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BIOLOGY
निम्नलिखित के बारे में संक्षेप में लिखें...

निम्नलिखित के बारे में संक्षेप में लिखें:
(a) वाहित मल जल उपचार में सूक्ष्मजीव
(b) जैविक उर्वरक के रूप में सूक्ष्मजीव ।

लिखित उत्तर

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(a) वाहित मल जल उपचार में सूक्ष्मजीव-प्राथमिक बिहिःस्राव को बड़े वायुवीय टैंक में से गुजारा जाता है। जहाँ यह लगातार यांत्रिक रूप से हिलाया जाता है और वायु को इसमें पंप किया जाता है। इससे लाभदायक वायुवीय सूक्ष्मजीव की प्रवल सशस्त्र वृद्धि ऊर्णक के रूप में होने लगती है। वृद्धि के दौरान यह सूक्ष्मजीव वहि:स्राव में उपस्थित कार्बनिक पदार्थों के प्रमुख भागों को खतप करता है। यह वहिनाव वी० ओ० डी० (बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड) को महत्त्वपूर्ण रूप से घटाने लगता है। बीओडी ऑक्सीजन की उस मात्रा को संदर्भित करता है जो जीवाणु द्वारा एक लीटर पानी में उपस्थित कार्बनिक पदार्थों की खपत कर उन्हें ऑक्सीकृत कर दें। वाहित मल तब तक उपचार किया जाता है, जब तक बीओडी घट न जाए।
(b) आज पर्यावरण प्रदूषण चिंता का एक मुख्य कारण है। कृषि उत्पादों की बढ़ती माँगों को पूरा करने के लिए रसायन उर्वरकों का प्रयोग इस प्रदूषण के लिए महत्त्वपूर्ण है। जैव उर्वरक एक प्रकार के जीव हैं जो मृदा की पोषक गुणवत्ता को बढ़ाते हैं। जैव उर्वरकों का मुख्य स्रोत जीवाणु, कवक तथा सायनोबैक्टीरिया होते हैं। लैग्यूमिनस पादपों की जड़ों पर स्थित ग्रंथियों के बारे में हम पढ़ चुके हैं। इन ग्रंथियों का निर्माण राइजोबियम के सहजीवी संबंध द्वारा होता है। यह जीवाणु वायुमंडलीय नाइट्रोजन को स्थिरीकृत कर कार्बनिक रूप में परिवर्तित कर देते हैं। पादप इसका प्रयोग पोषकों के रूप में करते हैं। अन्य जीवाणु (उदाहरण ऐजोस्पाइरिलम तथा ऐजोबैक्टर) मृदा में मुक्तावस्था में रहते हैं। यह भी वायुमडलीय नाइट्रोजन को स्थिर कर सकते हैं। इस प्रकार मृदा में नाइट्रोजन बढ़ जाती है।
कवक पादपों के साथ साहजीवी संबंध स्थापित करते हैं। ऐसे संबंधों से युक्त पादप कई अन्य लाभ जैसे मूलवातोढ़ रोगजनक के प्रति प्रतिरोधकता, लवणता तथा सूखे के प्रति सहनशीलता तथा कुलवृद्धि तथा विकास प्रदर्शित करते हैं। सायनोबैक्टीरिया स्वपोषित सूक्ष्मजीव हैं जो जलीय तथा स्थलीय वायुमण्डल में विस्तृत रूप से पाए जाते हैं। इनमें बहुत से वायुमंडलीय नाइट्रोजन को स्थिरीकृत कर सकते हैं।
पादप रोगों तथा पीड़कों के नियंत्रण के लिए जैव वैज्ञानिक विधि का प्रयोग ही जैव नियंत्रण है। आधुनिक समाज में यह समस्याएँ रसायनों, कीटनाशियों तथा पीड़कनाशियों के बढ़ते हुए प्रयोगों की सहायता से नियंत्रित की जाती हैं। ये रसायन मनुष्यों तथा जीव जंतुओं के लिए अत्यंत ही विषैले तथा हानिकारक हैं। ये पर्यावरण (मृदा, भूमिगत जल) को प्रदूषित करते हैं तथा फलों, साग-सब्जियों और फसलों पर भी हानिकारक प्रभाव डालते हैं। खरपतवार नाशियों का प्रयोग खरपतवार को हटाने में किया जाता है। यह भी हमारी मृदा को प्रदूषित करते हैं।
बैक्टीरिया वैसीलस थूरिजिऐंसिस (Bt) का प्रयोग बटरफ्लाई केटरपिलर नियंत्रण में किया जाता है। बैक्यूलावायरेसिस ऐसे रोगजनक हैं जो कीटा तथा संधिपादों पर हमला करते हैं। न्यूक्लिओपॉली हीड्रोसिस वायरस (NPU) प्रजाति विशप, संकरे स्पैक्ट्रम कीटनाशीय उपचारों के लिए उत्तम माने गए हैं।
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