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BIOLOGY
सृष्टि की उत्पत्ति की बिगबैंग अवधारणा क्...

सृष्टि की उत्पत्ति की बिगबैंग अवधारणा क्या है? भारतीय अवधारणा तथा इसमें प्रमुख अन्तर क्या है?

लिखित उत्तर

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सृष्टि की उत्पत्ति की बिगबैंग अवधारणाज ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति एक अत्यन्त सघन व अत्यन्त गर्म पिण्ड से 13.8 - अरब वर्ष पहले महाविस्फोट के कारण हुई है। जिस प्रकार कोई विस्फोट ना होने पर सम्बन्धित वस्तु के टुकड़े, दूर-दूर तक फैल जाते हैं, ठीक उसी द प्रकार ब्रह्माण्ड के भाग भी अभी भी फैलते हुए एक दूसरे से दूर जा रहे हैं। अवधारणा के पक्ष में विज्ञान के प्रमाण
(1) ब्रह्माण्ड में हल्के तत्वों की अधिकता
(2) अन्तरिक्ष में सूक्ष्म विकिरणों की उपस्थिति
(3) महाकाय संरचनाओं की उपस्थिति
(4) हब्बल के नियम को समझाने में सफलता |
भारतीय अवधारणा एवं बिगबैंग अवधारणा में अन्तर
स्वामी विवेकानन्द के शब्दों में विज्ञान सभी जगह, सभी में उपस्थित भारहीन चेतना के अस्तित्व को स्वीकारने की ओर बढ़ रहा है।
हिंग्स बोसोन कणों की चर्चा के अन्तर्गत भौतिकशास्त्री विजयकुमार पाण्डे के अनुसार भौतिक विज्ञान अज्ञात को ज्ञात की परिधि में लाता है, T लेकिन सृष्टि का रहस्य अज्ञात की परिधि में नहीं अज्ञेय के विस्तार में होता । है। ईश्वर को अनुभूतिपरक आत्मबोध से ही पाया जा सकता है।
भारत में जैनधर्म में सृष्टि सृजन के प्रकृतिवादी सिद्धान्त को स्थान दिया है। सृष्टि को कभी नष्ट नहीं होने वाली माना है। जैन दर्शन के अनुसार । यौगिक सदैव से अस्तित्व में है और भविष्य में भी अस्तित्व में रहेंगे। ये यौगिक प्रकृति की कानूनों के अधीन अपनी ही ऊर्जा प्रक्रियाओं से चलते रहते है। ये यौगिक शाश्वत हैं। ईश्वर या अन्य शक्ति ने इन्हें नहीं बनाया।
बिगबैंग अवधारणा के अनुसार चेतना अर्थात् ईश्वर का अस्तित्व स्वीकार्य नहीं है। केवल भौतिक साधनों की सहायता से सृष्टि के सभी रहस्य जान लिये जायेंगे। ब्रह्माण्ड के फैलने की गति बढ़ रही है और यह निरन्तर फैलते हुए ठण्डा होकर भविष्य में जम जायेगा।
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