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Class 12
PHYSICS
किसी उत्तल गोलीय पृष्ठ पर प्रकाश के अपवर...

किसी उत्तल गोलीय पृष्ठ पर प्रकाश के अपवर्तन के लिए सूत्र `(n)/(v)-(1)/(u)=(n-1)/(R)` स्थापित कीजिए | प्रतिको के सामान्य अर्थ है |

लिखित उत्तर

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उत्तल गोलीय पृष्ठ पर अपवर्तन का सूत्र-माना QPQ. वक्रता त्रिज्या R का एक उत्तल गोलीय पृष्ठ है, जो निरपेक्ष अपवर्तनांक `n_(1)` के विरल माध्यम को निरपेक्ष अपवर्तनांक `n_(2)` के सघन माध्यम से पृथक करता है | इस पृष्ठ का ध्रुव P तथा वक्रता केंद्र C है | माना इसकी मुख्य अक्ष PC पर एक बिंदु-वस्तु O स्थित है, जिससे चलने वाली प्रकाश की एक किरण OM उत्तल पृष्ठ के बिंदु M पर आपतित होती है, जहाँ से वह दुसरे माध्यम में प्रवेश करती है | अभिलम्ब CMN की ओर झुक जाती है | दूसरी आपतित किरण OP गोइय पृष्ठ पर लम्बवत गिरती है और दुसरे माध्यम में सीधी चली जाती है | ये दोनों अपवर्तित किरणे पीछे की ओर बढाए जाने पर बिंदु I पर मिलती है , अत: बिंदु I, बिंदु-वस्तु O का आभासी प्रतिबिम्ब है |
मना आपतन कोण OMC=i, अपवर्तन कोण AMC=r, ध्रुव P से वस्तु की दुरी PO=-u, प्रतिबिम्ब की दुरी PI=-v तथा पृष्ठ की वक्रता त्रिज्या PC=+R है | माना OM, IM तथा CM मुख्य अक्ष से क्रमश: `alpha,beta` तथा `beta` कोण बनाती है तथा M से मुख्य अक्ष पर खींचे गए अभिलम्ब ML की ऊँचाई h है |
`DeltaOMC` में, `i=alpha+gamma` . . (1)
तथा `DeltaIMC` में, `r=beta+gamma` . . (2)
स्नेल के नियमनुसार, `(sini)/(sinr)=(n_(2))/(n_(1))`
यदि उत्तल गोलीय पृष्ठ का व्यास छोटा हो तो बिंदु M, ध्रुव P के निकट होगा, तब कोण `i` व् r अत्यंत छोटे होंगे | यदि कोण `i` व् r रेडियन में हो तो
`sini=i` तथा `sinr=r`
अत: `(i)/(r)=(n_(2))/(n_(1))` अथवा `n_(1)i=n_(2)r` . . (3)
समीकरण (1) व् समीकरण (2) से `i` व् `r` के मन समीकरण (3) में रखने पर,
`n_(1)(alpha+gamma)=n_(2)(beta+gamma)`
अथवा `n_(1)alpha+n_(1)gamma=n_(2)beta+n_(2)gamma`
अथवा `-n_(2)beta+n_(1)alpha=gamma(n_(2)-n_(1))` . . (4)
चूँकि पृष्ठ का छोटा माना गया है, अत: कोण `alpha,beta` व् `gamma` भी छोटे होंगे तथा बिंदु M व् L ध्रुव P के समीप होगे| इस दशा में,
`alpha=tanalpha=(ML)/(LO)=(ML)/(PO)=(h)/((-u))`
`beta=tanbeta=(ML)/(LI)=(ML)/(PI)=(h)/((-v))`
`gamma=tangamma=(ML)/(LC)=(ML)/(PC)=h/R`
`alpha,beta` व् `gamma` के मान समीकरण (4) में रखने पर,
`-n_(2)((h)/(-v))+n_(1)((h)/(-u))=(n_(2)-n_(1))(h)/(R)`
अथवा `(n_(2))/(v)-(n_(1))/(u)=((n_(2)-n_(1)))/(R)` . . (5)
यदि n विरल माध्यम के सापेक्ष का अपवर्तनांक है तो `n_(2)//n_(1)=n,` अत: समीकरण (5) से,
`(n_(2)//n_(1))/(v)-(1)/(u)=((n_(2)//n_(1)-1))/(R)`
अथवा `(n)/(v)-(1)/(u)=(n-1)/(R)`
इस सूत्र के अनुसार v का मान `alpha` पर निर्भर नही करता, अत: बिंदु वस्तु O से चलने वाली सभी किरणे उत्तल पृष्ठ से अपवर्तित होकर एक ही बिंदु I से आती हुई प्रतीत होंगी अर्थात I, O का आभासी प्रतिबिम्ब है |
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