक ही आकार की तेल की बँद तथा जल की बूँद एक ऊँची मीनार की चोटी से गिराय...

    Text Solution

    |

  2. निम्नलिखित में से कौन सी भौतिकी की शाखा नहीं है ?

    Text Solution

    |

  3. 2.55xx10^(4)N C^(-1) के नियत विद्युत क्षेत्र के प्रभाव में 12 इलेक्...

    Text Solution

    |

  4. एक परवलय की नाभि मूलबिंदु पर है तथा रेखा x=2 परवलय की नियता है , तो प...

    Text Solution

    |

  5. एक ही कोटि की दो वर्ग आव्यूहों A तथा B पर विचार कीजिये। निम्न में से ...

    Text Solution

    |

  6. सरल रेखा x + 2y =1 निर्देशांक अक्षों को A तथा B पर काटती है। मूलबिंदु ...

    Text Solution

    |

  7. अपने क्षेत्र में जल - भराव की समस्या की ओर ध्यान आकृष्ट करते हुए स्वास...

    Text Solution

    |

  8. जब 'r त्रिज्या का एक हवा का बुलबुला किसी झील की तली से सतह तक उठता है ...

    Text Solution

    |

  9. अर्थ की गहनता को समझने में कौन-सी पद्धति सर्वाधिक रूप से सहायक है

    Text Solution

    |