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Class 10
BIOLOGY
माना पाचन तंत्र का नामांकित चित्र खींचे ...

माना पाचन तंत्र का नामांकित चित्र खींचे एवं भोजन-पाचन प्रक्रिया का वर्णन करें।
अथवा
, एक तंत्रिका कोशिका (न्यूरॉन) की संरचना का चित्र बनाइए तथा इसके कार्यों का वर्णन करें।

लिखित उत्तर

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मनुष्य में पाचन क्रिया मुखगुहा से प्रारंभ होती है तथा छोटी आंत में समाप्त होती है। मुँह में दाँत तथा जीभ की मदद से भोजन पिसकर महीन हो जाता है। यहाँ लार-ग्रंथियों से लार निकलकर भोजन में मिलता रहता है। लार में उपस्थित टायलीन एंजाइम भोजन के स्टार्च को माल्टोस में बदल देता है। इसके बाद भोजन ग्रासनली से होता हुआ आमाशय में आ जाता है। आमाशय की भीतरी सतह पर जठर ग्रंथियों से जठर रस का स्राव होता है। इस स्राव में मुख्यतः तीन प्रकार के पदार्थ पाए जाते हैं-

हाइड्रोक्लोरिक अम्ल, पेप्सिन तथा रेनिन । हाइड्रोक्लोरिक अम्ल एंजाइम की क्रिया को तीव्र करने तथा भोजन के साथ आने वाले बैक्टीरिया को नष्ट करने में सहायक होता है । पेप्सिन भोजन के प्रोटीन को खंडित कर पेप्टोन में बदल देता है। रेनिन दूध को फाड़ने का काम करता है। आमाशय में प्रोटीन के अलावा वसा का भी पाचन प्रारंभ होता है। यहाँ वसा का आंशिक पाचन गैस्ट्रिक लाइपेज नामक एंजाइम से होता है। आमाशय में भोजन का स्वरूप गाढ़े लेई की तरह हो जाता है, जिसे काइम कहते हैं। काइम अब.छोटी आंत में पहुंचता है। छोटी आंत आहारनाल का सबसे लंबा भाग होती है। इसके तीन भाग होते हैं-ग्रहणी, जेजनम तथा इलियम। ग्रहणी में भोजन के साथ पित्त, अग्न्याशयी रस तथा इंसुलिन आकर मिलते हैं। ये सभी, भोजन के पाचन क्रिया में मदद करते हैं। अग्न्याशयी रस में उपस्थित एमाइलेज एंजाइम स्टार्च को माल्टोस में, लाइपेज एंजाइम वसा को अम्ल एवं ग्लिसरॉल में तथा ट्रिप्सिन एंजाइम प्रोटीन को ऐमीनो अम्ल में परिणत कर देता है। छोटी आंत में भोजन के पाचन के उपरांत पचे भोजन का अवशोषण इलियम के विलाई द्वारा होता है। अपचा भोजन इलियम से बड़ी आंत में आता है। यहाँ अपचे भोजन के अतिरिक्त जल का अवशोषण होता है तथा अंत में अपचा भोजन मल के रूप में अस्थायी तौर पर रेक्टम में संचित रहता है जो समय-समय पर मलद्वार के रास्ते शरीर से बाहर निकल जाता है। अथवा, तंत्रिका तंत्र की रचनात्मक और कार्यात्मक इकाई को तंत्रिका कोशिका या न्यूरॉन कहते हैं। तंत्रिका कोशिका (न्यूरॉन) तीन प्रकार की होती हैं इसके कार्य निम्नलिखित हैं

(i) संवेदी तंत्रिकोशिका-शरीर के विभिन्न भागों से यह संवेदनाओं को मस्तिष्क की ओर ले जाती है।
(ii) प्रेरक तंत्रिकोशिका-यह मस्तिष्क से आदेशों को पेशियों तक पहुँचाती है।
(iii) बहुधुवी तंत्रिकोशिका-यह संवेदनाओं को मस्तिष्क की तरफ और मस्तिष्क से पेशियों की ओर ले जाने का कार्य करती है।
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