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Class 12
PHYSICS
हाइगेन्स की द्वितीयक तरंगिकाओं की परिकल्...

हाइगेन्स की द्वितीयक तरंगिकाओं की परिकल्पना का उल्लेख कीजिए।
अथवा हाइगेन्स के द्वितीयक तरंगिकाओं के सिद्धान्त की विवेचना कीजिए।

लिखित उत्तर

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हाइगेन्स की द्वितीयक तरंगिकाओं की परिकल्पना-हाइगेन्स ने किसी माध्यम में तरंगों के संचरण की व्याख्या करने के लिए एक सिद्धान्त प्रतिपादित किया, जिसे हाइगेन्स का द्वितीयक तरंगिकाओं का सिद्धान्त कहते हैं। इसके लिए हाइगेन्स ने निम्नलिखित परिकल्पनाएँ की
1. जब किसी माध्यम में स्थित तरंग स्रोत से तरंगें निकलती हैं तो तरंग स्रोत के चारों ओर स्थित माध्यम के कण कम्पन करने लगते हैं। माध्यम में वह पृष्ठ, जिसमें स्थित सभी कण समान कला में कम्पन करते हैं,तरंगान कहलाता है। यदि तरंग स्रोत बिन्दुवत् है तो तरंगाय गोलीय होता है। तरंग स्रोत से बहुत अधिक दूरी पर तरंगाग्र समतल हो जाता है।
2. तरंगाय पर स्थित माध्यम का प्रत्येक कण एक नए तरंग स्रोत का कार्य करता है, जिससे सभी दिशाओं में नई तरंगें निकलती हैं। इन नई तरंगों को द्वितीयक तरंगिकाएँ कहते हैं। माध्यम में द्वितीयक तरंगिकाएँ उसी चाल से आगे की ओर बढ़ती है, जिस चाल से प्राथमिक तरंगें आगे बढ़ती हैं।
3. यदि किसी क्षण इन द्वितीयक तरंगिकाओं का अन्यालोप अर्थात् उनको स्पर्श करता हुआ पृष्ठ खींचें तो यह अन्वालोप उस क्षण तरंगान की नई स्थिति प्रदर्शित करता है। माना S एक बिन्दु स्रोत है, जिससे तरंगें निकलती हैं (चित्र (a)]। माना इन तरंगों की चाल है। माना किसी क्षण गोलीय तरंगाग्र की स्थिति AB है। हाइगेन्स के तरंग सिद्धान्तानुसार, तरंगाग्र AB पर स्थित माध्यम * के प्रत्येक कण से द्वितीयक तरंगिकाएँ, प्राथमिक तरंगों की चाल । से चारों ओर को 8आगे बढ़ती है। माना हमें । समयान्तराल के पश्चात् तरंगाय की स्थिति ज्ञात करनी है। इस समयान्तराल में प्रत्येक द्वितीयक गतरंगिका ७t दूरी तय करेगी, अत: हम तरंगान  (b) AB पर स्थित बिन्दुओं 1, 2, 3, 4,..........को केन्द्र मानकर Ut त्रिज्या के गोले खींचते हैं। इन गोलों को स्पर्श करता हुआ खींचा गया पृष्ठ अथवा अन्यालोप AB. नए तरंगाग्र की स्थिति को प्रकट करता है। इन गोलों का एक अन्वालोप A"B.. पीछे की दिशा में भी प्राप्त होता है, परन्तु हाइगेन्स का सिद्धान्त पीछे वाले अन्वालोप को स्वीकार नहीं करता।
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