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PHYSICS
हाइगेन का द्वितीयक तरंगिकाओं का सिद्धांन...

हाइगेन का द्वितीयक तरंगिकाओं का सिद्धांन्त समझाइए।

लिखित उत्तर

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हाइगेन्स का द्वितीयक तरंगिकाओं का सिद्धान्त-लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर II 2 देखिए।
हाइगेन्स की द्वितीयक तरंगिकाओं के सिद्धान्त द्वारा तरंगों के परावर्तन की व्याख्या-माना एक प्रकाश स्रोत अनन्त पर रखा है, जिससे प्राप्त समतल तरंगान AB परावर्तक पृष्ठ XX. पर इस प्रकार आपतित होता है कि तरंग-संचरण की किरण परावर्तक पृष्ठ के बिन्दु A पर अभिलम्ब से कोण । बनाती है (चित्र)।X माना तरंगाय की चाल । है तथा तरंगाय के

बिन्दु Bको परावर्तक पृष्ठ के बिन्दु A तक पहुँचने में । समय लगता है। जैसे-जैसे तरंगाग्र AB आगे बढ़ता है, वह परावर्तक पृष्ठ के बिन्दुओं A व A. के बीच के बिन्दुओं से टकराता जाता है। अत: हाइगेन्स के सिद्धान्तानुसार, Aव A के बीच के सभी बिन्द द्वितीयक तरंगिकाओं के स्रोत बन जाते हैं तथा इन बिन्दओं से द्वितीयक गोलीय तरंगिकाएँ निकलने लगती हैं। परावर्तक पृष्ठ XX. की उपस्थिति में ये द्वितीयक तरंगिकाएँ पृष्ठ के दूसरी ओर नहीं जा पातीं, बल्कि पहले ही माध्यम में चाल`upsilon` से चलकर ऊपर की ओर फैल जाती हैं।
इस प्रकार सबसे पहले बिन्दु A से द्वितीयक तरंगिकाएं चलती है, जो । समय में `AB. (=upsilont)` दूरी तय करती हैं। ठीक इतने ही समय । में तरंगाय का बिन्दु B, दूरी BA. चलकर A. पर टकराता है।
अतः .`AB=upsilont=BA’`
अब बिन्दु A को केन्द्र मानकर AB. त्रिज्या का एक गोलीय चाप खींचते हैं। (यह चाप । समय पर बिन्दु A से उत्पन्न होने वाली द्वितीयक तरंगिकाओं की स्थिति को प्रदर्शित करता है) बिन्दु A से इस गोलीय चाप पर स्पर्श. रेखा AB. खींचते हैं। इस प्रकार जैसे-जैसे आपतित तरंगाग्र AB आगे बढ़ता है, A व B के बीच के सभी बिन्दुओं से एक के बाद एक चलने वाली द्वितीयक तरंगिकाएँ एकसाथ AB. को स्पर्श करेंगी। अतः हाइगेन्स के सिद्धान्तानुसार, AB. नए तरंगान को प्रदर्शित करेगा अर्थात् A B परावर्तित तरंगान होगा।
समकोण `triangleABA` तथा `triangle AB.A.` में
`AB.= BA`   (दोनों के बराबर है) `/_A.BA = 2 AB.A.` (दोनों समकोण `triangle` हैं)
तथा A A. उभयनिष्ठ है।
अत: दोनों त्रिभुज A ABA. व AB.A. सर्वांगसम हैं।
अत: `angleBA A = angleB.A.A`
अर्थात् आपतन कोण i = परावर्तन कोणा r
अत: आपतित तरंगाग्र AB तथा परावर्तित तरंगाग्र AB. परावर्तक पृष्ठXX. के साथ बराबर कोण बनाते हैं।
चित्र से स्पष्ट है कि-1. आपतित किरण, परावर्तित किरण तथा आपतन बिन्दु पर अभिलम्ब तीनों एक ही तल में हैं, यह परावर्तन का प्रथम नियम है।
2.आपतित किरणें तथा परावर्तित किरणें पृष्ठ XX. पर खींचे गए अभिलम्ब से बराबर कोण बनाती है अर्थात् आपतन कोण i = परावर्तन कोण r यह परावर्तन का द्वितीय नियम है।
दिया है।`lambda=6000A,n = 1.5`
(i) परावर्तित प्रकाश के लिए,
`lambda= 6000A`
चाल `c=3xx10^(8)`मीटर/सेकण्ड
आवृत्ति`nu=(c)/(lambda)=(3xx10^(8))/(6xx10^(-7))=5xx10^(14)`हर्ट्स
(ii) अपवर्तित प्रकाश के लिए
`lambda =lambda//n = (6000)/(1.5) = 4000A`
`चालupsilon=(c)/(n)=(3xx10^(8))/(1.5)=2xx10^(8)`मीटर/सेकण्ड
आवृत्ति `nu = 5 xx 10^(14)` हर्ट्स।
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