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Class 10
PHYSICS
(अ) "हमें संसाधनों के प्रबन्धन की आवश्यक...

(अ) "हमें संसाधनों के प्रबन्धन की आवश्यकता है।" समझाइए।
(ब) चिपको आन्दोलन के बारे में आप क्याजानते हैं?

लिखित उत्तर

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(अ) हमें संसाधनों के प्रबन्धन की आवश्यकता है, क्योंकि रोटी, कपड़ा, मकान, फर्नीचर, पुस्तकें, औजार, हथियार, वाहन से लेकर सड़कें और बड़े-बड़े भवन आदि सभी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से पृथ्वी पर उपलब्ध प्राकतिक संसाधनों से ही प्राप्त होते हैं। हमें केवल एक ही वस्तु पृथ्वी के बाहर से प्राप्त होती है वह है ऊर्जा, जो हमें सूर्य से प्राप्त होती है, परन्तु इस ऊर्जा को प्राप्त करने में भी पृथ्वी पर उपस्थित जैविक, भौतिक और रासायनिक प्रक्रमों का अपरोक्ष रूप से योगदान होता है, जो प्राकृतिक संसाधनों से ही जुड़े होते हैं।
अतः हमें अपने संसाधनों का सावधानीपूर्वक एवं पूर्ण विवेक से निम्न मुख्य बिन्दुओं के आधार पर प्रबन्धन करने की अत्यधिक आवश्यकता है
(i) ये संसाधन विश्व की आवश्यकता को देखते हुए काफी कम और सीमित हैं।
(ii) जनसंख्या में तीव्र गति से वृद्धि होने के कारण संसाधनों की माँग में भी लगातार वृद्धि हो रही है।
(iii)इन संसाधनों का वितरण समाज के सभी वर्गों में समान रूप से हो रहा है।
(iv) इन संसाधनों की अगली कई पीढ़ियों तक उपलब्धता बनी रहे इस पर सदैव ध्यान केन्द्रित करना पड़ेगा। (दीर्घकालिक दृष्टिकोण)
(v) इन संसाधनों के दोहन से पर्यावरण को किसी प्रकार का नुकसान न पहुँचे (यथा अपशिष्टों का सुरक्षित निपटान) पर भी ध्यान देना होगा।
(ब)चिपको आन्दोलन
स्थानीय लोगों को वनों से अलग करने की सरकारी नीति के विरोध का परिणाम चिपको आन्दोलन जैसी घटना के रूप में घटित हुआ। यह आन्दोलन हिमालय की ऊँची पर्वत श्रृंखला में गढ़वाल के रेनी नामक गाँव में 1970 में प्रारम्भिक दशक में घटित एक क्रान्तिकारी घटना है। एक ठेकेदार को गाँव के समीप के वृक्ष काटने का अधिकार दे दिया गया था। वृक्षों को काटने से लेकर स्थानीय लोगों और उस ठेकेदार के बीच विवाद उत्पन्न हो गया था। एक निश्चित दिन ठेकेदार ने जब देखा कि गाँव के पुरुष निवासी गाँव में नहीं हैं, तब उसने अपने आदमियों को वृक्षों को काटने के लिए भेजा।
उस गाँव की निर्भीक महिलाओं को जब इस बात का पता चला तो वे बिना किसी डर के वहाँ न केवल पहुँची, बल्कि वृक्षों को अपनी बाँहों में भरकर उनसे चिपक गई और ठेकेदार के आदमियों को वृक्ष काटने से रोक दिया। अतः ठेकेदार को अपना काम बन्द करना पड़ा। महिलाओं के वृक्ष काटने के विरोध में वक्षों से चिपक जाने के कारण इसको चिपको आन्दोलन का नाम दिया गया।
चिपको आन्दोलन बहुत तेजी से जन समुदाय में फैल गया एवं जन संचार (मुख्यतः रेडियो) ने भी इसमें योगदान दिया तथा सरकार को यह सोचने को विवश कर दिया कि उसे वन संसाधनों के समुचित उपयोग के लिए प्राथमिक तय करने के लिए पुनर्विचार करना होगा।
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