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BIOLOGY
एच. आई. वी. घटाता है -...

एच. आई. वी. घटाता है -

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दिए गए पद्यांश को ध्यान से पढ़िए और उसके आधार पर पूछे गए प्रश्न का यथोचित उत्तर दीजिए। पद्यांश 33 गरजते घन घनन-घन-घन, नाचता है मोर-सा मन, ऐसी पड़ी झर-झर झड़ी भीगा बदन बेसुध है मन आज वर्षा अजब आई। बह रही है मस्त पुरवाई, नदी है द्वार तक आई! मेघों से लिपटकर सो गया सूरज- ले रहे हैं खेत अँगड़ाई। आज वर्षा गजब आई। 'बेसुध है मन' कहकर कवि बताना चाहता है कि मन

दिए गए पद्यांश को ध्यान से पढ़िए और उसके आधार पर पूछे गए प्रश्न का यथोचित उत्तर दीजिए। पद्यांश 33 गरजते घन घनन-घन-घन, नाचता है मोर-सा मन, ऐसी पड़ी झर-झर झड़ी भीगा बदन बेसुध है मन आज वर्षा अजब आई। बह रही है मस्त पुरवाई, नदी है द्वार तक आई! मेघों से लिपटकर सो गया सूरज- ले रहे हैं खेत अँगड़ाई। आज वर्षा गजब आई। मन की उपमा किससे की गई है?

दिए गए पद्यांश को ध्यान से पढ़िए और उसके आधार पर पूछे गए प्रश्न का यथोचित उत्तर दीजिए। पद्यांश 33 गरजते घन घनन-घन-घन, नाचता है मोर-सा मन, ऐसी पड़ी झर-झर झड़ी भीगा बदन बेसुध है मन आज वर्षा अजब आई। बह रही है मस्त पुरवाई, नदी है द्वार तक आई! मेघों से लिपटकर सो गया सूरज- ले रहे हैं खेत अँगड़ाई। आज वर्षा गजब आई। 'पुरवाई' से आशय है

दिए गए पद्यांश को ध्यान से पढ़िए और उसके आधार पर पूछे गए प्रश्न का यथोचित उत्तर दीजिए। पद्यांश 33 गरजते घन घनन-घन-घन, नाचता है मोर-सा मन, ऐसी पड़ी झर-झर झड़ी भीगा बदन बेसुध है मन आज वर्षा अजब आई। बह रही है मस्त पुरवाई, नदी है द्वार तक आई! मेघों से लिपटकर सो गया सूरज- ले रहे हैं खेत अँगड़ाई। आज वर्षा गजब आई। "लिपटकर सो गया सूरज" का भाव है कि सूर्य