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BIOLOGY
अभिकथनः भोजन श्रृंखला में प्रत्येक ऊर्जा...

अभिकथनः भोजन श्रृंखला में प्रत्येक ऊर्जा स्थानान्तरण के साथ जैविक रूप से उपयोगी ऊर्जा की ऊष्मा ऊर्जा के रूप में हानि होती है, जो कि ऊष्मागतिकी के दूसरे नियम के परिणामस्वरूप (नियमानुसार) होती है।
तर्कः किसी भी जीव में ऊर्जा स्थायी रूप से स्थित नहीं रहती है, वह या तो उच्चतर पोषक स्तरों में स्थानान्तरित हो जाती है या जीवों की मृत्यु के पश्चात् अपरदकारकों व अपघटकों के लिये उपलब्ध हो जाती है।

A

अभिकथन और तर्क दोनों सही हैं तथा तर्क, अभिकथन की सही व्याख्या करता है।

B

अभिकथन और तर्क दोनों सही हैं लेकिन तर्क, अभिकथन ही व्याख्या नहीं करता है।

C

अभिकथन सही है, लेकिन तर्क गलत है।

D

अभिकथन और तर्क दोनों गलत हैं।

लिखित उत्तर

Verified by Experts

The correct Answer is:
B

ऊष्मागतिकी के दूसरे नियम के अनुसार ऊर्जा रूपान्तरण की प्रत्येक क्रिया में कुछ ऊर्जा का क्षय होता है। दूसरे शब्दों में, एक खाद्य श्रृंखला में प्रत्येक ऊर्जा स्थानान्तरण के साथ जैव रूप से उपयोंगी ऊर्जा का ऊष्मा के रूप में क्षय होता है, जो ऊष्मागतिकी के द्वितीय नियम के परिणामस्वरूप होता है। प्रत्येक समय ऊर्जा एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थानान्तरित होती है या एक प्रकार से दूसरे प्रकार में रूपान्तरित होती है। उसमें से कुछ, ऊष्मा में बदल जाती है। एक जीव ग्लूकोज व वसीय अम्लों की रासायनिक ऊर्जा को ATP (कोशिकीय श्वसन) और फिर नये अणुओं के रासायनिक बंधों (अणु संश्लेषण के दौरान) में स्थानान्तरित करता है और सक्रिय परिवहन, पेशीय संकुचन व अन्य विविध कार्यों के दौरान रसायनिक ऊर्जा को गति में रूपान्तरित करता है, जो जीवन के लिए आवश्यक है। चूंकि प्रत्येक जीव सतत् रूप से रासायनिक ऊर्जा को ऊष्मा में परिवर्तित करता रहता है, खाद्य श्रृंखला में प्रत्येक स्तर पर सदैव रासायनिक ऊर्जा की हानि होती है। किसी भी जीव में ऊर्जा स्थायी रूप से बन्द नहीं रहती है। यह या तो उच्च पोषक स्तर की ओर प्रवाहित होती है या जीवों के मरने के पश्चात् अपरदाहारियों व अपघटकों को उपलब्ध होती है। जीवों की मृत्यु अपरद खाद्य श्रृंखला/जाल की शुरूआत होती है।
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