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Class 10
BIOLOGY
मूत्र निर्माण की क्रिया को समझाइए।...

मूत्र निर्माण की क्रिया को समझाइए।

लिखित उत्तर

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मूत्र निर्माण की प्रक्रिया -
मूत्र का निर्माण तीन चरणों में संपादित होता है। गुच्छीय निस्यंदन, पुनः अवशोषण तथा स्रवण। ये सभी कार्य वृक्क के विभिन्न हिस्सों में होते हैं वृक्क में लगातार रक्त प्रवाहित होता रहता है। अपशिष्ट से युक्त गंदा रक्त ग्लोमेरूलस में प्रवेश करता है और यहां रक्त साफ होता है। निस्यंदन (Filtration) के दौरान रक्त में मौजूद ग्लूकोज, एमीनो एसिड, लवण, यूरिया और पानी आदि बौमन्स कैप्सूल से गुजरता है और फिर नेफ्रॉन की छोटी नली के आस-पास वाली रक्त केशिकाओं के माध्यम से रक्त में पुनः अवशोषित हो जाता है। नेफ्रॉन की छोटी नली में रह गया तरल मूत्र है, नेफ्रॉन इस मूत्र को वृक्क की संग्रहण नलिका (Collecting duct of the kidney) में ले जाता है, जहां से यह मूत्र वाहिनी में जाता है और यहां से ही मूत्र मूत्राशय में जाता है। कुछ समय के बाद मूत्र मूत्रमार्ग से शरीर के बाहर निकाल दिया जाता है। जैसे-जैसे मूत्र इकट्ठा होता है वैसे-वैसे मूत्राशय बड़ा होता रहता है। पर्याप्त मूत्र जमा होने पर केंद्रीय तंत्रिका तंत्र द्वारा ऐच्छिक संदेश मूत्राशय को प्राप्त होता है। ये संदेश मूत्राशय की पेशियों का संकुचन करता है तथा मूत्राशयी अवरोधनी में शिथिलन पैदा करता है। इससे मूत्र का उत्सर्जन होता है।
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