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CHEMISTRY
कार्बन के दो गुणधर्म कौन से हैं जिनके का...

कार्बन के दो गुणधर्म कौन से हैं जिनके कारण हमारे चारों ओर कार्बन यौगिकों की विशाल संख्या दिखाई देती है ?

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When 5 children from class A join Class B, the number of children in both classes is he same. If 25 children from B, join A, then the number of children in A becomes double the number of children in B. The ratio of the number of children in A to those in B is. जब कक्षा A के 5 बच्चे कक्षा B में शामिल होते हैं, तो दोनों कक्षाओं के बच्चों की संख्या समान होती है। यदि B के 25 बच्चे A से जुड़ते हैं, तो B में बच्चों की संख्या दोगुनी हो जाती है। B के बच्चों की संख्या A में उन बच्चों की संख्या का अनुपात है।

यदि संख्या 739142658 के दूसरे , चौथे तथा सातवें अंक से दो अंकों की विषम पूर्ण वर्ग संख्या बनाना संभव हो जबकि प्रत्येक अंक को केवल एक बार लिया जाता है तब उस दो अंकों की पूर्ण वर्ग संख्या का दूसरा अंक इनमे से कौन सा होगा ?

Five phones, H, M, R, T and V, are kept one above the other (not necessarily in the same order). The number of phones above T is same as the number of phones below V. R is just above H. V is at the bottom. There are two phones between M and V. Which of the following phones are above R? पांच फोन - H, M, R, T और V एक दूसरे के ऊपर रखे गए हैं, लेकिन ज़रूरी नहीं कि इसी क्रम में | T के ऊपर रखे गए फोन की संख्या V के नीचे रखे गए फ़ोन की संख्या के बराबर है | R, H के ठीक ऊपर है | V तल पर है | M और V के बीच दो फ़ोन हैं | R के ऊपर इनमें से कौन से फ़ोन हैं ?

In a school, 5/12 of the number of students are girls and the rest are boys, 4/7 of the number of boys are below 14 years of age, and 2/5 of the number of girls are 14 years or above 14 years of age. If the number of students below 14 years of age is 1120, then the total number in the school is: एक स्कूल में, छात्रों की संख्या में से 5/12 लड़कियाँ हैं और बाकी लड़के हैं, जिनमें से 4/7 लड़कों की संख्या 14 वर्ष से कम है, और 2/5 की संख्या में लड़कियाँ 14 वर्ष या 14 वर्ष से अधिक हैं। यदि 14 वर्ष से कम आयु के छात्रों की संख्या 1120 है, तो स्कूल में कुल संख्या है:

गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित में सबसे उचित विकल्प को चुनिए। भारत की विभिन्नता विशाल है अर्थात भारत विभिन्नतापूर्ण देश है। यह स्पष्ट है, यह सबके सामने है और कोई भी व्यक्ति इसे देख सकता है। इसका सम्बन्ध बाहरी आकृति तथा कुछ निश्चित मानसिक प्रवृत्तियों एवं विशेष गुणों से है। बाह्य रूप से उत्तर-पश्चिम के पठान तथा सुदूर दक्षिण के तमिलों में बिल्कुल भी समानता नहीं है। उनकी नस्लें भी एक नहीं हैं। यद्यपि उनमें कुछ सामान्य गुण एक से हो सकते हैं, वे चहरे और शक्ल में, खानपान और कपड़ों में तथा स्वाभाविक रूप से भाषा में एक-दूसरे से बिल्कुल भिन्न हैं। उत्तर-पश्चिमी सीमा प्रान्त में मध्य एशिया का प्रभाव पहले से ही है, कश्मीर के समान ही उनके अनेक रीति-रिवाज हमें हिमालय के दूसरी ओर स्थित देशों की याद दिलाते हैं। पठानों के लोकप्रिय नाच रूस के कज्जाक लोगों के नाचों से विचित्र रूप से समान हैं। फिर भी इन अन्तरों के होने पर भी पठानों पर भारत की छाप स्पष्ट रूप से दिखाई पड़ती है यही बात तमिलों के विषय में भी है। अर्थात पठानों और तमिलों पर भारतीयता की छाप स्पष्ट रूप से दिखाई पड़ती है। इसमें आश्चर्य की कोई बात नहीं है कि ये सीमा प्रान्तीय प्रदेश और अफगानिस्तान हजारों वर्षों से भारत के साथ जुड़े हुए हैं। प्राचीन काल के तुर्क और दूसरी जातियाँ जो मध्य एशिया के अन्य भागों में रहा करती थीं, इस्लाम धर्म के प्रसार से पहले अधिकांश रूप से बौद्ध धर्म को मानने वाली थीं और उससे भी पहले महाकाव्य युग में हिन्दू धर्म को मानती थीं। सीमा प्रान्त का प्रदेश प्राचीन भारतीय संस्कृति का केन्द्र था और अब भी इस प्रदेश में स्मारकों तथा मठों के खंडहर भरे पड़े हैं और विशेष रूप से गहन विश्वविद्यालय तक्षशिला के खंडहर पाये जाते हैं जो अब से 2000 वर्ष पूर्व अपनी प्रसिद्धि की चरम सीमा पर था अर्थात बहुत प्रसिद्ध था। इस विश्वविद्यालय में भारत के प्रत्येक भाग से तथा रशिया के विभिन्न भागों से विद्यार्थी शिक्षा प्राप्त करने के लिए आया करते थे। धर्म के परिवर्तन ने अंतर तो डाला किन्तु मानसिक पृष्ठभूमि को पूर्ण रूप से नहीं बदल सका जिसका विकास उन क्षेत्रों के लोगों ने किया था। विभिन्नता पूर्ण देश कौन-सा है?

गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित में सबसे उचित विकल्प को चुनिए। भारत की विभिन्नता विशाल है अर्थात भारत विभिन्नतापूर्ण देश है। यह स्पष्ट है, यह सबके सामने है और कोई भी व्यक्ति इसे देख सकता है। इसका सम्बन्ध बाहरी आकृति तथा कुछ निश्चित मानसिक प्रवृत्तियों एवं विशेष गुणों से है। बाह्य रूप से उत्तर-पश्चिम के पठान तथा सुदूर दक्षिण के तमिलों में बिल्कुल भी समानता नहीं है। उनकी नस्लें भी एक नहीं हैं। यद्यपि उनमें कुछ सामान्य गुण एक से हो सकते हैं, वे चहरे और शक्ल में, खानपान और कपड़ों में तथा स्वाभाविक रूप से भाषा में एक-दूसरे से बिल्कुल भिन्न हैं। उत्तर-पश्चिमी सीमा प्रान्त में मध्य एशिया का प्रभाव पहले से ही है, कश्मीर के समान ही उनके अनेक रीति-रिवाज हमें हिमालय के दूसरी ओर स्थित देशों की याद दिलाते हैं। पठानों के लोकप्रिय नाच रूस के कज्जाक लोगों के नाचों से विचित्र रूप से समान हैं। फिर भी इन अन्तरों के होने पर भी पठानों पर भारत की छाप स्पष्ट रूप से दिखाई पड़ती है यही बात तमिलों के विषय में भी है। अर्थात पठानों और तमिलों पर भारतीयता की छाप स्पष्ट रूप से दिखाई पड़ती है। इसमें आश्चर्य की कोई बात नहीं है कि ये सीमा प्रान्तीय प्रदेश और अफगानिस्तान हजारों वर्षों से भारत के साथ जुड़े हुए हैं। प्राचीन काल के तुर्क और दूसरी जातियाँ जो मध्य एशिया के अन्य भागों में रहा करती थीं, इस्लाम धर्म के प्रसार से पहले अधिकांश रूप से बौद्ध धर्म को मानने वाली थीं और उससे भी पहले महाकाव्य युग में हिन्दू धर्म को मानती थीं। सीमा प्रान्त का प्रदेश प्राचीन भारतीय संस्कृति का केन्द्र था और अब भी इस प्रदेश में स्मारकों तथा मठों के खंडहर भरे पड़े हैं और विशेष रूप से गहन विश्वविद्यालय तक्षशिला के खंडहर पाये जाते हैं जो अब से 2000 वर्ष पूर्व अपनी प्रसिद्धि की चरम सीमा पर था अर्थात बहुत प्रसिद्ध था। इस विश्वविद्यालय में भारत के प्रत्येक भाग से तथा रशिया के विभिन्न भागों से विद्यार्थी शिक्षा प्राप्त करने के लिए आया करते थे। धर्म के परिवर्तन ने अंतर तो डाला किन्तु मानसिक पृष्ठभूमि को पूर्ण रूप से नहीं बदल सका जिसका विकास उन क्षेत्रों के लोगों ने किया था। प्रस्तुत गद्यांश में कहाँ के लोगों में समानता नहीं है?

गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित में सबसे उचित विकल्प को चुनिए। भारत की विभिन्नता विशाल है अर्थात भारत विभिन्नतापूर्ण देश है। यह स्पष्ट है, यह सबके सामने है और कोई भी व्यक्ति इसे देख सकता है। इसका सम्बन्ध बाहरी आकृति तथा कुछ निश्चित मानसिक प्रवृत्तियों एवं विशेष गुणों से है। बाह्य रूप से उत्तर-पश्चिम के पठान तथा सुदूर दक्षिण के तमिलों में बिल्कुल भी समानता नहीं है। उनकी नस्लें भी एक नहीं हैं। यद्यपि उनमें कुछ सामान्य गुण एक से हो सकते हैं, वे चहरे और शक्ल में, खानपान और कपड़ों में तथा स्वाभाविक रूप से भाषा में एक-दूसरे से बिल्कुल भिन्न हैं। उत्तर-पश्चिमी सीमा प्रान्त में मध्य एशिया का प्रभाव पहले से ही है, कश्मीर के समान ही उनके अनेक रीति-रिवाज हमें हिमालय के दूसरी ओर स्थित देशों की याद दिलाते हैं। पठानों के लोकप्रिय नाच रूस के कज्जाक लोगों के नाचों से विचित्र रूप से समान हैं। फिर भी इन अन्तरों के होने पर भी पठानों पर भारत की छाप स्पष्ट रूप से दिखाई पड़ती है यही बात तमिलों के विषय में भी है। अर्थात पठानों और तमिलों पर भारतीयता की छाप स्पष्ट रूप से दिखाई पड़ती है। इसमें आश्चर्य की कोई बात नहीं है कि ये सीमा प्रान्तीय प्रदेश और अफगानिस्तान हजारों वर्षों से भारत के साथ जुड़े हुए हैं। प्राचीन काल के तुर्क और दूसरी जातियाँ जो मध्य एशिया के अन्य भागों में रहा करती थीं, इस्लाम धर्म के प्रसार से पहले अधिकांश रूप से बौद्ध धर्म को मानने वाली थीं और उससे भी पहले महाकाव्य युग में हिन्दू धर्म को मानती थीं। सीमा प्रान्त का प्रदेश प्राचीन भारतीय संस्कृति का केन्द्र था और अब भी इस प्रदेश में स्मारकों तथा मठों के खंडहर भरे पड़े हैं और विशेष रूप से गहन विश्वविद्यालय तक्षशिला के खंडहर पाये जाते हैं जो अब से 2000 वर्ष पूर्व अपनी प्रसिद्धि की चरम सीमा पर था अर्थात बहुत प्रसिद्ध था। इस विश्वविद्यालय में भारत के प्रत्येक भाग से तथा रशिया के विभिन्न भागों से विद्यार्थी शिक्षा प्राप्त करने के लिए आया करते थे। धर्म के परिवर्तन ने अंतर तो डाला किन्तु मानसिक पृष्ठभूमि को पूर्ण रूप से नहीं बदल सका जिसका विकास उन क्षेत्रों के लोगों ने किया था। पठानों का लोकप्रिय नाच कहाँ के लोगों के नाच के समान है?