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Class 10
PHYSICS
दिष्ट धारा जनित्र का क्या सिद्धान्त है? ...

दिष्ट धारा जनित्र का क्या सिद्धान्त है? इसकी बनावट प्रत्यावर्ती धारा जनित्र से किस प्रकार भिन्न है? विभक्त वलय का क्या महत्व है? दिष्टधारा जनित्र का नामांकित चित्र बनाइए।

लिखित उत्तर

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सिद्धान्त-दिष्टधारा जनित्र विद्युत चुम्बकीय प्रेरण के सिद्धान्त पर कार्य करता है।
प्रत्यावर्ती धारा जनित्र से बनावट में भिन्नता -
इसकी बनावट का अधिकांश भाग प्रत्यावर्तीधारा जनित्र के समान है। अन्तर केवल यह है कि दिष्टधारा जनित्र में सीवलयों के स्थान पर विभक्त वलय वाले दिक परिवर्तक लगाये जाते हैं, जिससे बाह्य परिपथ में प्राप्त होने वाली धारा का मान एवं दिशा अपरिवर्तित रहते हैं और ऐसी धारा दिष्ट धारा (dc) होती है।
विभक्त वलय का महत्त्व-जब आर्मेचर कुण्डली का आधा चक्कर पूरा हो जाता है तो विभक्त वलय के भागों `C_1` व `C_2` क ब्रुशों `B_1` एवं `B_2` से सम्पर्क विनिमय हो जाता है और ये भाग विपरीत ब्रुशों से जुड़ जाने से बाह्य परिपथ में धारा की दिशा एक ही बनी रहती है।
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