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Class 11
BIOLOGY
" (a) ग्रीन हाउस जैसे,"...

" (a) ग्रीन हाउस जैसे,"

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Revision|कार्बन चक्र |ग्रीन हाउस प्रभाव एवं वैश्विक ऊष्मीकरण |कार्बन डाइऑक्साइड का प्रतिशत बढ़ने के कारण दुष्प्रभाव |ऑक्सीजन चक्र |ओजोन परत एवं उसका क्षय |OMR

उषा सुनहले तीर बरसती जयलक्ष्मी-सी उदित हुई, उधर पराजित काल रात्रि भी जल में अंतर्निहित हुई। वह विवर्ण मुख त्रस्त प्रकृति का आज लगा हँसने फिर से, वर्षा बीती, हुआ सृष्टि में शरद-विकास नये सिर से। नव कोमल आलोक बिखरता हिम-संसृति पर भर अनुराग, सित सरोज पर क्रीड़ा करता जैसे मधुमय पिंग पराग। धीरे-धीरे हिम-आच्छादन हटने लगा धरातल से, जगी वनस्पतियाँ अलसाई मुख धोती शीतल जल से। नेत्र निमीलन करती मानो प्रकृति प्रबुद्ध लगी होने, जलधि लहरियों की अंगड़ाई बार-बार जाती सोने। सिंधुसेज पर धरा वधू अब तनिक संकुचित बैठी-सी, प्रलय निशा की हलचल स्मृति में मान किये सी ऐंठी-सी। देखा मनु ने वह अविजित विजन का नव एकांत जैसे कोलाहल सोया हो हिम-शीतल-जड़ता-सा श्रांत। इंद्रनीलमणि महा चषक सोम-रहित उलटा लटका, आज पवन मृदु साँस ले रहा जैसे बीत गया खटका। 'आज पवन मृदु साँस ले रहा जैसे बीत गया खटका' से कवि का क्या आशय है?

प्रस्तावना |पर्यावरण प्रदूषण एवं पर्यावरण प्रदूषक|प्रदूषक के प्रकार|प्रदूषण के प्रकार|स्ट्रेटोंस्फीरिक प्रदूषण |ग्रीन हाऊस प्रभाव |OMR|सारांश

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