सरल सूक्ष्मदर्शी की आवर्धन-क्षमता, लेंस की फोकस-दूरी के व्युक्रमानुपाती (inversely proportional) होती है | तब हम कम-से-कम फोकस-दूरी वाले उत्तल लेंस का उपयोग कर अधिक-से-अधिक आवर्धन-क्षमता क्यों नहीं प्राप्त कर सकते है ?
सरल सूक्ष्मदर्शी की आवर्धन-क्षमता, लेंस की फोकस-दूरी के व्युक्रमानुपाती (inversely proportional) होती है | तब हम कम-से-कम फोकस-दूरी वाले उत्तल लेंस का उपयोग कर अधिक-से-अधिक आवर्धन-क्षमता क्यों नहीं प्राप्त कर सकते है ?
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निम्न मे से किस जीव को देखने की क्षमता हमसे चार गुना अधिक होती है
निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के सही विकल्प चुनिये फ्रांस के महान योद्धा नेपोलियन बोनापार्ट का मानना था कि 'असम्भव' शब्द आत्मविश्वास से भरे मनुष्यों के शब्दकोष में नहीं, अपितु मूखों व कायरों के शब्दकोष में पाया जाता है जो व्यक्ति कुछ पाना, कुछ कर दिखाना चाहते हैं और विपरीत परिस्थितियों को पलटकर अपने अनुरूप करना चाहते हैं, उन्हें सर्वप्रथम अपने आप पर भरोसा करना सीखना होगा, अन्यथा सारी योग्यता और मेहनत निरर्थक साबित हो सकता है। आत्मविश्वास सफलता की वह चाबी है, जिससे आप अपने उज्जवल भविष्य का दरवाजा आसानी से खोल सकते हैं। आत्मविश्वास से भरा व्यक्ति अपनी क्षमता पहचान सकता है और उसके अनुरूप जीवन के लिए लक्ष्य निर्धारित कर यथोचित उद्यम द्वारा उसे हासिल कर सकता है, कहते हैं- 'मन के हारे हार हैं, मन के जीते जीत' स्वयं पर भरोसा हो, तो व्यक्ति अपनी योग्यता, सही तैयारी एवं अपेक्षित प्रयत्न के सहारे लक्ष्य तक पहुंच जाता है। पर आत्मविश्वास की कमी सभी उद्यमों को असफल बना सकती है। आत्मविश्वास व्यक्ति को दुविधा और अनिश्चय की मनःस्थिति से निकाल कर उसे दृढ़ विश्वास और दृढ़ निश्चय की मनःस्थिति में पहुंचाता है लेकिन साथ में यह सावधानी भी बेहद जरूरी है कि आत्मविश्वास की कमी से मुक्त होकर कार्य करना और उसे निरन्तर बनाए रखना इस गीत 'हम होगें कामयाब' की अटूट आस्था में निहित है। इसी विश्वास के साथ कोई भी आत्मविश्वास प्राप्त करने की यात्रा प्रारम्भ कर सकता है। आत्मविश्वास प्राप्त करने के लिए आवश्यक है
निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के सही विकल्प चुनिये फ्रांस के महान योद्धा नेपोलियन बोनापार्ट का मानना था कि 'असम्भव' शब्द आत्मविश्वास से भरे मनुष्यों के शब्दकोष में नहीं, अपितु मूखों व कायरों के शब्दकोष में पाया जाता है जो व्यक्ति कुछ पाना, कुछ कर दिखाना चाहते हैं और विपरीत परिस्थितियों को पलटकर अपने अनुरूप करना चाहते हैं, उन्हें सर्वप्रथम अपने आप पर भरोसा करना सीखना होगा, अन्यथा सारी योग्यता और मेहनत निरर्थक साबित हो सकता है। आत्मविश्वास सफलता की वह चाबी है, जिससे आप अपने उज्जवल भविष्य का दरवाजा आसानी से खोल सकते हैं। आत्मविश्वास से भरा व्यक्ति अपनी क्षमता पहचान सकता है और उसके अनुरूप जीवन के लिए लक्ष्य निर्धारित कर यथोचित उद्यम द्वारा उसे हासिल कर सकता है, कहते हैं- 'मन के हारे हार हैं, मन के जीते जीत' स्वयं पर भरोसा हो, तो व्यक्ति अपनी योग्यता, सही तैयारी एवं अपेक्षित प्रयत्न के सहारे लक्ष्य तक पहुंच जाता है। पर आत्मविश्वास की कमी सभी उद्यमों को असफल बना सकती है। आत्मविश्वास व्यक्ति को दुविधा और अनिश्चय की मनःस्थिति से निकाल कर उसे दृढ़ विश्वास और दृढ़ निश्चय की मनःस्थिति में पहुंचाता है लेकिन साथ में यह सावधानी भी बेहद जरूरी है कि आत्मविश्वास की कमी से मुक्त होकर कार्य करना और उसे निरन्तर बनाए रखना इस गीत 'हम होगें कामयाब' की अटूट आस्था में निहित है। इसी विश्वास के साथ कोई भी आत्मविश्वास प्राप्त करने की यात्रा प्रारम्भ कर सकता है। सफलता का मूल मंत्र क्या है
निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के सही विकल्प चुनिये फ्रांस के महान योद्धा नेपोलियन बोनापार्ट का मानना था कि 'असम्भव' शब्द आत्मविश्वास से भरे मनुष्यों के शब्दकोष में नहीं, अपितु मूखों व कायरों के शब्दकोष में पाया जाता है जो व्यक्ति कुछ पाना, कुछ कर दिखाना चाहते हैं और विपरीत परिस्थितियों को पलटकर अपने अनुरूप करना चाहते हैं, उन्हें सर्वप्रथम अपने आप पर भरोसा करना सीखना होगा, अन्यथा सारी योग्यता और मेहनत निरर्थक साबित हो सकता है। आत्मविश्वास सफलता की वह चाबी है, जिससे आप अपने उज्जवल भविष्य का दरवाजा आसानी से खोल सकते हैं। आत्मविश्वास से भरा व्यक्ति अपनी क्षमता पहचान सकता है और उसके अनुरूप जीवन के लिए लक्ष्य निर्धारित कर यथोचित उद्यम द्वारा उसे हासिल कर सकता है, कहते हैं- 'मन के हारे हार हैं, मन के जीते जीत' स्वयं पर भरोसा हो, तो व्यक्ति अपनी योग्यता, सही तैयारी एवं अपेक्षित प्रयत्न के सहारे लक्ष्य तक पहुंच जाता है। पर आत्मविश्वास की कमी सभी उद्यमों को असफल बना सकती है। आत्मविश्वास व्यक्ति को दुविधा और अनिश्चय की मनःस्थिति से निकाल कर उसे दृढ़ विश्वास और दृढ़ निश्चय की मनःस्थिति में पहुंचाता है लेकिन साथ में यह सावधानी भी बेहद जरूरी है कि आत्मविश्वास की कमी से मुक्त होकर कार्य करना और उसे निरन्तर बनाए रखना इस गीत 'हम होगें कामयाब' की अटूट आस्था में निहित है। इसी विश्वास के साथ कोई भी आत्मविश्वास प्राप्त करने की यात्रा प्रारम्भ कर सकता है। नेपोलियन बोनापार्ट ने - 'असंभव' शब्द के बारे में कहा था
निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के सही विकल्प चुनिये फ्रांस के महान योद्धा नेपोलियन बोनापार्ट का मानना था कि 'असम्भव' शब्द आत्मविश्वास से भरे मनुष्यों के शब्दकोष में नहीं, अपितु मूखों व कायरों के शब्दकोष में पाया जाता है जो व्यक्ति कुछ पाना, कुछ कर दिखाना चाहते हैं और विपरीत परिस्थितियों को पलटकर अपने अनुरूप करना चाहते हैं, उन्हें सर्वप्रथम अपने आप पर भरोसा करना सीखना होगा, अन्यथा सारी योग्यता और मेहनत निरर्थक साबित हो सकता है। आत्मविश्वास सफलता की वह चाबी है, जिससे आप अपने उज्जवल भविष्य का दरवाजा आसानी से खोल सकते हैं। आत्मविश्वास से भरा व्यक्ति अपनी क्षमता पहचान सकता है और उसके अनुरूप जीवन के लिए लक्ष्य निर्धारित कर यथोचित उद्यम द्वारा उसे हासिल कर सकता है, कहते हैं- 'मन के हारे हार हैं, मन के जीते जीत' स्वयं पर भरोसा हो, तो व्यक्ति अपनी योग्यता, सही तैयारी एवं अपेक्षित प्रयत्न के सहारे लक्ष्य तक पहुंच जाता है। पर आत्मविश्वास की कमी सभी उद्यमों को असफल बना सकती है। आत्मविश्वास व्यक्ति को दुविधा और अनिश्चय की मनःस्थिति से निकाल कर उसे दृढ़ विश्वास और दृढ़ निश्चय की मनःस्थिति में पहुंचाता है लेकिन साथ में यह सावधानी भी बेहद जरूरी है कि आत्मविश्वास की कमी से मुक्त होकर कार्य करना और उसे निरन्तर बनाए रखना इस गीत 'हम होगें कामयाब' की अटूट आस्था में निहित है। इसी विश्वास के साथ कोई भी आत्मविश्वास प्राप्त करने की यात्रा प्रारम्भ कर सकता है। कुछ पाने तथा कुछ दिखाने के लिए व्यक्ति को सबसे पहले
गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित में सबसे उचित विकल्प को चुनिए। भारत की शस्यश्यामला भूमि में जो निसर्ग-सिद्ध सुषमा है, उस पर भारतीय कवियों का चिरकाल से अनुराग रहा है। यों तो प्रकृति की साधारण वस्तुएँभी मनुष्यमात्र के लिए आकर्षक होती हैं, परन्तु उसकी सुन्दरतम विभूतियों __ में मानव वृत्तियाँ विशेष प्रकार से रमती हैं। अरब के कवि मरुस्थल में बहते हुए किसी साधारण से झरने अथवा ताड़ के लंबे-लंबे पेड़ों में ही सौन्दर्य का अनुभव कर लेते हैं तथा ऊँटों की चाल में ही सुन्दरता की कल्पना कर लेते हैं, परन्तु जिन्होंने भारत की हिमाच्छादित शैलमाला पर संध्या की सुनहली किरणों की सुषमा देखी हैं अथवा जिन्हें घनी अमराइयों की छाया में कल-कल ध्वनि से बहती हुई निर्झरिणी तथा उसकी समीपवर्तिनी लताओं की वसन्तश्री देखने का अवसर मिला है, साथ ही जो यहाँ के विशालकाय हाथियों की मतवाली चाल देख चुके हैं, उन्हें अरब की उपर्युक्त वस्तुओं में सौन्दर्य तो क्या, उलटे नीरसता, शुष्कता और भद्दापन ही मिलेगा। भारतीय कवियों को प्रकृति की सुन्दर गोद में क्रीड़ा करने का सौभाग्य प्राप्त है। ये हरे-हरे उपवनों तथा सुन्दर जलाशयों के तटों पर विचरण करते तथा प्रकृति के नाना मनोहारी रूपों से परिचित होते हैं। यही कारण है कि भारतीय कवि प्रकृति के संश्लिष्ट तथा सजीव चित्र जितनी मार्मिकता, उत्तमता तथा अधिकता से अंकित कर सकते हैं तथा उपमा-उत्प्रेक्षाओं के लिए जैसी सुन्दर वस्तुओं का उपयोग कर सकते हैं, वैसा रूखे-सूखे देश के निवासी कवि नहीं कर सकते। यह भारत-भूमि की ही विशेषता है कि यहाँ के कवियों का प्राकृतिक-वर्णन तथा तत्संभव सौन्दर्य-ज्ञान उच्च कोटि का होता है। प्रकृति के रम्य रूपों में तल्लीनता की जो अनुभूति होती है उसका उपयोग कविगण कभी-कभी रहस्यमयी भावनाओं के संचार में भी करते हैं। यह अखंड भूमण्डल तथा असंख्य ग्रह, उपग्रह, रवि-शशि अथवा जल, वायु, अग्नि, आकाश कितने रहस्यमय तथा अज्ञेय हैं? इनके सृष्टि-संचालन आदि के सम्बन्ध में दार्शनिकों अथवा वैज्ञानिकों ने इन तत्वों का निरूपण किया है। भारतीय कवियों को किसके गोद में क्रीड़ा करने का सौभाग्य प्राप्त है?
निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के सही विकल्प चुनिये हम में से बहुत से लोगों के दिमाग में जो तरह-तरह के मुर्खतापूर्वक विचार आते हैं उन्हें दूर रखने के लिए किसी अत्यन्त कुशाग्र बुद्धि की आवश्यकता नहीं है। यदि हम कुछ साधारण से नियमों का पालन करें तो सभी गलतियों से तो नहीं, लेकिन मूर्खतापूर्वक गलतियाँ करने से जरूर बच सकते हैं। यदि कोई मामला निरीक्षण करने से सुलझ सकता है तो हमें स्वयं निरीक्षण करना चाहिए। अरस्तु का यह सोचना था कि पुरूषों की तुलना में महिलाओं के दाँतों की संख्या कम होती है। इस गलती से बचने का एक साधारण-सा तरीका था कि वे अपनी पत्नी के दाँत गिन लेते। यह सोचना कि हम जानते हैं, जबकि वास्तव में हम नहीं जानते, एक बुरी आदत है जो हम में से बहुतों को होती है। उपरोक्त गद्यांश का भावार्थ है कि कुछ साधारण से नियमों का पालन करने से
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