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Class 10
BIOLOGY
ऊपरी श्वसन तंत्र के प्रमुख भागों का नाम ...

ऊपरी श्वसन तंत्र के प्रमुख भागों का नाम लिखिए।

लिखित उत्तर

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(ii) निचला श्वसन तंत्र (Lower Respiratory System)
निचले श्वसन तंत्र में मुख्यतः श्वासनली, श्वसनी/बोकाई व श्वसनिका/ ब्रोन्किओल कूपिका तथा फेफड़े कार्य करते हैं।
(A) श्वासनली (Trachea)-यह नली स्वरंचना (Larynx) के नीचे से शुरू होकर फेफड़ों के सिरे तक पहुँचती है, जहाँ पर यह दो शाखाओं, दायी और बायीं श्वसनी या ब्रोकई (bronchi) में बँट जाती है और हर फेफड़े में प्रवेश कर जाती है। यह लगभग 12 सेमी लम्बी नली होती है।
(B) श्वसनी (ब्रोंकाई) व श्वसनिका (ब्रोन्किओल) (Bronchi and bronchiole)- श्वासनली अंत में दाँयीं और बाँयीं ओर की श्वसनी में विभक्त होती है। प्राथमिक श्वसनी फेफड़ों में जाकर छोटी शाखाओं जिन्हें द्वितीयक श्वसनी कहते हैं में बंट जाती हैं। प्रत्येक खण्ड में द्वितीयक श्वसनी तृतीयक श्वसनियों में विभक्त होती है। प्रत्येक तृतीयक श्वसनी छोटी-छोटी श्वसनिका (ब्रोन्किओल) में बंट जाती है। ये ब्रोन्क्रिओल फेफड़ों में फैले रहते हैं। हर ब्रोन्किओल आगे चल के छोटी सीमांत (terminal) ब्रोन्किओल में विभक्त होती है। श्वसनी तथा ब्रोन्किओल मिल कर एक वृक्षनुमा संरचना बनाते हैं जो बहुत सी शाखाओं में विभक्त होती है। इन शाखाओं के अंतिम छोर पर कूपिकाएँ पाए जाते हैं। गैसों का विनिमय इन कूपिकाओं के माध्यम से होता है।
(C) फेफड़े (Lungs)- फेफड़े श्वसन संस्थान के मुख्य स्पन्जी अंग होते हैं। ये संख्या में दो होते हैं। एक दायां और एक बायां । यह ज्यादातर वक्षीय गुहा के सामने रहते हैं। फेफड़े शरीर की मध्य रेखा के दोनों पावों में स्थित होते हैं तथा मध्यस्थानिका द्वारा एक-दूसरे से अलग रहते हैं।
फेफड़े का अग्र किनारा हृदय के अग्र भाग को ढक्कर रखता है तथा पश्च किनारा वर्टिब्रल कॉलम (कशेरूका दण्ड) के सम्पर्क में रहता है। बायें फेफड़े में दो खण्ड होते हैं जो तिरछी दरार द्वारा अलग रहते हैं। दायें फेफड़े में तीन खण्ड होते हैं। इसका निचला खण्ड तिरछी दरार द्वारा तथा बचा हुआ बाकी भार आड़ी दरार द्वारा ऊपरी एवं मध्य खण्ड में बंटा रहता है जिन्हें पल्मोनरी खण्ड कहते हैं।
इन खण्डकों में श्वसन नलिकायें और असंख्य वायुकोष भरे रहते हैं। वायुकोष फेफड़ों के श्वसनीय भाग होते हैं। सांस के साथ ली गई वायु श्वसनीय मार्गों से होती हुई वायुकोषों में पहुँचती है, जहाँ इनकी एवं केशिकाओं की भित्तियों के बीच गैसों का आदान-प्रदान (Exchange) होता है।
(iii) ऊपरी श्वसन तंत्र के प्रमुख भागों में नासिका, मुख, ग्रसनी एवं स्वर यंत्र सम्मिलित किये जाते हैं।
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