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एक नदी के किनारे खड़ा व्यक्ति देखता है की...

एक नदी के किनारे खड़ा व्यक्ति देखता है की नदी के किनारे पर लगे वृक्ष्य द्वारा अंतरिष्क कोड `60^(@)` है । जब वह किनारे से 36 मी. पीछे आता है , तो वह देखता है की कोड `30^(@)` है । नदी की चौड़ाई कितनी है ?

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एक व्यक्ति पश्चिम दिशा की ओर मूँह करके खड़ा है | वह दक्षिणावर्त दिशा में 45^@ के कोण पर घूमता है फिर वह पुनः उसी दिशा में 180^@ के कोण पर घूमता है और फिर वह वामावर्त दिशा में 270^@ के कोण पर घूमता है | अब वह किस दिशा की ओर खड़ा है ?

A man starts from his house and travels at 30 km/h, he reaches his office late by 10 minutes, and travelling at 24 km/h, he reaches his office late by 18 minutes. The distance (in km) from his house to his office is : एक व्यक्ति अपने घर से निकलता है और 30 किमी/घंटा की चाल से चलता है | वह अपने कार्यालय 10 मिनट की देरी से पहँचता है | जब वह 24 किमी/घंटा की चाल से चलता है, तब वह 18 मिनट की देरी से कार्यालय पहँचता है | उसके घर से उसके कार्यालय की दूरी ( किमी में ) है :

एक संस्कृत व्यक्ति किसी चीज़ की खोज करता है, किन्तु उसकी संतान को वह अपने पूर्वजों से अनायास प्राप्त हो जाती है। जिस व्यक्ति की बुद्धि ने अथवा उसके विवेक ने किसी भी नए तथ्य का दर्शन किया, वह व्यक्ति ही वास्तविक संस्कृत व्यक्ति है और उसकी संतान जिसे अपने पूर्वज से वह वस्तु अनायास ही प्राप्त हो गई है, वह अपने पूर्वज की भांति सभ्य भले ही बन जाए, संस्कृत नहीं कहला सकती। एक आधुनिक उदाहरण लें। न्यूटन ने गुरुत्वाकर्षण के सिद्धांत का आविष्कार किया। वह संस्कृत मानव था। आज के युग का भौतिक विज्ञान का विद्यार्थी न्यूटन के गुरुत्वाकर्षण से तो परिचित है ही, लेकिन उसके साथ उसे और भी अनेक बातों का ज्ञान प्राप्त है, जिनसे शायद न्यूटन अपरिचित रहा। ऐसा होने पर भी हम आज के भौतिक विज्ञान के विद्यार्थी को न्यूटन की अपेक्षा अधिक सभ्य भले ही कह सकें, पर न्यूटन जितना संस्कृत नही कह सकते। वास्तविक संस्कृत व्यक्ति वह है जो

एक संस्कृत व्यक्ति किसी चीज़ की खोज करता है, किन्तु उसकी संतान को वह अपने पूर्वजों से अनायास प्राप्त हो जाती है। जिस व्यक्ति की बुद्धि ने अथवा उसके विवेक ने किसी भी नए तथ्य का दर्शन किया, वह व्यक्ति ही वास्तविक संस्कृत व्यक्ति है और उसकी संतान जिसे अपने पूर्वज से वह वस्तु अनायास ही प्राप्त हो गई है, वह अपने पूर्वज की भांति सभ्य भले ही बन जाए, संस्कृत नहीं कहला सकती। एक आधुनिक उदाहरण लें। न्यूटन ने गुरुत्वाकर्षण के सिद्धांत का आविष्कार किया। वह संस्कृत मानव था। आज के युग का भौतिक विज्ञान का विद्यार्थी न्यूटन के गुरुत्वाकर्षण से तो परिचित है ही, लेकिन उसके साथ उसे और भी अनेक बातों का ज्ञान प्राप्त है, जिनसे शायद न्यूटन अपरिचित रहा। ऐसा होने पर भी हम आज के भौतिक विज्ञान के विद्यार्थी को न्यूटन की अपेक्षा अधिक सभ्य भले ही कह सकें, पर न्यूटन जितना संस्कृत नही कह सकते। सभ्य व्यक्ति वह है जो

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