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Class 9
MATHS
(a) याद कीजिए कि दो वृत्त सर्वांगसम होते...

(a) याद कीजिए कि दो वृत्त सर्वांगसम होते है, यदि उनकी त्रिज्याएँ बराबर हो। सिध्द कीजिए कि सर्वांगसम वर्त्तो कि बराबर जीवाएं उनके केन्द्रो पर बराबर कोण अंतरित करती है।
(b) सिध्द कीजिए कि यदि सर्वांगसम वर्त्तो कि जीवाएं उनके केन्द्रो पर बराबर कोण, अंतरित करे, तो जीवाएं बराबर होती है।

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अभी भी इस बारे में बहुत कम जानकारी है कि आधुनिक कही जाने वाली आज की दुनिया आखिर कैसे संचालित हो रही है। हालाँकि हरेक देश के पास इसकी कोई-न-कोई आधिकारिक व्याख्या ज़रूर है कि वे कैसे और किन सन्दर्भो में आधुनिक हो रहे हैं। लेकिन इस बारे में मेरा कहना है कि आधुनिकता को समझने के लिए जरूरी है कि आप अपने अन्दर झाँक सकें। इससे आपको पता चलेगा कि आधुनिकता की राह पर बढ़ने के लिए समाज को किन चीजों की जरूरत होती है। बेशक, आज हर कोई मॉडर्न होना चाहता है, लेकिन आधुनिकता की राह उतनी स्पष्ट नहीं है, जितनी वह मानी जाती है। इसीलिए मैं यह बात बार-बार कहता हूँ कि पश्चिमी समाज कभी-कभी आधुनिक नहीं रहे। पश्चिम के पास एकमात्र उल्लेखनीय चीज़ है साइन्स, जिसमें उसने तरक्की की लेकिन जिम साइंटिस्टों के बलबूते वहाँ आधुनिकता का परचम लहराया जाता है, खुद वे साइंटिस्ट अपने कल्चर में उलझे रहते हैं। उनका यह कल्चर आधुनिकता का झण्डाबरदार है। यह भी नहीं कहा जा सकता है कि उनके कल्चर पर दूसरी संस्कृतियों और लोकाचारों का असर नहीं हुआ होगा। अगर यह असर हुआ है तो सिर्फ वही आधुनिक क्यों कहा जाए ? 'साइंटिस्टों' शब्द इस ओर संकेत करता है कि

अभी भी इस बारे में बहुत कम जानकारी है कि आधुनिक कही जाने वाली आज की दुनिया आखिर कैसे संचालित हो रही है। हालाँकि हरेक देश के पास इसकी कोई-न-कोई आधिकारिक व्याख्या ज़रूर है कि वे कैसे और किन सन्दर्भो में आधुनिक हो रहे हैं। लेकिन इस बारे में मेरा कहना है कि आधुनिकता को समझने के लिए जरूरी है कि आप अपने अन्दर झाँक सकें। इससे आपको पता चलेगा कि आधुनिकता की राह पर बढ़ने के लिए समाज को किन चीजों की जरूरत होती है। बेशक, आज हर कोई मॉडर्न होना चाहता है, लेकिन आधुनिकता की राह उतनी स्पष्ट नहीं है, जितनी वह मानी जाती है। इसीलिए मैं यह बात बार-बार कहता हूँ कि पश्चिमी समाज कभी-कभी आधुनिक नहीं रहे। पश्चिम के पास एकमात्र उल्लेखनीय चीज़ है साइन्स, जिसमें उसने तरक्की की लेकिन जिम साइंटिस्टों के बलबूते वहाँ आधुनिकता का परचम लहराया जाता है, खुद वे साइंटिस्ट अपने कल्चर में उलझे रहते हैं। उनका यह कल्चर आधुनिकता का झण्डाबरदार है। यह भी नहीं कहा जा सकता है कि उनके कल्चर पर दूसरी संस्कृतियों और लोकाचारों का असर नहीं हुआ होगा। अगर यह असर हुआ है तो सिर्फ वही आधुनिक क्यों कहा जाए ? लेखक ने किस बात की अस्पष्टता की ओर संकेत किया है?

अभी भी इस बारे में बहुत कम जानकारी है कि आधुनिक कही जाने वाली आज की दुनिया आखिर कैसे संचालित हो रही है। हालाँकि हरेक देश के पास इसकी कोई-न-कोई आधिकारिक व्याख्या ज़रूर है कि वे कैसे और किन सन्दर्भो में आधुनिक हो रहे हैं। लेकिन इस बारे में मेरा कहना है कि आधुनिकता को समझने के लिए जरूरी है कि आप अपने अन्दर झाँक सकें। इससे आपको पता चलेगा कि आधुनिकता की राह पर बढ़ने के लिए समाज को किन चीजों की जरूरत होती है। बेशक, आज हर कोई मॉडर्न होना चाहता है, लेकिन आधुनिकता की राह उतनी स्पष्ट नहीं है, जितनी वह मानी जाती है। इसीलिए मैं यह बात बार-बार कहता हूँ कि पश्चिमी समाज कभी-कभी आधुनिक नहीं रहे। पश्चिम के पास एकमात्र उल्लेखनीय चीज़ है साइन्स, जिसमें उसने तरक्की की लेकिन जिम साइंटिस्टों के बलबूते वहाँ आधुनिकता का परचम लहराया जाता है, खुद वे साइंटिस्ट अपने कल्चर में उलझे रहते हैं। उनका यह कल्चर आधुनिकता का झण्डाबरदार है। यह भी नहीं कहा जा सकता है कि उनके कल्चर पर दूसरी संस्कृतियों और लोकाचारों का असर नहीं हुआ होगा। अगर यह असर हुआ है तो सिर्फ वही आधुनिक क्यों कहा जाए ? लेखक के अनुसार आधुनिक होने के लिए क्या जरूरी है?