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BIOLOGY
कृषि में जैवप्रौद्योगिकी की भूमिका पर लि...

कृषि में जैवप्रौद्योगिकी की भूमिका पर लिखें।

लिखित उत्तर

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कृषि क्षेत्र में जैव प्रौद्यागिकी का उपयोग -
(i) जीन का स्थानान्तरण : जीन अभियांत्रिकी की मदद से पौधों में कीटरोधी गुण उत्पन्न किए जाते हैं । जैसे-Bt-कपास, Bt-मक्का , Bt-धान आदि ।
(ii) होमोजाइसस की प्राप्ति : यह एक गुणित पौधों में गुणसूत्रों को दूना कर प्राप्त किया जाता है।
(iii) जैव खाद : खर-पतवार, पेड़-पौधों तथा गांबर से बने खाद जैव खाद कहलाते हैं।
(iv) जैव उर्वरक : इसमें जीवाणुओं के द्वारा मिट्टी और पौधा में नाइट्रोजन आपूर्ति करायी जाती है।
(v) तीव्र क्लोनल गुणन : मेरिस्टेन कल्चर से पौधे का गुणन किया जाता है।
(vi) भ्रूण का बचाव : भ्रूण का संवर्धन जीवित हाइब्रीड प्राप्त करने के लिए किया जाता है।
(vii) जर्मप्लाज्मा संरक्षण : इस क्रिया का प्रयोग क्लोनली प्राजानित पौधों के संरक्षण हेतु किया जाता है।
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