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PHYSICS
किसी परिपथ मे प्रति मिनट 180 कुलाँम आवेश...

किसी परिपथ मे प्रति मिनट 180 कुलाँम आवेश प्रवाहित हो रहा है !परिपथ मई बहने वाली धारा ज्ञात कीजिये

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As observed from the top of a lighthouse, 120 sqrt3 m above the sea level, the angle of depression of a ship sailing towards it from 30^@ to 60^@ .The distance travelled by the ship during the period of observation is : एक प्रकाशस्तंभ के शीर्ष से जो की, समुद्र तल से 120 sqrt3 मीटर ऊपर है, उसकी और आ रहे जहाज का अवनमन कोण 30^@ से 60^@ हो जाता है अवलोकन की अवधि के दौरान जहाज द्वारा तय की जाने वाली दूरी ज्ञात कीजिये

आदमी की तलाश'-यह स्वर अक्सर सुनने को मिलता है। यह भी सुनने को मिलता है कि आज आदमी, आदमी नहीं रहा। इन्हीं स्थितियों के बीच दार्शनिक राधाकृष्णन की इन पंक्तियों का स्मरण हो आया-'हमने पक्षियों की तरह उड़ना और मछलियों की तरह तैरना तो सीख लिया है, पर मनुष्य की तरह पृथ्वी पर चलना और जीना नहीं सीखा। जिंदगी के सफर में नैतिक और मानवीय उद्देश्यों के प्रति मन में अटूट विश्वास होना जरूरी है। कहा जाता है कि आदमी नहीं चलता, उसका विश्वास चलता है। आत्मविश्वास सभी गुणों को एक जगह बाँध देता है, यानि कि विश्वास की रोशनी में मनुष्य का संपूर्ण व्यक्तित्व और आदर्श उजागर होता है। गेटे की प्रसिद्ध उक्ति है कि जब कोई आदमी ठीक काम करता है, तो उसे पता तक नहीं चलता कि वह क्या कर रहा है, पर गलत काम करते समय उसे हर क्षण यह ख्याल रहता है कि वह जो कर रहा है, वह गलत है। गलत को गलत मानते हुए भी इंसान गलत किए जा रहा है। इसी कारण समस्याओं एवं अंधेरों के अंबार लगे हैं। लेकिन ऐसा ही नहीं है। कुछ अच्छे लोग भी है। ऐसे लोगों ने नैतिकता और सच्चरित्रता का खिताब ओढ़ा नहीं, उसे जीकर दिखाया। वे भाग्य और नियति के हाथों खिलौना बनकर नहीं बैठे, स्वयं के पसीने से अपना भाग्य लिखा। महात्मा गांधी ने इसीलिए कहा कि हमें वह परिवर्तन खुद बनना चाहिए जिसे हम संसार में देखना चाहते हैं। जरूरत है कि हम दर्पण जैसा जीवन जीना सीखें। उन सभी खिड़कियों को बंद कर दें, जिनसे आने वाली गंदी हवा इंसान को इंसान नहीं रहने देती। मनुष्य के व्यवहार में मनुष्यता को देखा जा सके, यही 'आदमी की तलाश' है। मुख्य भाव के अनुसार गद्यांश का सबसे उपयुक्त शीर्षक हो सकता है

आदमी की तलाश'-यह स्वर अक्सर सुनने को मिलता है। यह भी सुनने को मिलता है कि आज आदमी, आदमी नहीं रहा। इन्हीं स्थितियों के बीच दार्शनिक राधाकृष्णन की इन पंक्तियों का स्मरण हो आया-'हमने पक्षियों की तरह उड़ना और मछलियों की तरह तैरना तो सीख लिया है, पर मनुष्य की तरह पृथ्वी पर चलना और जीना नहीं सीखा। जिंदगी के सफर में नैतिक और मानवीय उद्देश्यों के प्रति मन में अटूट विश्वास होना जरूरी है। कहा जाता है कि आदमी नहीं चलता, उसका विश्वास चलता है। आत्मविश्वास सभी गुणों को एक जगह बाँध देता है, यानि कि विश्वास की रोशनी में मनुष्य का संपूर्ण व्यक्तित्व और आदर्श उजागर होता है। गेटे की प्रसिद्ध उक्ति है कि जब कोई आदमी ठीक काम करता है, तो उसे पता तक नहीं चलता कि वह क्या कर रहा है, पर गलत काम करते समय उसे हर क्षण यह ख्याल रहता है कि वह जो कर रहा है, वह गलत है। गलत को गलत मानते हुए भी इंसान गलत किए जा रहा है। इसी कारण समस्याओं एवं अंधेरों के अंबार लगे हैं। लेकिन ऐसा ही नहीं है। कुछ अच्छे लोग भी है। ऐसे लोगों ने नैतिकता और सच्चरित्रता का खिताब ओढ़ा नहीं, उसे जीकर दिखाया। वे भाग्य और नियति के हाथों खिलौना बनकर नहीं बैठे, स्वयं के पसीने से अपना भाग्य लिखा। महात्मा गांधी ने इसीलिए कहा कि हमें वह परिवर्तन खुद बनना चाहिए जिसे हम संसार में देखना चाहते हैं। जरूरत है कि हम दर्पण जैसा जीवन जीना सीखें। उन सभी खिड़कियों को बंद कर दें, जिनसे आने वाली गंदी हवा इंसान को इंसान नहीं रहने देती। मनुष्य के व्यवहार में मनुष्यता को देखा जा सके, यही 'आदमी की तलाश' है। 'आदमी आदमी नहीं रहा'- कथन का भाव है

आदमी की तलाश'-यह स्वर अक्सर सुनने को मिलता है। यह भी सुनने को मिलता है कि आज आदमी, आदमी नहीं रहा। इन्हीं स्थितियों के बीच दार्शनिक राधाकृष्णन की इन पंक्तियों का स्मरण हो आया-'हमने पक्षियों की तरह उड़ना और मछलियों की तरह तैरना तो सीख लिया है, पर मनुष्य की तरह पृथ्वी पर चलना और जीना नहीं सीखा। जिंदगी के सफर में नैतिक और मानवीय उद्देश्यों के प्रति मन में अटूट विश्वास होना जरूरी है। कहा जाता है कि आदमी नहीं चलता, उसका विश्वास चलता है। आत्मविश्वास सभी गुणों को एक जगह बाँध देता है, यानि कि विश्वास की रोशनी में मनुष्य का संपूर्ण व्यक्तित्व और आदर्श उजागर होता है। गेटे की प्रसिद्ध उक्ति है कि जब कोई आदमी ठीक काम करता है, तो उसे पता तक नहीं चलता कि वह क्या कर रहा है, पर गलत काम करते समय उसे हर क्षण यह ख्याल रहता है कि वह जो कर रहा है, वह गलत है। गलत को गलत मानते हुए भी इंसान गलत किए जा रहा है। इसी कारण समस्याओं एवं अंधेरों के अंबार लगे हैं। लेकिन ऐसा ही नहीं है। कुछ अच्छे लोग भी है। ऐसे लोगों ने नैतिकता और सच्चरित्रता का खिताब ओढ़ा नहीं, उसे जीकर दिखाया। वे भाग्य और नियति के हाथों खिलौना बनकर नहीं बैठे, स्वयं के पसीने से अपना भाग्य लिखा। महात्मा गांधी ने इसीलिए कहा कि हमें वह परिवर्तन खुद बनना चाहिए जिसे हम संसार में देखना चाहते हैं। जरूरत है कि हम दर्पण जैसा जीवन जीना सीखें। उन सभी खिड़कियों को बंद कर दें, जिनसे आने वाली गंदी हवा इंसान को इंसान नहीं रहने देती। मनुष्य के व्यवहार में मनुष्यता को देखा जा सके, यही 'आदमी की तलाश' है। 'जरूरत है कि हम दर्पण-जैसा जीवन जीना सीखें।' रचना की दृष्टि से उपर्युक्त वाक्य है।

आदमी की तलाश'-यह स्वर अक्सर सुनने को मिलता है। यह भी सुनने को मिलता है कि आज आदमी, आदमी नहीं रहा। इन्हीं स्थितियों के बीच दार्शनिक राधाकृष्णन की इन पंक्तियों का स्मरण हो आया-'हमने पक्षियों की तरह उड़ना और मछलियों की तरह तैरना तो सीख लिया है, पर मनुष्य की तरह पृथ्वी पर चलना और जीना नहीं सीखा। जिंदगी के सफर में नैतिक और मानवीय उद्देश्यों के प्रति मन में अटूट विश्वास होना जरूरी है। कहा जाता है कि आदमी नहीं चलता, उसका विश्वास चलता है। आत्मविश्वास सभी गुणों को एक जगह बाँध देता है, यानि कि विश्वास की रोशनी में मनुष्य का संपूर्ण व्यक्तित्व और आदर्श उजागर होता है। गेटे की प्रसिद्ध उक्ति है कि जब कोई आदमी ठीक काम करता है, तो उसे पता तक नहीं चलता कि वह क्या कर रहा है, पर गलत काम करते समय उसे हर क्षण यह ख्याल रहता है कि वह जो कर रहा है, वह गलत है। गलत को गलत मानते हुए भी इंसान गलत किए जा रहा है। इसी कारण समस्याओं एवं अंधेरों के अंबार लगे हैं। लेकिन ऐसा ही नहीं है। कुछ अच्छे लोग भी है। ऐसे लोगों ने नैतिकता और सच्चरित्रता का खिताब ओढ़ा नहीं, उसे जीकर दिखाया। वे भाग्य और नियति के हाथों खिलौना बनकर नहीं बैठे, स्वयं के पसीने से अपना भाग्य लिखा। महात्मा गांधी ने इसीलिए कहा कि हमें वह परिवर्तन खुद बनना चाहिए जिसे हम संसार में देखना चाहते हैं। जरूरत है कि हम दर्पण जैसा जीवन जीना सीखें। उन सभी खिड़कियों को बंद कर दें, जिनसे आने वाली गंदी हवा इंसान को इंसान नहीं रहने देती। मनुष्य के व्यवहार में मनुष्यता को देखा जा सके, यही 'आदमी की तलाश' है। 'मन में अटूट विश्वास होना जरूरी है।' उपर्युक्त वाक्य में 'अटूट' से है