तरंगान-माध्यम में खींचा गया ऐसा काल्पनिक पृष्ठ जिस पर स्थित प्रत्येक कण कम्पन की समान कला में होता है, तरंगान कहलाता है।हाइगेन्स की द्वितीयक तरंगिकाओं के सिद्धान्त द्वारा तरंगों के अपवर्तन की व्याख्या-माना एक प्रकाश स्रोत अनन्त पर रखा है, जिससे प्राप्त समतल तरंगाग्र AB अपवर्तक पृष्ठ XX. पर इस प्रकार आपतित होता है कि तरंग-संचरण की किरण अपवर्तक पृष्ठ के बिन्दु A पर अभिलम्ब से कोण i बनाती है (चित्र)। माना पहले माध्यम में तरंगाग्र की चाल`upsilon_(1)` तथा दूसरे माध्यम में तरंगान की चाल `upsilon_(2)` है। माना तरंगाग्र के बिन्दु B को अपवर्तक पृष्ठ के बिन्दु A. तक पहुँचने में समय लगता है। जैसे-जैसे तरंगाग्र AB आगे बढ़ता है, वह अपवर्तक पृष्ठ के

बिन्दुओं A व A. के बीच के बिन्दुओं से टकराता जाता है। अत: हाइगेन्स के सिद्धान्तानुसार, A व A. के बीच के सभी बिन्दु द्वितीयक तरंगिकाओं के स्रोत बन जाते हैं। इस प्रकार सबसे पहले बिन्दु A से द्वितीयक तरंगिकाएं चलती है, जो। समय में दूसरे माध्यम में `AB= upsilon_(2)t` दूरी तय करती हैं। ठीक इतने ही समय में बिन्दु B, पहले माध्यम में `BA. = upsilon_(1)t` दूरी चलकर A. पर टकराता है।
अत: `AB= upsilon_(t)t` तथा `BA=upsilon_(1)t`
अब बिन्दु A को केन्द्र मानकर AB. त्रिज्या का एक गोलीय चाप खींचते हैं। (यह चाप । समय पर बिन्दु A से दूसरे माध्यम में उत्पन्न होने वाली द्वितीयक तरंगिकाओं की स्थिति को प्रदर्शित करता है।) बिन्दु A से इस गोलीय चाप पर स्पर्श रेखा A.B. खींचते हैं। इस प्रकार जैसे-जैसे आपतित तरंगाग्र AB आगे बढ़ता है A व A. के बीच के सभी बिन्दुओं से एक के बाद एक चलने वाली द्वितीयक तरंगिकाएँ एक साथ AB. को स्पर्श करेंगी। अतः हाइगेन्स के सिद्धान्तानुसार AB. नए तरंगान को प्रदर्शित करेगा अर्थात् A B अपवर्तित तरंगाग्र होगा।
माना आपतित तरंगाग्र AB तथा अपवर्तित तरंगाग्र AB, अपवर्तक पृष्ठ XX. के साथ क्रमश: कोण i तथा r बनाते हैं।
t अब समकोण `triangleABA sin i=(BA)/(A A)=(upsilon_(1)t)/(A A)`. अब समकोण `triangleABA` में `sin i=(BA)/(A A)=(upsilon_(1)t)/(A A)`....(1),
इसी प्रकार समकोण `triangleABA`. में,
`sinr=(AB)/(A A)=(upsilon_(2)t)/(A A’)`
समीकरण (1) को समीकरण (2) से भाग करने पर,`(sini)/(sinr)=(upsilon_(1))/(upsilon_(2))= नियतांक`।
यही स्नैल का अपवर्तन का नियम है अर्थात् यह अपवर्तन का द्वितीय नियम है। चित्र से स्पष्ट है कि आपतित किरण, अपवर्तित किरण तथा आपतन बिन्दु पर अभिलम्ब तीनों एक ही तल में हैं। यह अपवर्तन का प्रथम नियम है।
