एक नीली आँखों वाली महिला का विवाह भूरी आँखों वाले ( प्रभावी ) ऐसे पुरुष से होता है, जिसकी माँ नीली आँखों वाली है। इनके अनुमानित बच्चे होंगे -
एक नीली आँखों वाली महिला का विवाह भूरी आँखों वाले ( प्रभावी ) ऐसे पुरुष से होता है, जिसकी माँ नीली आँखों वाली है। इनके अनुमानित बच्चे होंगे -
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दिए गए पद्यांश को ध्यान से पढ़िए और उसके आधार पर पूछे गए प्रश्न का यथोचित उत्तर दीजिए। पद्यांश 8 अन्धकार की गुहा सरीखी उन आँखों से डरता है मन भरा दूर तक उनमें दारुण दैन्य दुःख का नीरव रोदन। वह स्वाधीन किसान रहा अभिमान भरा आँखों में इस का छोड़ उसे मँझधार आज संसार कगार सदृश बह खिसका। लहराते वे खेत दृगों में हुआ बेदखत वह अब जिन से हँसती थी उसके जीवन की हरियाली जिनके तृन-तृन से। आँखों ही में घूमा करता वह उसकी आँखों का तारा कारकुनों की लाठी से जो गया जवानी ही में मारा। बिना दवादर्पन के घरनी स्वरग चली आँखें आती भर देख-रेख के बिना दुधमुँही बिटिया दो दिन बाद गई मर। कवि का मन जिन आँखों से डरता है वे कैसी है?
दिए गए पद्यांश को ध्यान से पढ़िए और उसके आधार पर पूछे गए प्रश्न का यथोचित उत्तर दीजिए। पद्यांश 8 अन्धकार की गुहा सरीखी उन आँखों से डरता है मन भरा दूर तक उनमें दारुण दैन्य दुःख का नीरव रोदन। वह स्वाधीन किसान रहा अभिमान भरा आँखों में इस का छोड़ उसे मँझधार आज संसार कगार सदृश बह खिसका। लहराते वे खेत दृगों में हुआ बेदखत वह अब जिन से हँसती थी उसके जीवन की हरियाली जिनके तृन-तृन से। आँखों ही में घूमा करता वह उसकी आँखों का तारा कारकुनों की लाठी से जो गया जवानी ही में मारा। बिना दवादर्पन के घरनी स्वरग चली आँखें आती भर देख-रेख के बिना दुधमुँही बिटिया दो दिन बाद गई मर। जिन आँखों का वर्णन कवि ने किया है वे किसकी आँखें हैं?
दिए गए पद्यांश को ध्यान से पढ़िए और उसके आधार पर पूछे गए प्रश्न का यथोचित उत्तर दीजिए। पद्यांश 8 अन्धकार की गुहा सरीखी उन आँखों से डरता है मन भरा दूर तक उनमें दारुण दैन्य दुःख का नीरव रोदन। वह स्वाधीन किसान रहा अभिमान भरा आँखों में इस का छोड़ उसे मँझधार आज संसार कगार सदृश बह खिसका। लहराते वे खेत दृगों में हुआ बेदखत वह अब जिन से हँसती थी उसके जीवन की हरियाली जिनके तृन-तृन से। आँखों ही में घूमा करता वह उसकी आँखों का तारा कारकुनों की लाठी से जो गया जवानी ही में मारा। बिना दवादर्पन के घरनी स्वरग चली आँखें आती भर देख-रेख के बिना दुधमुँही बिटिया दो दिन बाद गई मर। किसान की आँखों में अब भी क्या लहराता है?
दिए गए पद्यांश को ध्यान से पढ़िए और उसके आधार पर पूछे गए प्रश्न का यथोचित उत्तर दीजिए। पद्यांश 8 अन्धकार की गुहा सरीखी उन आँखों से डरता है मन भरा दूर तक उनमें दारुण दैन्य दुःख का नीरव रोदन। वह स्वाधीन किसान रहा अभिमान भरा आँखों में इस का छोड़ उसे मँझधार आज संसार कगार सदृश बह खिसका। लहराते वे खेत दृगों में हुआ बेदखत वह अब जिन से हँसती थी उसके जीवन की हरियाली जिनके तृन-तृन से। आँखों ही में घूमा करता वह उसकी आँखों का तारा कारकुनों की लाठी से जो गया जवानी ही में मारा। बिना दवादर्पन के घरनी स्वरग चली आँखें आती भर देख-रेख के बिना दुधमुँही बिटिया दो दिन बाद गई मर। 'अँधेरा' शब्द का पर्यायवाची है
दिए गए पद्यांश को ध्यान से पढ़िए और उसके आधार पर पूछे गए प्रश्न का यथोचित उत्तर दीजिए। पद्यांश 8 अन्धकार की गुहा सरीखी उन आँखों से डरता है मन भरा दूर तक उनमें दारुण दैन्य दुःख का नीरव रोदन। वह स्वाधीन किसान रहा अभिमान भरा आँखों में इस का छोड़ उसे मँझधार आज संसार कगार सदृश बह खिसका। लहराते वे खेत दृगों में हुआ बेदखत वह अब जिन से हँसती थी उसके जीवन की हरियाली जिनके तृन-तृन से। आँखों ही में घूमा करता वह उसकी आँखों का तारा कारकुनों की लाठी से जो गया जवानी ही में मारा। बिना दवादर्पन के घरनी स्वरग चली आँखें आती भर देख-रेख के बिना दुधमुँही बिटिया दो दिन बाद गई मर। इस पद्यांश के लिए उपयुक्त शीर्षक लिखिए
दिए गए पद्यांश को ध्यान से पढ़िए और उसके आधार पर पूछे गए प्रश्न का यथोचित उत्तर दीजिए। पद्यांश 8 अन्धकार की गुहा सरीखी उन आँखों से डरता है मन भरा दूर तक उनमें दारुण दैन्य दुःख का नीरव रोदन। वह स्वाधीन किसान रहा अभिमान भरा आँखों में इस का छोड़ उसे मँझधार आज संसार कगार सदृश बह खिसका। लहराते वे खेत दृगों में हुआ बेदखत वह अब जिन से हँसती थी उसके जीवन की हरियाली जिनके तृन-तृन से। आँखों ही में घूमा करता वह उसकी आँखों का तारा कारकुनों की लाठी से जो गया जवानी ही में मारा। बिना दवादर्पन के घरनी स्वरग चली आँखें आती भर देख-रेख के बिना दुधमुँही बिटिया दो दिन बाद गई मर। किसान के बेटे की मृत्यु कैसे हुई?
क्यों? एक ऐसा सवाल है, जिसका जवाब देने का प्रयास हम माता-पिता हमेशा से करते आए हैं। यह अच्छी बात है कि बच्चे सवाल पूछते हैं। सीखने का इससे बढ़िया कोई और तरीका नहीं हो सकता। सभी बच्चों के पास सीखने के दो स्रोत होते हैं - कल्पनाशीलता और उत्सुकता। माता-पिता के रूप में आप अपने बच्चे की कल्पनाशीलता व उत्सुकता को बढ़ावा देकर उसे सीखने के आनंद से सराबोर कर सकते हैं। शिक्षण और सीखना महज स्कूल की चारदीवारी के भीतर संपन्न होने वाली रहस्यमय गतिविधियाँ नहीं है। वे तब भी होती हैं, जब माता-पिता और बच्चे बेहद आसान चीजों को साथ-साथ करते हैं। उदाहरण के लिए, धुलने वाले कपड़ों के ढेर से मोजों को उनके जोड़ों के हिसाब से छाँटकर गणित और विज्ञान की गुत्थियाँ सुलझा सकते हैं। साथ मिलकर खाना बना सकते हैं, क्योंकि खाना बनाने से गणित और विज्ञान के अलावा अच्छी सेहत की भी भीख मिलती है। एक-दूसरे को कहानियाँ सुना सकते हैं। कहानी सुनाना पढ़ने और लिखने का आधार है। उछल-कूद वाले खेलों से बच्चे गिनती सीखते हैं और जीवन-पर्यंत अच्छी सेहत का पाठ भी पढ़ते हैं। बच्चों के साथ मिलकर कुछ करने से आप समझ जाएँगे कि सीखना मनोरंजक और बेहद महत्त्वपूर्ण क्रिया-कलाप है सीखना तब भी होता है, जब माता-पिता और बच्चे:
गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प चुनिए। क्यों? एक ऐसा सवाल है, जिसका जवाब देने का प्रयास हम माता-पिता हमेशा से करते आए हैं। यह अच्छी बात है कि बच्चे सवाल पूछते हैं। सीखने का इससे बढ़िया कोई और तरीका नहीं हो सकता। सभी बच्चों के पास सीखने के दो स्रोत होते हैं - कल्पनाशीलता और उत्सुकता। माता-पिता के रूप में आप अपने बच्चे की कल्पनाशीलता व उत्सुकता को बढ़ावा देकर उसे सीखने के आनंद से सराबोर कर सकते हैं। शिक्षण और सीखना महज स्कूल की चारदीवारी के भीतर संपन्न होने वाली रहस्यमय गतिविधियाँ नहीं है। वे तब भी होती हैं, जब माता-पिता और बच्चे बेहद आसान चीजों को साथ-साथ करते हैं। उदाहरण के लिए,धुलने वाले कपड़ों के ढेर से मोजों को उनके जोड़ों के हिसाब से छाँटकर गणित और विज्ञान की गुत्थियाँ सुलझा सकते हैं। साथ मिलकर खाना बना सकते हैं, क्योंकि खाना बनाने से गणित और विज्ञान के अलावा अच्छी सेहत की भी भीख मिलती है। एक-दूसरे को कहानियाँ सुना सकते हैं। कहानी सुनाना पढ़ने और लिखने का आधार है। उछल-कूद वाले खेलों से बच्चे गिनती सीखते हैं और जीवन-पर्यंत अच्छी सेहत का पाठ भी पढ़ते हैं। बच्चों के साथ मिलकर कुछ करने से आप समझ जाएँगे कि सीखना मनोरंजक और बेहद महत्त्वपूर्ण क्रिया-कलाप है। सीखना तब भी होता है, जब माता-पिता और बच्चेः
क्यों? एक ऐसा सवाल है, जिसका जवाब देने का प्रयास हम माता-पिता हमेशा से करते आए हैं। यह अच्छी बात है कि बच्चे सवाल पूछते हैं। सीखने का इससे बढ़िया कोई और तरीका नहीं हो सकता। सभी बच्चों के पास सीखने के दो स्रोत होते हैं - कल्पनाशीलता और उत्सुकता। माता-पिता के रूप में आप अपने बच्चे की कल्पनाशीलता व उत्सुकता को बढ़ावा देकर उसे सीखने के आनंद से सराबोर कर सकते हैं। शिक्षण और सीखना महज स्कूल की चारदीवारी के भीतर संपन्न होने वाली रहस्यमय गतिविधियाँ नहीं है। वे तब भी होती हैं, जब माता-पिता और बच्चे बेहद आसान चीजों को साथ-साथ करते हैं। उदाहरण के लिए, धुलने वाले कपड़ों के ढेर से मोजों को उनके जोड़ों के हिसाब से छाँटकर गणित और विज्ञान की गुत्थियाँ सुलझा सकते हैं। साथ मिलकर खाना बना सकते हैं, क्योंकि खाना बनाने से गणित और विज्ञान के अलावा अच्छी सेहत की भी भीख मिलती है। एक-दूसरे को कहानियाँ सुना सकते हैं। कहानी सुनाना पढ़ने और लिखने का आधार है। उछल-कूद वाले खेलों से बच्चे गिनती सीखते हैं और जीवन-पर्यंत अच्छी सेहत का पाठ भी पढ़ते हैं। बच्चों के साथ मिलकर कुछ करने से आप समझ जाएँगे कि सीखना मनोरंजक और बेहद महत्त्वपूर्ण क्रिया-कलाप है बच्चों के पास सीखने के स्रोतों में से एक है:
गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प चुनिए। क्यों? एक ऐसा सवाल है, जिसका जवाब देने का प्रयास हम माता-पिता हमेशा से करते आए हैं। यह अच्छी बात है कि बच्चे सवाल पूछते हैं। सीखने का इससे बढ़िया कोई और तरीका नहीं हो सकता। सभी बच्चों के पास सीखने के दो स्रोत होते हैं - कल्पनाशीलता और उत्सुकता। माता-पिता के रूप में आप अपने बच्चे की कल्पनाशीलता व उत्सुकता को बढ़ावा देकर उसे सीखने के आनंद से सराबोर कर सकते हैं। शिक्षण और सीखना महज स्कूल की चारदीवारी के भीतर संपन्न होने वाली रहस्यमय गतिविधियाँ नहीं है। वे तब भी होती हैं, जब माता-पिता और बच्चे बेहद आसान चीजों को साथ-साथ करते हैं। उदाहरण के लिए,धुलने वाले कपड़ों के ढेर से मोजों को उनके जोड़ों के हिसाब से छाँटकर गणित और विज्ञान की गुत्थियाँ सुलझा सकते हैं। साथ मिलकर खाना बना सकते हैं, क्योंकि खाना बनाने से गणित और विज्ञान के अलावा अच्छी सेहत की भी भीख मिलती है। एक-दूसरे को कहानियाँ सुना सकते हैं। कहानी सुनाना पढ़ने और लिखने का आधार है। उछल-कूद वाले खेलों से बच्चे गिनती सीखते हैं और जीवन-पर्यंत अच्छी सेहत का पाठ भी पढ़ते हैं। बच्चों के साथ मिलकर कुछ करने से आप समझ जाएँगे कि सीखना मनोरंजक और बेहद महत्त्वपूर्ण क्रिया-कलाप है। बच्चों के पास सीखने के स्रोतों में से एक है:
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