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PHYSICS
m द्रव्यमान की एक वास्तु आवर्त गति कर रह...

m द्रव्यमान की एक वास्तु आवर्त गति कर रही है यह दिखाइए की वास्तु की सम्पूर्ण ऊर्जा ( गतिज + स्थितिज ) `E=1/2momega^2A^@` है जहा कोणीय आवर्ती है तथा A आयाम है

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एक 5 kg द्रव्यमान वाली वस्तु पर 2s के लिये एक नियत बल कार्यरत होता है। यह वस्तु के वेग को 3m/s से बढा 7m/s कर देता है। लगाये गये बल की मात्रा ज्ञात करें

आज जब भी कोई गाँव का नाम लेता है तो एक अलग ही छवि उभरती है। वह छवि कहती है कि वहाँ गरीबी है। वहाँ अशिक्षा और अज्ञान है। वहाँ अंध-विश्वास है। गंदगी है। बीमारी है। हमें विचार करना है कि सच क्या है? क्या हमारे गाँव ऐसे ही थे जैसे आज हैं? आज जो गाँवों का दुर्दशा हुई है उसके लिए जिम्मेदार कौन है? इन सवालों की पड़ताल करते हुए हमें नई समझ बनानी है तथा गाँवों के सही स्वरूप की पहचान करनी है। वैसे यह खुदा का शुक्र है कि गाँवों पर कई तरह के आक्रामक दुष्प्रभावों के बावजूद उनका मूल स्वरूप नहीं बदलता है। जो दूरस्थ गाँव हैं-- शहर के पड़ोस से दूर उनकी निजता तो खासी बची हुई है। ऐसी स्थिति में हमारा दायित्व, एक शिक्षित समाज का दायित्व क्या बनता है? हमें विचार करना है। मंगर ऐसा कोई भी विचार गाँवों को आँखों से देखे बिना, स्वयं देख कर समझे बिना नहीं किया जा सकता! तो हमें अपनी फर्स्ट हैंड समझ बनाने के लिए गाँव चलना है। अपने मूल स्वरूप में गाँव एक वेधशाला है। एक विद्याशाला है। गाँच वेधशाला इसलिए है कि ज्ञान को रोज वहाँ कर्म की कसौटी पर कसा जाता है। आजमाया जाता है। जो ज्ञान कर्म की कसौटी पर खरा न उतरे तो उसे खारिज कर दिया जाता है। हर ज्ञान के होने की शर्त यह है वह सृजन और उत्पादन की शान पर तराशा जाए। ज्ञान के होने की अनिवार्य शर्त है

आज जब भी कोई गाँव का नाम लेता है तो एक अलग ही छवि उभरती है। वह छवि कहती है कि वहाँ गरीबी है। वहाँ अशिक्षा और अज्ञान है। वहाँ अंध-विश्वास है। गंदगी है। बीमारी है। हमें विचार करना है कि सच क्या है? क्या हमारे गाँव ऐसे ही थे जैसे आज हैं? आज जो गाँवों का दुर्दशा हुई है उसके लिए जिम्मेदार कौन है? इन सवालों की पड़ताल करते हुए हमें नई समझ बनानी है तथा गाँवों के सही स्वरूप की पहचान करनी है। वैसे यह खुदा का शुक्र है कि गाँवों पर कई तरह के आक्रामक दुष्प्रभावों के बावजूद उनका मूल स्वरूप नहीं बदलता है। जो दूरस्थ गाँव हैं-- शहर के पड़ोस से दूर उनकी निजता तो खासी बची हुई है। ऐसी स्थिति में हमारा दायित्व, एक शिक्षित समाज का दायित्व क्या बनता है? हमें विचार करना है। मंगर ऐसा कोई भी विचार गाँवों को आँखों से देखे बिना, स्वयं देख कर समझे बिना नहीं किया जा सकता! तो हमें अपनी फर्स्ट हैंड समझ बनाने के लिए गाँव चलना है। अपने मूल स्वरूप में गाँव एक वेधशाला है। एक विद्याशाला है। गाँच वेधशाला इसलिए है कि ज्ञान को रोज वहाँ कर्म की कसौटी पर कसा जाता है। आजमाया जाता है। जो ज्ञान कर्म की कसौटी पर खरा न उतरे तो उसे खारिज कर दिया जाता है। हर ज्ञान के होने की शर्त यह है वह सृजन और उत्पादन की शान पर तराशा जाए। गाँव की छवि में क्या शामिल नहीं है?

अंतरा - भारतवर्ष की उन्नति कैसे हो सकती है ? | लेख | भारतवर्ष की उन्नति कैसे हो सकती है ? भाग -2