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सिद्ध करें कि दो क्रमागत विषय संख्याओं ...

सिद्ध करें कि दो क्रमागत विषय संख्याओं के वर्गों के योगफल में 6 जोड़ने पर प्राप्त नई संख्या सदा 8 से विभाज्य होगी । उपपत्ति के विभिन्न चरण सकारण लिखें ।

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संख्या पद्धति|दो परिमेय संख्याओं के बीच में n परिमेय संख्याएँ ज्ञात करना|संख्या रेखा पर अपरिमेय संख्या का निरूपण|वास्तविक संख्याओं के दशमलव प्रसार|अभ्यास कार्य|सुप्रसिद्ध अपरिमेय संख्याएँ|सारांश

संख्या पद्धति|दो परिमेय संख्याओं के बीच में n परिमेय संख्याएँ ज्ञात करना|संख्या रेखा पर अपरिमेय संख्या का निरूपण|वास्तविक संख्याओं के दशमलव प्रसार|सुप्रसिद्ध अपरिमेय संख्याएँ|अभ्यास कार्य|NCERT प्रश्नावली 1.3|सारांश

The average of n number is 36. If each of 75% of the numbers is increased by 6 and each of the remaining numbers is decreased by 9, then the new average of the numbers is: n संख्याओं का औसत 36 है | यदि इन संख्याओं के 75% में से प्रत्येक को 6 से बढ़ा दिया जाए और प्रत्येक शेष संख्या को 9 से कम कर दिया जाए, तो इन संख्याओं का नया औसत क्या होगा ?

Three numbers are such that if the average of any two of them is added to the third number, the sums obtained are 164, 158 and 132 respectively. What is the average of the original three numbers? तीन संख्याएँ इस प्रकार हैं कि यदि इनमें से किसी भी दो संख्या के औसत को तीसरी संख्या में जोड़ा जाए, तो योगफल क्रमशः 164, 158 और 132 प्राप्त होते हैं | इन तीन आरंभिक संख्याओं का औसत ज्ञात करें |

There are three positive numbers. If the average of any two of them is added to the third number, the sums obtained are 68, 74 and 98. What is the average of the smallest and the greatest of the given numbers? तीन धनात्मक संख्याएँ हैं | यदि इनमें से किसी भी दो संख्या का औसत तीसरी संख्या में जोड़ा जाए, तो योगफल के रूप में क्रमशः 68, 74 और 98 प्राप्त होता है | इनमें से सबसे छोटी और सबसे बड़ी संख्या का औसत ज्ञात करें |

निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के सही विकल्प चुनिये हम में से बहुत से लोगों के दिमाग में जो तरह-तरह के मुर्खतापूर्वक विचार आते हैं उन्हें दूर रखने के लिए किसी अत्यन्त कुशाग्र बुद्धि की आवश्यकता नहीं है। यदि हम कुछ साधारण से नियमों का पालन करें तो सभी गलतियों से तो नहीं, लेकिन मूर्खतापूर्वक गलतियाँ करने से जरूर बच सकते हैं। यदि कोई मामला निरीक्षण करने से सुलझ सकता है तो हमें स्वयं निरीक्षण करना चाहिए। अरस्तु का यह सोचना था कि पुरूषों की तुलना में महिलाओं के दाँतों की संख्या कम होती है। इस गलती से बचने का एक साधारण-सा तरीका था कि वे अपनी पत्नी के दाँत गिन लेते। यह सोचना कि हम जानते हैं, जबकि वास्तव में हम नहीं जानते, एक बुरी आदत है जो हम में से बहुतों को होती है। उपरोक्त गद्यांश का भावार्थ है कि कुछ साधारण से नियमों का पालन करने से

निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के सही विकल्प चुनिये हम में से बहुत से लोगों के दिमाग में जो तरह-तरह के मुर्खतापूर्वक विचार आते हैं उन्हें दूर रखने के लिए किसी अत्यन्त कुशाग्र बुद्धि की आवश्यकता नहीं है। यदि हम कुछ साधारण से नियमों का पालन करें तो सभी गलतियों से तो नहीं, लेकिन मूर्खतापूर्वक गलतियाँ करने से जरूर बच सकते हैं। यदि कोई मामला निरीक्षण करने से सुलझ सकता है तो हमें स्वयं निरीक्षण करना चाहिए। अरस्तु का यह सोचना था कि पुरूषों की तुलना में महिलाओं के दाँतों की संख्या कम होती है। इस गलती से बचने का एक साधारण-सा तरीका था कि वे अपनी पत्नी के दाँत गिन लेते। यह सोचना कि हम जानते हैं, जबकि वास्तव में हम नहीं जानते, एक बुरी आदत है जो हम में से बहुतों को होती है। लेखक कहना चाहता है कि

निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के सही विकल्प चुनिये हम में से बहुत से लोगों के दिमाग में जो तरह-तरह के मुर्खतापूर्वक विचार आते हैं उन्हें दूर रखने के लिए किसी अत्यन्त कुशाग्र बुद्धि की आवश्यकता नहीं है। यदि हम कुछ साधारण से नियमों का पालन करें तो सभी गलतियों से तो नहीं, लेकिन मूर्खतापूर्वक गलतियाँ करने से जरूर बच सकते हैं। यदि कोई मामला निरीक्षण करने से सुलझ सकता है तो हमें स्वयं निरीक्षण करना चाहिए। अरस्तु का यह सोचना था कि पुरूषों की तुलना में महिलाओं के दाँतों की संख्या कम होती है। इस गलती से बचने का एक साधारण-सा तरीका था कि वे अपनी पत्नी के दाँत गिन लेते। यह सोचना कि हम जानते हैं, जबकि वास्तव में हम नहीं जानते, एक बुरी आदत है जो हम में से बहुतों को होती है। लेखक का मानना है कि यह एक गम्भीर गलती है

निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के सही विकल्प चुनिये हम में से बहुत से लोगों के दिमाग में जो तरह-तरह के मुर्खतापूर्वक विचार आते हैं उन्हें दूर रखने के लिए किसी अत्यन्त कुशाग्र बुद्धि की आवश्यकता नहीं है। यदि हम कुछ साधारण से नियमों का पालन करें तो सभी गलतियों से तो नहीं, लेकिन मूर्खतापूर्वक गलतियाँ करने से जरूर बच सकते हैं। यदि कोई मामला निरीक्षण करने से सुलझ सकता है तो हमें स्वयं निरीक्षण करना चाहिए। अरस्तु का यह सोचना था कि पुरूषों की तुलना में महिलाओं के दाँतों की संख्या कम होती है। इस गलती से बचने का एक साधारण-सा तरीका था कि वे अपनी पत्नी के दाँत गिन लेते। यह सोचना कि हम जानते हैं, जबकि वास्तव में हम नहीं जानते, एक बुरी आदत है जो हम में से बहुतों को होती है। निम्नलिखित में से कौन-सा वाक्य सही है?

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