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Class 12
PHYSICS
किसी प्रेषी ऐंटेना (transmitting antenna...

किसी प्रेषी ऐंटेना (transmitting antenna ) की ऊँचाई 81 m है | यह कितने क्षेत्रफल पर सेवा
प्रदान करेगा जबकि ग्राही ऐंटेना (recceiving antenna ) पृथ्वी के तल (ground leval) में है ?
(पृथ्वी की त्रिज्या = 6400 km )|

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A ladder leaning against a wall makes an angle alpha with the horizontal ground such that tan alpha=3/4 . If the foot of the ladder is 5 m away from the wall, what is the length of the ladder? किसी दीवार पर झुकी हुई एक सीढ़ी क्षेतिज भूमि के साथ कोण alpha इस प्रकार बनाती है कि tan alpha=3/4 है| यदि सीढ़ी का तल दीवार से 5 मीटर दूर है तो सीढ़ी की लंबाई ज्ञात करें |

The speed of a boat in still water is 15 km/h. The speed of the current is 3 km/h. In how much time (in hours) will the boat travel a distance of 54 km upstream and the same distance downstream? स्थिर जल में किसी नाव की चाल 15 किमी/घंटा है | धारा की चाल 3 किमी/घंटा है | यह नाव धारा के प्रतिकूल 54 किमी तथा धारा के अनुकूल इतनी ही दूरी कितने समय (घंटे में ) में तय करेगी ?

The area of a circular ground is approximately equal to 73 1/3 % of the area of a triangular ground with sides 400 m, 420 m and 580 m. What is the circumference ( in m ) of the circular ground ? (pi = 22/7) किसी वृताकार मैदान का क्षेत्रफल, किसी ऐसे त्रिभुजाकार मैदान, जिसकी भुजाएं 400 m, 420 m और 580 m है, के क्षेत्रफल के 73 1/3 % के लगभग बराबर है | वृताकार मैदान की परिधि (m में) कितनी है? (pi = 22/7)

गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प चुनिए। हमारे विशाल देश में हिमालय की अनन्त हिमराशि वाले ग्लेशियरों ने जिन नदियों को जन्म दिया है, उनमें गंगा और यमुना नाम की नदियाँ हमारे जीवन की धमनियों की तरह रही हैं। उनकी गोद में हमारे पूर्वजों ने सभ्यता के प्रांगण में अनेक नए खेल खेले। उनके तटों पर जीवन का जो प्रवाह प्रचलित हुआ. वह आज तक हमारे भूत और भावी जीवन को सींच रहा है। भारत हमारा देश है और हम उसके नागरिक हैं यह एक सच्चाई हमारे रोम-रोम में बिंधी हुई है। नदियों की अन्तर्वेदी में पनपने वाले आदि युग के जीवन पर हम अब जितना अधिक विचार करते हैं हमको अपने विकास और वृद्धि की सनातन जड़ों का पृथ्वी के साथ संबंध उतना ही अधिक घनिष्ठ जान पड़ता है। हमारे धार्मिक पर्यों पर लाखों लोग नदी और जलाशयों के तटों पर एकत्र होते हैं। पृथ्वी के एक-एक जलाशय और सरोवर को भारतीय भावना ने ठीक प्रकार से समझने का प्रयत्न किया, उनके साथ सौहार्द का भाव उत्पन्न किया जो हर एक पीढ़ी के साथ नए रूप में बंधा रहा। किन्तु आज स्थिति बड़ी विचित्र और एक सीमा तक चिन्ताजनक हो गई है। हमारी औद्योगिक क्रांति ने इन्हें प्रदूषित कर विषैला बना दिया है। जीवनदायिनी नदियाँ आज प्राणघातिनी होती जा रही हैं। मिल बैठकर सोचने की आवश्यकता है कि क्या करें कि ये पुनः जीवनदायिनी हों। और उन सोची हुई योजनाओं को अमल में लाने की भी आवश्यकता है। लेखक के अनुसार हमारी सभ्यता का जन्म हुआ है