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कोई व्यक्ति किसी मासिक वेतन पर नौकरी पर ...

कोई व्यक्ति किसी मासिक वेतन पर नौकरी पर लग जाता है। उसे नियत वार्षिक वृद्धि भी मिलती है। यदि तीन वर्ष नौकरी करने के बाद उसका मासिक वेतन 1000 रु और आठ वर्ष नौकरी करने पर वेतन 1300 रु होता है तो उस व्यक्ति का प्रारंभिक मासिक वेतन और वार्षिक वृद्धि ज्ञात करे।

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निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के सही विकल्प चुनिये फ्रांस के महान योद्धा नेपोलियन बोनापार्ट का मानना था कि 'असम्भव' शब्द आत्मविश्वास से भरे मनुष्यों के शब्दकोष में नहीं, अपितु मूखों व कायरों के शब्दकोष में पाया जाता है जो व्यक्ति कुछ पाना, कुछ कर दिखाना चाहते हैं और विपरीत परिस्थितियों को पलटकर अपने अनुरूप करना चाहते हैं, उन्हें सर्वप्रथम अपने आप पर भरोसा करना सीखना होगा, अन्यथा सारी योग्यता और मेहनत निरर्थक साबित हो सकता है। आत्मविश्वास सफलता की वह चाबी है, जिससे आप अपने उज्जवल भविष्य का दरवाजा आसानी से खोल सकते हैं। आत्मविश्वास से भरा व्यक्ति अपनी क्षमता पहचान सकता है और उसके अनुरूप जीवन के लिए लक्ष्य निर्धारित कर यथोचित उद्यम द्वारा उसे हासिल कर सकता है, कहते हैं- 'मन के हारे हार हैं, मन के जीते जीत' स्वयं पर भरोसा हो, तो व्यक्ति अपनी योग्यता, सही तैयारी एवं अपेक्षित प्रयत्न के सहारे लक्ष्य तक पहुंच जाता है। पर आत्मविश्वास की कमी सभी उद्यमों को असफल बना सकती है। आत्मविश्वास व्यक्ति को दुविधा और अनिश्चय की मनःस्थिति से निकाल कर उसे दृढ़ विश्वास और दृढ़ निश्चय की मनःस्थिति में पहुंचाता है लेकिन साथ में यह सावधानी भी बेहद जरूरी है कि आत्मविश्वास की कमी से मुक्त होकर कार्य करना और उसे निरन्तर बनाए रखना इस गीत 'हम होगें कामयाब' की अटूट आस्था में निहित है। इसी विश्वास के साथ कोई भी आत्मविश्वास प्राप्त करने की यात्रा प्रारम्भ कर सकता है। आत्मविश्वास प्राप्त करने के लिए आवश्यक है

निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के सही विकल्प चुनिये फ्रांस के महान योद्धा नेपोलियन बोनापार्ट का मानना था कि 'असम्भव' शब्द आत्मविश्वास से भरे मनुष्यों के शब्दकोष में नहीं, अपितु मूखों व कायरों के शब्दकोष में पाया जाता है जो व्यक्ति कुछ पाना, कुछ कर दिखाना चाहते हैं और विपरीत परिस्थितियों को पलटकर अपने अनुरूप करना चाहते हैं, उन्हें सर्वप्रथम अपने आप पर भरोसा करना सीखना होगा, अन्यथा सारी योग्यता और मेहनत निरर्थक साबित हो सकता है। आत्मविश्वास सफलता की वह चाबी है, जिससे आप अपने उज्जवल भविष्य का दरवाजा आसानी से खोल सकते हैं। आत्मविश्वास से भरा व्यक्ति अपनी क्षमता पहचान सकता है और उसके अनुरूप जीवन के लिए लक्ष्य निर्धारित कर यथोचित उद्यम द्वारा उसे हासिल कर सकता है, कहते हैं- 'मन के हारे हार हैं, मन के जीते जीत' स्वयं पर भरोसा हो, तो व्यक्ति अपनी योग्यता, सही तैयारी एवं अपेक्षित प्रयत्न के सहारे लक्ष्य तक पहुंच जाता है। पर आत्मविश्वास की कमी सभी उद्यमों को असफल बना सकती है। आत्मविश्वास व्यक्ति को दुविधा और अनिश्चय की मनःस्थिति से निकाल कर उसे दृढ़ विश्वास और दृढ़ निश्चय की मनःस्थिति में पहुंचाता है लेकिन साथ में यह सावधानी भी बेहद जरूरी है कि आत्मविश्वास की कमी से मुक्त होकर कार्य करना और उसे निरन्तर बनाए रखना इस गीत 'हम होगें कामयाब' की अटूट आस्था में निहित है। इसी विश्वास के साथ कोई भी आत्मविश्वास प्राप्त करने की यात्रा प्रारम्भ कर सकता है। कुछ पाने तथा कुछ दिखाने के लिए व्यक्ति को सबसे पहले

निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के सही विकल्प चुनिये फ्रांस के महान योद्धा नेपोलियन बोनापार्ट का मानना था कि 'असम्भव' शब्द आत्मविश्वास से भरे मनुष्यों के शब्दकोष में नहीं, अपितु मूखों व कायरों के शब्दकोष में पाया जाता है जो व्यक्ति कुछ पाना, कुछ कर दिखाना चाहते हैं और विपरीत परिस्थितियों को पलटकर अपने अनुरूप करना चाहते हैं, उन्हें सर्वप्रथम अपने आप पर भरोसा करना सीखना होगा, अन्यथा सारी योग्यता और मेहनत निरर्थक साबित हो सकता है। आत्मविश्वास सफलता की वह चाबी है, जिससे आप अपने उज्जवल भविष्य का दरवाजा आसानी से खोल सकते हैं। आत्मविश्वास से भरा व्यक्ति अपनी क्षमता पहचान सकता है और उसके अनुरूप जीवन के लिए लक्ष्य निर्धारित कर यथोचित उद्यम द्वारा उसे हासिल कर सकता है, कहते हैं- 'मन के हारे हार हैं, मन के जीते जीत' स्वयं पर भरोसा हो, तो व्यक्ति अपनी योग्यता, सही तैयारी एवं अपेक्षित प्रयत्न के सहारे लक्ष्य तक पहुंच जाता है। पर आत्मविश्वास की कमी सभी उद्यमों को असफल बना सकती है। आत्मविश्वास व्यक्ति को दुविधा और अनिश्चय की मनःस्थिति से निकाल कर उसे दृढ़ विश्वास और दृढ़ निश्चय की मनःस्थिति में पहुंचाता है लेकिन साथ में यह सावधानी भी बेहद जरूरी है कि आत्मविश्वास की कमी से मुक्त होकर कार्य करना और उसे निरन्तर बनाए रखना इस गीत 'हम होगें कामयाब' की अटूट आस्था में निहित है। इसी विश्वास के साथ कोई भी आत्मविश्वास प्राप्त करने की यात्रा प्रारम्भ कर सकता है। सफलता का मूल मंत्र क्या है

एक संस्कृत व्यक्ति किसी चीज़ की खोज करता है, किन्तु उसकी संतान को वह अपने पूर्वजों से अनायास प्राप्त हो जाती है। जिस व्यक्ति की बुद्धि ने अथवा उसके विवेक ने किसी भी नए तथ्य का दर्शन किया, वह व्यक्ति ही वास्तविक संस्कृत व्यक्ति है और उसकी संतान जिसे अपने पूर्वज से वह वस्तु अनायास ही प्राप्त हो गई है, वह अपने पूर्वज की भांति सभ्य भले ही बन जाए, संस्कृत नहीं कहला सकती। एक आधुनिक उदाहरण लें। न्यूटन ने गुरुत्वाकर्षण के सिद्धांत का आविष्कार किया। वह संस्कृत मानव था। आज के युग का भौतिक विज्ञान का विद्यार्थी न्यूटन के गुरुत्वाकर्षण से तो परिचित है ही, लेकिन उसके साथ उसे और भी अनेक बातों का ज्ञान प्राप्त है, जिनसे शायद न्यूटन अपरिचित रहा। ऐसा होने पर भी हम आज के भौतिक विज्ञान के विद्यार्थी को न्यूटन की अपेक्षा अधिक सभ्य भले ही कह सकें, पर न्यूटन जितना संस्कृत नही कह सकते। वास्तविक संस्कृत व्यक्ति वह है जो

एक संस्कृत व्यक्ति किसी चीज़ की खोज करता है, किन्तु उसकी संतान को वह अपने पूर्वजों से अनायास प्राप्त हो जाती है। जिस व्यक्ति की बुद्धि ने अथवा उसके विवेक ने किसी भी नए तथ्य का दर्शन किया, वह व्यक्ति ही वास्तविक संस्कृत व्यक्ति है और उसकी संतान जिसे अपने पूर्वज से वह वस्तु अनायास ही प्राप्त हो गई है, वह अपने पूर्वज की भांति सभ्य भले ही बन जाए, संस्कृत नहीं कहला सकती। एक आधुनिक उदाहरण लें। न्यूटन ने गुरुत्वाकर्षण के सिद्धांत का आविष्कार किया। वह संस्कृत मानव था। आज के युग का भौतिक विज्ञान का विद्यार्थी न्यूटन के गुरुत्वाकर्षण से तो परिचित है ही, लेकिन उसके साथ उसे और भी अनेक बातों का ज्ञान प्राप्त है, जिनसे शायद न्यूटन अपरिचित रहा। ऐसा होने पर भी हम आज के भौतिक विज्ञान के विद्यार्थी को न्यूटन की अपेक्षा अधिक सभ्य भले ही कह सकें, पर न्यूटन जितना संस्कृत नही कह सकते। सभ्य व्यक्ति वह है जो

निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के सही विकल्प चुनिये फ्रांस के महान योद्धा नेपोलियन बोनापार्ट का मानना था कि 'असम्भव' शब्द आत्मविश्वास से भरे मनुष्यों के शब्दकोष में नहीं, अपितु मूखों व कायरों के शब्दकोष में पाया जाता है जो व्यक्ति कुछ पाना, कुछ कर दिखाना चाहते हैं और विपरीत परिस्थितियों को पलटकर अपने अनुरूप करना चाहते हैं, उन्हें सर्वप्रथम अपने आप पर भरोसा करना सीखना होगा, अन्यथा सारी योग्यता और मेहनत निरर्थक साबित हो सकता है। आत्मविश्वास सफलता की वह चाबी है, जिससे आप अपने उज्जवल भविष्य का दरवाजा आसानी से खोल सकते हैं। आत्मविश्वास से भरा व्यक्ति अपनी क्षमता पहचान सकता है और उसके अनुरूप जीवन के लिए लक्ष्य निर्धारित कर यथोचित उद्यम द्वारा उसे हासिल कर सकता है, कहते हैं- 'मन के हारे हार हैं, मन के जीते जीत' स्वयं पर भरोसा हो, तो व्यक्ति अपनी योग्यता, सही तैयारी एवं अपेक्षित प्रयत्न के सहारे लक्ष्य तक पहुंच जाता है। पर आत्मविश्वास की कमी सभी उद्यमों को असफल बना सकती है। आत्मविश्वास व्यक्ति को दुविधा और अनिश्चय की मनःस्थिति से निकाल कर उसे दृढ़ विश्वास और दृढ़ निश्चय की मनःस्थिति में पहुंचाता है लेकिन साथ में यह सावधानी भी बेहद जरूरी है कि आत्मविश्वास की कमी से मुक्त होकर कार्य करना और उसे निरन्तर बनाए रखना इस गीत 'हम होगें कामयाब' की अटूट आस्था में निहित है। इसी विश्वास के साथ कोई भी आत्मविश्वास प्राप्त करने की यात्रा प्रारम्भ कर सकता है। नेपोलियन बोनापार्ट ने - 'असंभव' शब्द के बारे में कहा था

एक संस्कृत व्यक्ति किसी नई चीज की खोज करता है, किन्तु उसकी सन्तान को वह अपने पूर्वज से अनायास प्राप्त हो जाती है। जिस व्यक्ति की बुद्धि ने अथवा उसके विवेक ने किसी भी नए तथ्य का दर्शन किया, वह व्यक्ति ही वास्तविक संस्कृत व्यक्ति है और उसकी सन्तान जिसे अपने पूर्वज से वह वस्तु अनायास ही प्राप्त हो गई है, वह अपने पूर्वज की भाँति सभ्य भले ही बन जाए, संस्कृत नहीं कहला सकता। एक आधुनिक उदाहरण लें। न्यूटन ने गुरुत्वाकर्षण के सिद्धान्त का आविष्कार किया। वह संस्कृत मानव था। आज के युग का भौतिक विज्ञान क विद्यार्थी न्यूटन के गुरुत्वाकर्षण से तो परिचित है ही, लेकिन उसके साथ उसे और भी अनेक बातों का ज्ञान प्राप्त है, जिनसे शायद न्यूटन अपरिचित ही रहा। ऐसा होने पर भी हम आज के भौतिक विज्ञान के विद्यार्थी को न्यूटन की अपेक्षा अधिक सभ्य भले ही कह सकें, पर न्यूटन जितना संस्कृत नहीं कह सकते। सभ्य व्यक्ति वह है जो

एक संस्कृत व्यक्ति किसी नई चीज की खोज करता है, किन्तु उसकी सन्तान को वह अपने पूर्वज से अनायास प्राप्त हो जाती है। जिस व्यक्ति की बुद्धि ने अथवा उसके विवेक ने किसी भी नए तथ्य का दर्शन किया, वह व्यक्ति ही वास्तविक संस्कृत व्यक्ति है और उसकी सन्तान जिसे अपने पूर्वज से वह वस्तु अनायास ही प्राप्त हो गई है, वह अपने पूर्वज की भाँति सभ्य भले ही बन जाए, संस्कृत नहीं कहला सकता। एक आधुनिक उदाहरण लें। न्यूटन ने गुरुत्वाकर्षण के सिद्धान्त का आविष्कार किया। वह संस्कृत मानव था। आज के युग का भौतिक विज्ञान क विद्यार्थी न्यूटन के गुरुत्वाकर्षण से तो परिचित है ही, लेकिन उसके साथ उसे और भी अनेक बातों का ज्ञान प्राप्त है, जिनसे शायद न्यूटन अपरिचित ही रहा। ऐसा होने पर भी हम आज के भौतिक विज्ञान के विद्यार्थी को न्यूटन की अपेक्षा अधिक सभ्य भले ही कह सकें, पर न्यूटन जितना संस्कृत नहीं कह सकते। वास्तविक संस्कृत व्यक्ति वह है जो

एक संस्कृत व्यक्ति किसी चीज़ की खोज करता है, किन्तु उसकी संतान को वह अपने पूर्वजों से अनायास प्राप्त हो जाती है। जिस व्यक्ति की बुद्धि ने अथवा उसके विवेक ने किसी भी नए तथ्य का दर्शन किया, वह व्यक्ति ही वास्तविक संस्कृत व्यक्ति है और उसकी संतान जिसे अपने पूर्वज से वह वस्तु अनायास ही प्राप्त हो गई है, वह अपने पूर्वज की भांति सभ्य भले ही बन जाए, संस्कृत नहीं कहला सकती। एक आधुनिक उदाहरण लें। न्यूटन ने गुरुत्वाकर्षण के सिद्धांत का आविष्कार किया। वह संस्कृत मानव था। आज के युग का भौतिक विज्ञान का विद्यार्थी न्यूटन के गुरुत्वाकर्षण से तो परिचित है ही, लेकिन उसके साथ उसे और भी अनेक बातों का ज्ञान प्राप्त है, जिनसे शायद न्यूटन अपरिचित रहा। ऐसा होने पर भी हम आज के भौतिक विज्ञान के विद्यार्थी को न्यूटन की अपेक्षा अधिक सभ्य भले ही कह सकें, पर न्यूटन जितना संस्कृत नही कह सकते। "संस्कृत' का अर्थ है