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PHYSICS
यह एक विख्यात तथ्य है की पूर्ण सूर्यग्रह...

यह एक विख्यात तथ्य है की पूर्ण सूर्यग्रहण की अवधि में चन्द्रमा की चक्रिका सूर्य की चक्रिका को पूरी तरह ढक लेती है । इस तथ्य के आधार पर चन्द्रमा का लगभग व्यास ज्ञात कीजिए । पृथ्वी से सूर्य की दूरी `= 1.50 xx 10^(11)` मी, पृथ्वी से चन्द्रमा की दूरी `=3.84 × 10^8 ` मी, सूर्य का व्यास `D S = 1.39 × 10^9 मी ।`

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गद्यांश को पड़कर निम्नलिखित प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प चुनिए। हमारे देश में आधुनिक शिक्षा नामक एक चीत प्रकट हुई। इसके नाम पर यत्रतत्र स्कूल और कॉलेज कुकुरमुत्तों की तरह सिर उनकर खड़े हो गए हैं। इनका गठन इस तरह किया गया है कि इनका प्रकाश कॉलेज व्यवस्था के बाहर मुश्किल से पुटंचता है। सूरज की रोशनी चाँद से टकराकर जितनी निकलती है, इनसे उससे भी कम रोशनी निकलती है। एक परदेशी भाषा की मोटी दीवार इसे चारों ओर से घेरे हुए है। जब मैं अपनी मातृभाषा के पारिए शिक्षा के प्रसार के बारे सोचता हूँ तो उस विचार से साहस क्षीण होचा है कि घर की चारदीवारी में बंद दुल्हन की तरह यह भयभीत रहती है। बरामदे तक ही इसके स्वतंत्रता का साम्राज्य है। यह एक इंच आगे बढ़ी कि अपट निकल आता है। हमारी मातृभामा का राज प्राथमिक शिक्षा तक सीमित है। दूसरे शब्दों में, यह केवल बच्चे की शिक्षा के लिए उपयुक्त है, मानो यह कि जिसे कोई दूसरी भाषा सीखने का अवसर नहीं मिला, हमारी जनता की उस विशाल भीड़ को शिक्षा के उनके अधिकार के प्रसंग में बच्चा ही समझा जाएगा। उन्हें कभी पूर्ण विकसित मनुष्य नहीं बनना है और तब भी हम प्रेमपूर्वक सोचते है कि स्वग्रन मिलने पर उन्हें संपूर्ण मनुष्य के अधिकार हासिल होंगे। घर की चारदीवारी में बंद दुल्हन की तरह यह भयभीत रहती है। वाक्य में रेखांकित अंश है

गद्यांश को पड़कर निम्नलिखित प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प चुनिए। हमारे देश में आधुनिक शिक्षा नामक एक चीत प्रकट हुई। इसके नाम पर यत्रतत्र स्कूल और कॉलेज कुकुरमुत्तों की तरह सिर उनकर खड़े हो गए हैं। इनका गठन इस तरह किया गया है कि इनका प्रकाश कॉलेज व्यवस्था के बाहर मुश्किल से पुटंचता है। सूरज की रोशनी चाँद से टकराकर जितनी निकलती है, इनसे उससे भी कम रोशनी निकलती है। एक परदेशी भाषा की मोटी दीवार इसे चारों ओर से घेरे हुए है। जब मैं अपनी मातृभाषा के पारिए शिक्षा के प्रसार के बारे सोचता हूँ तो उस विचार से साहस क्षीण होचा है कि घर की चारदीवारी में बंद दुल्हन की तरह यह भयभीत रहती है। बरामदे तक ही इसके स्वतंत्रता का साम्राज्य है। यह एक इंच आगे बढ़ी कि अपट निकल आता है। हमारी मातृभामा का राज प्राथमिक शिक्षा तक सीमित है। दूसरे शब्दों में, यह केवल बच्चे की शिक्षा के लिए उपयुक्त है, मानो यह कि जिसे कोई दूसरी भाषा सीखने का अवसर नहीं मिला, हमारी जनता की उस विशाल भीड़ को शिक्षा के उनके अधिकार के प्रसंग में बच्चा ही समझा जाएगा। उन्हें कभी पूर्ण विकसित मनुष्य नहीं बनना है और तब भी हम प्रेमपूर्वक सोचते है कि स्वग्रन मिलने पर उन्हें संपूर्ण मनुष्य के अधिकार हासिल होंगे। स्कूल और कॉलेजों का कुकुरमुत्तों की तरह सिर उठाने से तात्पर्य है कि स्कूल और कॉलेज

विद्यालय समाज की एक ऐसी संस्था है, जिसके कुछ सुनिश्चित एवं सुनिर्धारित लक्ष्य होते हैं, जबकि समुदाय का तात्पर्य ऐसे समूह से है जिसमें एक प्रकार के लोग होते हैं। यह एकत्व आर्थिक, राजनीतिक, धार्मिक या नागरिक गुणों में हो सकता है। कई समुदाय अपने लिए अलग विद्यालय की स्थापना भी कर लेते हैं। अपनी औपचारिक भूमिकाओं के अलावा अन्य भूमिकाओं के निर्वहन में भी विद्यालय समुदाय की सहायता करता है। इसके लिए आवश्यकता पड़ने पर समुदाय के क्रिया-कलापों में वह हस्तक्षेप भी करता है। उदाहरणस्वरूप प्रौढ़ शिक्षा, स्त्री शिक्षा, स्वास्थ्य सम्बन्धी जानकारियों को अभिभावकों तक पहुँचाने में भी विद्यालय यथासम्भव समुदाय की सहायता करता है एवं आवश्यकता पड़ने पर हस्तक्षेप भी करता है। अभिभावक एवं विद्यालय एक-दूसरे के सम्पर्क में रहते हैं। अभिभावक समुदाय की आवश्यकताओं से परिचित होते हैं तथा विद्यालय को भी इनसे अवगत कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाकर बीच की व्यवहार्य कड़ी का काम करते हैं। उदाहरणस्वरूप समुदाय की आवश्यकताओं के अनुरूप अभिभावकगण प्रौढ़ शिक्षा, स्त्री शिक्षा इत्यादि में सहायता के लिए विद्यालय से अनुरोध करते हैं। इस तरह वे विद्यालय एवं समुदाय के बीच की व्यवहार्य कड़ी हैं। समुदाय के साथ निकट से जुड़ कर कार्य करने की स्थिति में विद्यालय अधिक प्रभावशाली हो जाता है। समुदाय और विद्यालय को जोड़ने में समाज के लोगों की भूमिका महत्त्वपूर्ण होती है। समुदाय के क्रिया-कलापों में विद्यालय की भागीदारी होती है। यही कारण है कि विद्यालयों के लिए पाठ्यवस्तु इतना लचीला बनाया जाता है कि उसमें समाज के विभिन्न समुदायों की विशेषताएँ स्पष्ट रूप से दिखाई पड़ती हैं। पर्यावरण को स्वच्छ रखने की शिक्षा देने के लिए आवश्यक है कि विद्यालय परिसर को स्वच्छ रखा जाए। जल संरक्षण की शिक्षा देने के लिए आवश्यक है कि विद्यालय परिसर में भी इनके संरक्षण के नियमों का पालन होता हो। इस तरह समुदाय की वास्तविकताओं को प्रायोगिक रूप से विद्यालय परिसर में प्रयोग कर उसे 8 अधिगम अनुभवों में रूपान्तरित किया जा सकता है। विद्यालय किसके सम्पर्क में रहता है?

विद्यालय समाज की एक ऐसी संस्था है, जिसके कुछ सुनिश्चित एवं सुनिर्धारित लक्ष्य होते हैं, जबकि समुदाय का तात्पर्य ऐसे समूह से है जिसमें एक प्रकार के लोग होते हैं। यह एकत्व आर्थिक, राजनीतिक, धार्मिक या नागरिक गुणों में हो सकता है। कई समुदाय अपने लिए अलग विद्यालय की स्थापना भी कर लेते हैं। अपनी औपचारिक भूमिकाओं के अलावा अन्य भूमिकाओं के निर्वहन में भी विद्यालय समुदाय की सहायता करता है। इसके लिए आवश्यकता पड़ने पर समुदाय के क्रिया-कलापों में वह हस्तक्षेप भी करता है। उदाहरणस्वरूप प्रौढ़ शिक्षा, स्त्री शिक्षा, स्वास्थ्य सम्बन्धी जानकारियों को अभिभावकों तक पहुँचाने में भी विद्यालय यथासम्भव समुदाय की सहायता करता है एवं आवश्यकता पड़ने पर हस्तक्षेप भी करता है। अभिभावक एवं विद्यालय एक-दूसरे के सम्पर्क में रहते हैं। अभिभावक समुदाय की आवश्यकताओं से परिचित होते हैं तथा विद्यालय को भी इनसे अवगत कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाकर बीच की व्यवहार्य कड़ी का काम करते हैं। उदाहरणस्वरूप समुदाय की आवश्यकताओं के अनुरूप अभिभावकगण प्रौढ़ शिक्षा, स्त्री शिक्षा इत्यादि में सहायता के लिए विद्यालय से अनुरोध करते हैं। इस तरह वे विद्यालय एवं समुदाय के बीच की व्यवहार्य कड़ी हैं। समुदाय के साथ निकट से जुड़ कर कार्य करने की स्थिति में विद्यालय अधिक प्रभावशाली हो जाता है। समुदाय और विद्यालय को जोड़ने में समाज के लोगों की भूमिका महत्त्वपूर्ण होती है। समुदाय के क्रिया-कलापों में विद्यालय की भागीदारी होती है। यही कारण है कि विद्यालयों के लिए पाठ्यवस्तु इतना लचीला बनाया जाता है कि उसमें समाज के विभिन्न समुदायों की विशेषताएँ स्पष्ट रूप से दिखाई पड़ती हैं। पर्यावरण को स्वच्छ रखने की शिक्षा देने के लिए आवश्यक है कि विद्यालय परिसर को स्वच्छ रखा जाए। जल संरक्षण की शिक्षा देने के लिए आवश्यक है कि विद्यालय परिसर में भी इनके संरक्षण के नियमों का पालन होता हो। इस तरह समुदाय की वास्तविकताओं को प्रायोगिक रूप से विद्यालय परिसर में प्रयोग कर उसे 8 अधिगम अनुभवों में रूपान्तरित किया जा सकता है। समुदाय और विद्यालय को जोड़ने में किसकी भूमिका महत्त्वपूर्ण होती है?

विद्यालय समाज की एक ऐसी संस्था है, जिसके कुछ सुनिश्चित एवं सुनिर्धारित लक्ष्य होते हैं, जबकि समुदाय का तात्पर्य ऐसे समूह से है जिसमें एक प्रकार के लोग होते हैं। यह एकत्व आर्थिक, राजनीतिक, धार्मिक या नागरिक गुणों में हो सकता है। कई समुदाय अपने लिए अलग विद्यालय की स्थापना भी कर लेते हैं। अपनी औपचारिक भूमिकाओं के अलावा अन्य भूमिकाओं के निर्वहन में भी विद्यालय समुदाय की सहायता करता है। इसके लिए आवश्यकता पड़ने पर समुदाय के क्रिया-कलापों में वह हस्तक्षेप भी करता है। उदाहरणस्वरूप प्रौढ़ शिक्षा, स्त्री शिक्षा, स्वास्थ्य सम्बन्धी जानकारियों को अभिभावकों तक पहुँचाने में भी विद्यालय यथासम्भव समुदाय की सहायता करता है एवं आवश्यकता पड़ने पर हस्तक्षेप भी करता है। अभिभावक एवं विद्यालय एक-दूसरे के सम्पर्क में रहते हैं। अभिभावक समुदाय की आवश्यकताओं से परिचित होते हैं तथा विद्यालय को भी इनसे अवगत कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाकर बीच की व्यवहार्य कड़ी का काम करते हैं। उदाहरणस्वरूप समुदाय की आवश्यकताओं के अनुरूप अभिभावकगण प्रौढ़ शिक्षा, स्त्री शिक्षा इत्यादि में सहायता के लिए विद्यालय से अनुरोध करते हैं। इस तरह वे विद्यालय एवं समुदाय के बीच की व्यवहार्य कड़ी हैं। समुदाय के साथ निकट से जुड़ कर कार्य करने की स्थिति में विद्यालय अधिक प्रभावशाली हो जाता है। समुदाय और विद्यालय को जोड़ने में समाज के लोगों की भूमिका महत्त्वपूर्ण होती है। समुदाय के क्रिया-कलापों में विद्यालय की भागीदारी होती है। यही कारण है कि विद्यालयों के लिए पाठ्यवस्तु इतना लचीला बनाया जाता है कि उसमें समाज के विभिन्न समुदायों की विशेषताएँ स्पष्ट रूप से दिखाई पड़ती हैं। पर्यावरण को स्वच्छ रखने की शिक्षा देने के लिए आवश्यक है कि विद्यालय परिसर को स्वच्छ रखा जाए। जल संरक्षण की शिक्षा देने के लिए आवश्यक है कि विद्यालय परिसर में भी इनके संरक्षण के नियमों का पालन होता हो। इस तरह समुदाय की वास्तविकताओं को प्रायोगिक रूप से विद्यालय परिसर में प्रयोग कर उसे 8 अधिगम अनुभवों में रूपान्तरित किया जा सकता है। एक समुदाय में कितने प्रकार के लोग रहते हैं?

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