क्या यह सम्थव है कि किसी निकाय को बिना ऊष्मा दिये अथवा उससे बिना ऊष्मा लिये उसका ताप परिवर्तित हो जाये?
क्या यह सम्थव है कि किसी निकाय को बिना ऊष्मा दिये अथवा उससे बिना ऊष्मा लिये उसका ताप परिवर्तित हो जाये?
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An aeroplane flying horizontally at a height of 3 Km. above the ground is observed at a certain point on earth to subtend an angle of 60^@ . After 15 sec flight, its angle of elevation is changed to 30^@ . The speed of the aeroplane (taking sqrt3 = 1.732) is- कोई वायुयान पृथ्वी की सतह से 3 कि.मी. ऊपर क्षेतिज उड़ रहा है। पृथ्वी से किसी बिन्दु से यह देखने में आता है कि वह 60^@ के कोण पर कक्षांतरित होता है। 15 सेकण्ड बाद उसका उन्नयन कोण 30^@ परिवर्तित हो जाता हैं वायुयान की चाल बताइए। ( sqrt3 =1.732)
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उसके नीचे दिये गये बहुविकल्पी प्रश्नों में सही विकल्प का चयन करों। शिक्षा साध्य नहीं है, अपितु साध्य तक पहुँचने का एक साधन है। हम बच्चों को केवल शिक्षित बनाने के उद्देश्य से ही शिक्षा नहीं देते बल्कि हमारा उद्देश्य उन्हें जीवन के लिए सक्षम बनाना है। ज्यों ही हम इस तथ्य को जान लेते हैं, हम शिक्षा के वास्तविक लक्ष्य से परिचित हो जाते हैं। बहुत से आधुनिक देशों में यह सोचना फैशन हो गया है कि अमीर-गरीब, चतुर-मूर्ख सबको विद्यालयों में निःशुल्क शिक्षा देकर कोई भी समाज अपनी सब समस्याएँ सुलझा सकता हैऔर परिपूर्ण राष्ट्र का निर्माण कर सकता है परंतु यह काफी नहीं है। ऐसे देशों में हमें अनेक डिग्रीधारी नवयुवक बेरोजगार दिखाई पड़ते हैं, क्योंकि वे हाथ से काम करने को हेय दृष्टि से देखने लगते हैं। इस परिप्रेक्ष्य में हमें अपनी शिक्षा-व्यवस्था पर पुनर्विचार करने की बड़ी भारी आवश्यकता है। इतना काफी नहीं है कि शिक्षा की तो व्यवस्था पहले मिले, उसे चुन लिया जाए अथवा अपनी पुरानी शिक्षा व्यवस्था को चालू रखा जाय, बिना इस बात की परीक्षा किये और देखे कि यह वास्तव में उपयुक्त है अथवा नहीं। निःशुल्क शिक्षा से क्या हानि है
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उसके नीचे दिये गये बहुविकल्पी प्रश्नों में सही विकल्प का चयन करों। शिक्षा साध्य नहीं है, अपितु साध्य तक पहुँचने का एक साधन है। हम बच्चों को केवल शिक्षित बनाने के उद्देश्य से ही शिक्षा नहीं देते बल्कि हमारा उद्देश्य उन्हें जीवन के लिए सक्षम बनाना है। ज्यों ही हम इस तथ्य को जान लेते हैं, हम शिक्षा के वास्तविक लक्ष्य से परिचित हो जाते हैं। बहुत से आधुनिक देशों में यह सोचना फैशन हो गया है कि अमीर-गरीब, चतुर-मूर्ख सबको विद्यालयों में निःशुल्क शिक्षा देकर कोई भी समाज अपनी सब समस्याएँ सुलझा सकता हैऔर परिपूर्ण राष्ट्र का निर्माण कर सकता है परंतु यह काफी नहीं है। ऐसे देशों में हमें अनेक डिग्रीधारी नवयुवक बेरोजगार दिखाई पड़ते हैं, क्योंकि वे हाथ से काम करने को हेय दृष्टि से देखने लगते हैं। इस परिप्रेक्ष्य में हमें अपनी शिक्षा-व्यवस्था पर पुनर्विचार करने की बड़ी भारी आवश्यकता है। इतना काफी नहीं है कि शिक्षा की तो व्यवस्था पहले मिले, उसे चुन लिया जाए अथवा अपनी पुरानी शिक्षा व्यवस्था को चालू रखा जाय, बिना इस बात की परीक्षा किये और देखे कि यह वास्तव में उपयुक्त है अथवा नहीं। हमें अपनी शिक्षा-व्यवस्था पर क्या करना चाहिए?
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उसके नीचे दिये गये बहुविकल्पी प्रश्नों में सही विकल्प का चयन करों। शिक्षा साध्य नहीं है, अपितु साध्य तक पहुँचने का एक साधन है। हम बच्चों को केवल शिक्षित बनाने के उद्देश्य से ही शिक्षा नहीं देते बल्कि हमारा उद्देश्य उन्हें जीवन के लिए सक्षम बनाना है। ज्यों ही हम इस तथ्य को जान लेते हैं, हम शिक्षा के वास्तविक लक्ष्य से परिचित हो जाते हैं। बहुत से आधुनिक देशों में यह सोचना फैशन हो गया है कि अमीर-गरीब, चतुर-मूर्ख सबको विद्यालयों में निःशुल्क शिक्षा देकर कोई भी समाज अपनी सब समस्याएँ सुलझा सकता हैऔर परिपूर्ण राष्ट्र का निर्माण कर सकता है परंतु यह काफी नहीं है। ऐसे देशों में हमें अनेक डिग्रीधारी नवयुवक बेरोजगार दिखाई पड़ते हैं, क्योंकि वे हाथ से काम करने को हेय दृष्टि से देखने लगते हैं। इस परिप्रेक्ष्य में हमें अपनी शिक्षा-व्यवस्था पर पुनर्विचार करने की बड़ी भारी आवश्यकता है। इतना काफी नहीं है कि शिक्षा की तो व्यवस्था पहले मिले, उसे चुन लिया जाए अथवा अपनी पुरानी शिक्षा व्यवस्था को चालू रखा जाय, बिना इस बात की परीक्षा किये और देखे कि यह वास्तव में उपयुक्त है अथवा नहीं। बच्चों को किस उद्देश्य से शिक्षा दी जाती है?
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उसके नीचे दिये गये बहुविकल्पी प्रश्नों में सही विकल्प का चयन करों। शिक्षा साध्य नहीं है, अपितु साध्य तक पहुँचने का एक साधन है। हम बच्चों को केवल शिक्षित बनाने के उद्देश्य से ही शिक्षा नहीं देते बल्कि हमारा उद्देश्य उन्हें जीवन के लिए सक्षम बनाना है। ज्यों ही हम इस तथ्य को जान लेते हैं, हम शिक्षा के वास्तविक लक्ष्य से परिचित हो जाते हैं। बहुत से आधुनिक देशों में यह सोचना फैशन हो गया है कि अमीर-गरीब, चतुर-मूर्ख सबको विद्यालयों में निःशुल्क शिक्षा देकर कोई भी समाज अपनी सब समस्याएँ सुलझा सकता हैऔर परिपूर्ण राष्ट्र का निर्माण कर सकता है परंतु यह काफी नहीं है। ऐसे देशों में हमें अनेक डिग्रीधारी नवयुवक बेरोजगार दिखाई पड़ते हैं, क्योंकि वे हाथ से काम करने को हेय दृष्टि से देखने लगते हैं। इस परिप्रेक्ष्य में हमें अपनी शिक्षा-व्यवस्था पर पुनर्विचार करने की बड़ी भारी आवश्यकता है। इतना काफी नहीं है कि शिक्षा की तो व्यवस्था पहले मिले, उसे चुन लिया जाए अथवा अपनी पुरानी शिक्षा व्यवस्था को चालू रखा जाय, बिना इस बात की परीक्षा किये और देखे कि यह वास्तव में उपयुक्त है अथवा नहीं। शिक्षा का उद्देश्य है
छात्र की सहायता करना अत्यावश्यक है कि उसका मन वैज्ञानिक, स्पष्ट, निश्चित और सूक्ष्मता से सोचने वाला तथा उसके साथ ही साथ मन की गहराईयों को अनावृत करने वाला हो। क्या छात्र को इस प्रकार शिक्षित करना संभव है कि वह सभी लेबिलों के परे जो कर सके तथा उस वस्त का पता लगा सके, उसका अनुभव कर सके, जिसको मन नहीं माप सकता, जो किसी पुस्तक में नहीं लिखा है। यदि इस प्रकार के एक विद्यालय में ऐसी शिक्षा संभव हो सके, तो वह अनूठी होगी। आप सभी को यह देखना चाहिए कि इस प्रकार के विद्यालय का निर्माण कितना मूल्यवान होगा। केवल नृत्य, संगीत, गणित और दूसरे पाठों पर ध्यान देना समस्त जीवन नहीं है। शांत बैठना तथा अपने को देखना, सूक्ष्म दृष्टि प्राप्त करना, अवलोकन करना भी जीवन का अंग है। विचार कैसे किया जाए. किस पर विचार किया जाए, तथा आप विचार क्यों कर रहे हैं, इसको देखना भी आवश्यक है। लेखक की दृष्टि में सर्वाधिक महत्वपूर्ण क्या है?
छात्र की सहायता करना अत्यावश्यक है कि उसका मन वैज्ञानिक, स्पष्ट, निश्चित और सूक्ष्मता से सोचने वाला तथा उसके साथ ही साथ मन की गहराईयों को अनावृत करने वाला हो। क्या छात्र को इस प्रकार शिक्षित करना संभव है कि वह सभी लेबिलों के परे जो कर सके तथा उस वस्त का पता लगा सके, उसका अनुभव कर सके, जिसको मन नहीं माप सकता, जो किसी पुस्तक में नहीं लिखा है। यदि इस प्रकार के एक विद्यालय में ऐसी शिक्षा संभव हो सके, तो वह अनूठी होगी। आप सभी को यह देखना चाहिए कि इस प्रकार के विद्यालय का निर्माण कितना मूल्यवान होगा। केवल नृत्य, संगीत, गणित और दूसरे पाठों पर ध्यान देना समस्त जीवन नहीं है। शांत बैठना तथा अपने को देखना, सूक्ष्म दृष्टि प्राप्त करना, अवलोकन करना भी जीवन का अंग है। विचार कैसे किया जाए. किस पर विचार किया जाए, तथा आप विचार क्यों कर रहे हैं, इसको देखना भी आवश्यक है। 'विद्यालय' का संधि-विच्छेद है
छात्र की सहायता करना अत्यावश्यक है कि उसका मन वैज्ञानिक, स्पष्ट, निश्चित और सूक्ष्मता से सोचने वाला तथा उसके साथ ही साथ मन की गहराईयों को अनावृत करने वाला हो। क्या छात्र को इस प्रकार शिक्षित करना संभव है कि वह सभी लेबिलों के परे जो कर सके तथा उस वस्त का पता लगा सके, उसका अनुभव कर सके, जिसको मन नहीं माप सकता, जो किसी पुस्तक में नहीं लिखा है। यदि इस प्रकार के एक विद्यालय में ऐसी शिक्षा संभव हो सके, तो वह अनूठी होगी। आप सभी को यह देखना चाहिए कि इस प्रकार के विद्यालय का निर्माण कितना मूल्यवान होगा। केवल नृत्य, संगीत, गणित और दूसरे पाठों पर ध्यान देना समस्त जीवन नहीं है। शांत बैठना तथा अपने को देखना, सूक्ष्म दृष्टि प्राप्त करना, अवलोकन करना भी जीवन का अंग है। विचार कैसे किया जाए. किस पर विचार किया जाए, तथा आप विचार क्यों कर रहे हैं, इसको देखना भी आवश्यक है। लेखक ने अनूठी शिक्षा में ____ बल दिया है।
छात्र की सहायता करना अत्यावश्यक है कि उसका मन वैज्ञानिक, स्पष्ट, निश्चित और सूक्ष्मता से सोचने वाला तथा उसके साथ ही साथ मन की गहराईयों को अनावृत करने वाला हो। क्या छात्र को इस प्रकार शिक्षित करना संभव है कि वह सभी लेबिलों के परे जो कर सके तथा उस वस्त का पता लगा सके, उसका अनुभव कर सके, जिसको मन नहीं माप सकता, जो किसी पुस्तक में नहीं लिखा है। यदि इस प्रकार के एक विद्यालय में ऐसी शिक्षा संभव हो सके, तो वह अनूठी होगी। आप सभी को यह देखना चाहिए कि इस प्रकार के विद्यालय का निर्माण कितना मूल्यवान होगा। केवल नृत्य, संगीत, गणित और दूसरे पाठों पर ध्यान देना समस्त जीवन नहीं है। शांत बैठना तथा अपने को देखना, सूक्ष्म दृष्टि प्राप्त करना, अवलोकन करना भी जीवन का अंग है। विचार कैसे किया जाए. किस पर विचार किया जाए, तथा आप विचार क्यों कर रहे हैं, इसको देखना भी आवश्यक है। जीवन का सबसे महत्वपूर्ण अंग है
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