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PHYSICS
घूर्णी गति किसे कहते हैं ? घूर्णी गति कर...

घूर्णी गति किसे कहते हैं ? घूर्णी गति कर रहे पिंड के कोणीय वेग व जड़त्व आघूर्ण में संबंध स्थापित कीजिए ।

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एक सामान वृत्तीय गति|प्रश्न|एक सामान वृत्तीय गति - रेखीय त्वरण व कोणीय त्वरण में संबंध|वृत्तीय गति कर रहे कण के लिए गति के समीकरण|OMR|Summary

दृढ़ पिंड|दृढ़ पिंड का द्रव्यमान केंद्र|दृढ़ पिंड की सामान्य गति|घूर्णी गति|सामान्य गति|बल आघूर्ण|घूर्णी गति के कार्य एवं शक्ति|घूर्णी गति के समीकरण|One Minute Revision

कोणीय संवेग (Angular Momentum)|कोणीय संवेग का सदिश रूप (Vector form of Angular Momentum)|कोणीय संवेग और बल आघूर्ण में संबंध (Relation Between Angular Momentum and Torque)|कोणीय संवेग का ज्यामितीय अर्थ (Geometrical Meaning of Angular Momentum)|जड़त्व आघूर्ण (Moment of Inertia)|किसी पिंड के जड़त्व आघूर्ण के लिए व्यंजक (Expression for M.I. of a Body)|जड़त्व आघूर्ण का भौतिक महत्व (Physical Significance of Moment of Inertia)|घूर्णन त्रिज्या या परिभ्रमण त्रिज्या (Radius of Gyration) |घूर्णन गतिज ऊर्जा (Rotational Kinetic Energy)|OMR

हमारे व्यावहारिक अथवा वास्तविक जीवन में भी यही सिद्धांत काम करता है कि हम समाज अथवा लोगों को जो देते हैं वही हमारे पास लौटकर आता है। हम लोगों से प्यार करते हैं तो लोग भी हमें प्यार करते हैं लेकिन यदि हम लोगों से घृणा करते हैं तो वे भी हमसे घृणा ही करेंगे इसमें संदेह नहीं। यदि हम सबके साथ सहयोग करते हैं अथवा ईमानदार बने रहते हैं तो दूसरे भी हमारे प्रति सहयोगात्मक और ईमानदार हो जाते है। इसे आकर्षण का नियम कहा गया है। हम जैसा स्वभाव विकसित कर लेते हैं वैसी ही चीजें हमारी ओर आकर्षित होती हैं। गंदगी मक्खी को आकर्षित करती है तो फूल तितली को आकर्षित करते हैं। यदि हम स्वयं को फूल जैसा सुंदर, सुवासित, मसृण व रंगीन अर्थात सुंदर गुणों से युक्त बना लेंगे तो स्वाभाविक है कि समाज के सुंदर गुणी व्यक्ति हमारी ओर आकर्षित होंगे ही। यदि हम चाहते हैं कि हमारे संपर्क में केवल अच्छे लोग ही आएँ तो हमें स्वयं को उनके अनुरूप बनाना होगा - दुर्गुणों में नहीं, सदगुणों में। अपने व्यवहार को व्यवस्थित व आदतों को अच्छा करना होगा। अपनी वाणी को कोमल व मधुर बनाना होगा। केवल मात्र बाहर से नहीं, मन की गहराइयों में रचयं को सुंदर बनाना होगा। यदि हम बाहरी रुप स्वरुप से नहीं, वरन मन से सुंदर बन पाते है तो विचार और कर्म स्वयं सुंदर हो जाएंगे। जीवन रूपी सितार ठीक बजने लगेगा। जीवन के प्रति सत्यम् शिवम् और सुंदरम् का आकर्षण बढ़ने लगेगा। लेखक द्वास 'आकर्षण का नियम किसे कहा गया है?