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BIOLOGY
अभिकथन: जलीय शाकाहारी प्रायः स्थलीय शाका...

अभिकथन: जलीय शाकाहारी प्रायः स्थलीय शाकाहारियों की तुलना में अधिक उत्पादक होते हैं। तर्क: उनके छोटे आकार व रचनात्मक ऊतकों के अभाव के कारण, पादपप्लवकों की वृद्धि दर तीव्र होती है और विषमपोषियों के लिये उनके स्थलीय प्रतिरूप की अपेक्षा अधिक पौष्टिक होते हैं।

A

अभिकथन और तर्क दोनों सही हैं तथा तर्क, अभिकथन की सही व्याख्या करता है।

B

अभिकथन और तर्क दोनों सही हैं लेकिन तर्क, अभिकथन ही व्याख्या नहीं करता है।

C

अभिकथन सही है, लेकिन तर्क गलत है।

D

अभिकथन और तर्क दोनों गलत हैं।

लिखित उत्तर

Verified by Experts

The correct Answer is:
A

स्थलीय शाकाहारियों द्वारा अधिकतम पादप पदार्थ का उपभोग नहीं किया जाता है या पाचन नहीं किया जाता है, क्योंकि पौधों में अत्यधिक संरचनात्मक पदार्थ होते हैं। अधिकांश शैवाल (एलगल) पदार्थों (पादपप्लवकों) का जलीय शाकाहारियों द्वारा उपभोग व पाचन किया जाता है क्योंकि शैवालों में बहुत कम संरचनात्मक पदार्थ होते हैं। इसके अतिरिवत पादपप्लवकों की वृद्धि, स्थलीय पौधों की अपेक्षा शीघ्रता से होती है। इसलिये इनकी जैवमात्रा (जैवभार) किसी दिये गये समय में उत्पादकता की अपेक्षा कम होती है। पादपप्लवक शीघ्रता से वृद्धि और प्रजनन करते हैं, इसलिय कम भार रखने के बाद भी वे उच्च दर से प्राथमिक उत्पादन करते हैं। इसके विपरीत, स्थलीय प्राथमिक उत्पादक निम्न गति से वृद्धि व प्रजनन करते हैं। अत: स्थलीय शाकाहारी जलीय शाकाहारियों की अपेक्षा कम उत्पादकता वाले होते हैं।
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