किसी पारितंत्र में पाये जाने वाले आहार-शृंखलाओं के संजाल को आहार-जाल कहा जाता है । प्रत्येक स्तर के जीवधारी भोजन की उपलब्धता के अनुसार प्राय: कई प्रकार के भोजन का उपभोग करते हैं । उदाहरण के लिए चूहा विभिन्न प्रकारों के अनाज, फल जड़ एवं तने को भोजन के रूप में अपनाता है । चूहे को साँप खाता है और साँप को बाज या गरुड़ खाता है। साँप केवल चूहे का ही नहीं खाता बल्कि यह मेढ़कों और चिड़ियों के बच्चों को भी खाता है। इस प्रकार पारितंत्र में आहार-शृंखलाओं का जाल बन जाता है ।
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