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Class 11
BIOLOGY
रक्त के संगठित पदार्थों के अवयवों का वर्...

रक्त के संगठित पदार्थों के अवयवों का वर्णन करें तथा प्रत्येक अवयव के एक प्रमुख कार्य के बारे में लिखें |

लिखित उत्तर

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रक्त के संगठन को दो मुख्य भागों में विभेदित किया जा सकता है -
A. प्लाज्मा - यह रक्त का आधात्री पदार्थ है | यह कुल रक्त का `55-60%` भाग बनाता है | इसमें जल ( 90% ) कार्बनिक पदार्थ ( 4.5% ) व अकार्बनिक पदार्थ 0.9% होते हैं | यह अनेक पदार्थों के संवहन का कार्य करता है |
B. रक्त कणिकाएँ - रक्त कणिकाएँ कुल रक्त का 40% से 45% भाग बनाती है | ये मुख्यत : तीन प्रकार की होती है |
( i ) लाल रक्त कणिकाएँ ( RBC) -RBC वृत्ताकार व उभयावताल होती है | इनका लाल रंग हीमोग्लोबिन नामक श्वसन वर्णक के कारण होता है | व्यस्क पुरुष में इनकी संख्या 50-55 लाख/घन मि.मी. होती है | मनुष्य में इनका जीवन काल 120 दिन या 4 माह होता है | मुख्य कार्य - ऑक्सीजन का परिवहन करना |
(ii ) श्वेत रक्त कणिकाएँ ( W.B.C.) - ये रंगहीन व केन्द्रक युक्त होती है | इनका जीवन काल औसतलन 5-10 दिन होता है | कोशिका द्रव्य में कणिकाओं की उपस्थिति के आधार पर WBC दो प्रकार की होती है |
( a ) कणिकामय श्वेताणु - इनके कोशिकाद्रव्य में सूक्ष्म कण पाए जाते हैं | इन्हें अभिरंजन के आधार पर न्यूट्रोफिल, बेसोफिल व इओसिनोफिल ( एसिडोफिल ) में विभेदित किया जा सकता है | न्यूट्रोफिल भक्षकाणु की तरह कार्य करती है | बेसोफिल द्वारा हिस्टामिन, हिपेरिन व सिरेटोनिन का स्रावण होता है | एसिडोफिल एन्टीहिस्टामिनिक होती है | इसलिए एलर्जी के समय इनकी संख्या बढ़ जाती है |
( b ) कणिका रहित श्वेताणु - इनके कोशिका द्रव्य में कणिकाएँ नहीं पायी जाती है | ये मुख्यतः मोनोसाइट व लिम्फोसाइट प्रकार की होती है | मोनोसाइट भक्षणकारी होती है तथा लिम्फोसाइट प्रतिरक्षी बनाने का कार्य करती है |
(ii) प्लेटलेट्स या पट्टिकानू या बिम्बाणु - ये अनियमित आकृति की व केन्द्रक रहित होती है | इनका जीवनकाल 7-10 दिन होता है | ये रक्त का थक्का बनाने में सहायक होती है |
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