Home
Class 9
PHYSICS
एक मनुष्य नदी की धारा के विपरीत तैर रहा ...

एक मनुष्य नदी की धारा के विपरीत तैर रहा है। किनार पर खड़े व्यक्ति को मनुष्य स्थिर दिखाई देता है। समझाइये कि मनुष्य कार्य कर रहा है अथवा नहीं?

Promotional Banner

Similar Questions

Explore conceptually related problems

सीखने के लिए मनुष्य सर्वाधिक किस विधि को अपनाता है?

गद्यांश को पढ़कर प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प चुनिए। आसमान में मुक्का मारना कोई बुद्धिमानी का काम नहीं समझा जाता। बिना लक्ष्य के तर्क करना भी बुद्धिमानी नहीं है। हमें भली-भाँति समझ लेने की आवश्यकता है, कि हमारा लक्ष्य क्या है? हम जो कुछ प्रयत्न करने जा रहे हैं वह किसके लिए हैं? साहित्य हम किसके लिए रचते हैं, इतिहास और दर्शन क्यों लिखते और पढ़ते हैं? राजनीतिक,आन्दोलन किस महान् उद्देश्य की सिद्धि के लिए करते हैं? मनुष्य ही वह बड़ी चीज़ है जिसके लिए यह सब किया करते हैं। हमारे सब प्रयत्नों का एक लक्ष्य है, मनुष्य वर्तमान दुर्गति के पंक से उद्धार पाए और भविष्य में सुख और शांति से रह सके। यह शास्त्र, ग्रंथ, कला, नृत्य, राजनीति, समाज-सुधार जंजाल-मात्र हैं, जिससे मनुष्य का भला नहीं होता। मनुष्य आज हाहाकार के भीतर त्राहि-त्राहि पुकार रहा है। हमारे राजनीतिक और समाजिक सुधार से अन्न-वस्त्र की समस्या सुलझ सकती है फिर भी मनुष्य सुखी नहीं बनेगा। उसे सिर्फ अन्न-वस्त्र से ही संतोष नहीं होगा। इसके बाद भी उसका मनुष्य बनना बाकी रह जाता है। साहित्य वही काम करता है। मनुष्य नामक प्राणी पशुओं में ही एक विकसित प्रजाति है और यदि मनुष्यता के गुण और मूल्य उसमें नही हैं तो वह मनुष्य नामक पशु ही है, मनुष्य नहीं। भोजन करना, सोना और वंश-वृद्धि जैसे काम प्रकृति के द्वारा तय है, सच्चा मानव बनने के लिए उसे जो दृष्टि चाहिए, उसे पाने में साहित्य सहायक हो सकता है। आसमान में मुक्का मारने से आशय है

गद्यांश को पढ़कर प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प चुनिए। आसमान में मुक्का मारना कोई बुद्धिमानी का काम नहीं समझा जाता। बिना लक्ष्य के तर्क करना भी बुद्धिमानी नहीं है। हमें भली-भाँति समझ लेने की आवश्यकता है, कि हमारा लक्ष्य क्या है? हम जो कुछ प्रयत्न करने जा रहे हैं वह किसके लिए हैं? साहित्य हम किसके लिए रचते हैं, इतिहास और दर्शन क्यों लिखते और पढ़ते हैं? राजनीतिक,आन्दोलन किस महान् उद्देश्य की सिद्धि के लिए करते हैं? मनुष्य ही वह बड़ी चीज़ है जिसके लिए यह सब किया करते हैं। हमारे सब प्रयत्नों का एक लक्ष्य है, मनुष्य वर्तमान दुर्गति के पंक से उद्धार पाए और भविष्य में सुख और शांति से रह सके। यह शास्त्र, ग्रंथ, कला, नृत्य, राजनीति, समाज-सुधार जंजाल-मात्र हैं, जिससे मनुष्य का भला नहीं होता। मनुष्य आज हाहाकार के भीतर त्राहि-त्राहि पुकार रहा है। हमारे राजनीतिक और समाजिक सुधार से अन्न-वस्त्र की समस्या सुलझ सकती है फिर भी मनुष्य सुखी नहीं बनेगा। उसे सिर्फ अन्न-वस्त्र से ही संतोष नहीं होगा। इसके बाद भी उसका मनुष्य बनना बाकी रह जाता है। साहित्य वही काम करता है। मनुष्य नामक प्राणी पशुओं में ही एक विकसित प्रजाति है और यदि मनुष्यता के गुण और मूल्य उसमें नही हैं तो वह मनुष्य नामक पशु ही है, मनुष्य नहीं। भोजन करना, सोना और वंश-वृद्धि जैसे काम प्रकृति के द्वारा तय है, सच्चा मानव बनने के लिए उसे जो दृष्टि चाहिए, उसे पाने में साहित्य सहायक हो सकता है। अनुच्छेद में 'जंजाल' शब्द किस अर्थ में प्रयुक्त हुआ है?

Recommended Questions
  1. एक मनुष्य नदी की धारा के विपरीत तैर रहा है। किनार पर खड़े व्यक्ति को मन...

    Text Solution

    |

  2. वही मनुष्य है की जो मनुष्य के लिए मरे |

    Text Solution

    |

  3. जब व्यक्ति स्वावलंबी होगा, उसमे आत्मनिर्भरता होगी, तो ऐसा कोई कार्य नह...

    Text Solution

    |

  4. जब व्यक्ति स्वावलंबी होगा, उसमे आत्मनिर्भरता होगी, तो ऐसा कोई कार्य नह...

    Text Solution

    |

  5. जब व्यक्ति स्वावलंबी होगा, उसमे आत्मनिर्भरता होगी, तो ऐसा कोई कार्य नह...

    Text Solution

    |

  6. जब व्यक्ति स्वावलंबी होगा, उसमे आत्मनिर्भरता होगी, तो ऐसा कोई कार्य नह...

    Text Solution

    |

  7. जब व्यक्ति स्वावलंबी होगा, उसमे आत्मनिर्भरता होगी, तो ऐसा कोई कार्य नह...

    Text Solution

    |

  8. वे कह रहे थे- “मैं आज मनुष्य को एक घने अंधकार में देख रहा हूँ। उसके भी...

    Text Solution

    |

  9. 'हस्तक्षेप' कविता के आधार पर मनुष्य क्यों मरता है ?

    Text Solution

    |