दो वस्तुओं के बीच लगने वाले गुरुत्वाकर्षण वल का क्या होगा, यदि
(i) एक वस्तु का द्रव्यमान दोगुना कर द्विया जाए?
(ii) वस्तुओं के बीच की दूरी दोगुने अथवा तीन गुनी कर दी जाए?
(iii) द्रोनों वस्तुओं के द्रव्यमान दोगुने कर दिए जाएँ?
दो वस्तुओं के बीच लगने वाले गुरुत्वाकर्षण वल का क्या होगा, यदि
(i) एक वस्तु का द्रव्यमान दोगुना कर द्विया जाए?
(ii) वस्तुओं के बीच की दूरी दोगुने अथवा तीन गुनी कर दी जाए?
(iii) द्रोनों वस्तुओं के द्रव्यमान दोगुने कर दिए जाएँ?
(i) एक वस्तु का द्रव्यमान दोगुना कर द्विया जाए?
(ii) वस्तुओं के बीच की दूरी दोगुने अथवा तीन गुनी कर दी जाए?
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गुरुत्वाकर्षण बल का परिचय|गुरुत्वाकर्षण का सार्वत्रिक नियम|गुरुत्व बल के प्रभाव में वस्तुओं की गति|द्रव्यमान तथा भार|आर्किमीडीज का सिद्धांत|Summary
The selling price of a commodity after discount of 15% is equal to its selling price after discount of 25 % on the purchase price of another item. If the sum of the purchase prices of both the items is Rs. 640, find the selling price of each item. एक वस्तु के क्रय मूल्य पर 15% की छूट के बाद उसका विक्रय मूल्य, एक दूसरी वस्तु के क्रय मूल्य पर 25% की छूट दिए जाने के बाद उसके विक्रय मूल्य के बराबर है। यदि दोनों वस्तुओं के क्रय मूल्यों का योग रु.640 है, तो प्रत्येक वस्तु का विक्रय मूल्य ज्ञात कीजिए।
The prices of two articles are in the ratio 4 : 5. If the price of the first article is increased by x% and that of the other is decreased by 30% , then the new prices of A and B will be in the ratio 10 : 7. The value of x is : दो वस्तुओं की कीमतें 4 : 5 के अनुपात में हैं | यदि पहली वस्तु की कीमत x % से बढ़ा दी जाए और दूसरी वस्तु की कीमत 30% से कम कर दी जाए, तो A और B की नयी कीमतों का अनुपात 10 : 7 हो जाता है |x का मान है :
The cost price of two articles is the same. One article among them is sold at a profit of 15% and the other is sold at a profit of 12%. if the difference between their selling prices is Rs 18, what is the cost price of each article? दो वस्तुओं का क्रय मूल्य समान है | इनमें से एक वस्तु 15% के लाभ पर तथा दूसरी वस्तु 12% के लाभ पर बेची जाती है | यदि उनके विक्रय मूल्य में 18 रुपये का अंतर है, तो प्रत्येक वस्तु का क्रय मूल्य क्या है ?
The given table represents the exports (in ₹ crores) of four items A,B, C and D over a period of six years. Study the table carefully and answer the questions that follows: The total exports of item A from 2012 to 2014 is what percentage less than the total exports of all the four items in 2015? (correct to one decimal place) दी गयी तालिका छः वर्षों की अवधि के दौरान चार वस्तुओं A, B, C और D के निर्यात ( करोड़ रुपये में ) को दर्शाती है | इस तालिका का अध्ययन करें तथा फिर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दें | 2012 से 2014 तक वस्तु A का कुल निर्यात 2015 में सभी वस्तुओं के कुल निर्यात से कितना प्रतिशत ( दशमलव के एक स्थान तक )
From the top of a tower, the angles of depression of two objects on the ground on the same side of it, are observed to be 60^@ and 30^@ respectively and the distance between the objects is 400 sqrt3 m. The height (in m) of the tower is : किसी मीनार के शीर्ष से, भूमि पर इसके एक ही तरफ स्थित दो वस्तुओं का अवनमन कोण क्रमशः 60^@ और 30^@ पाया जाता है तथा वस्तुओं के बीच की दूरी 400 sqrt3 मीटर है | इस मीनार की ऊंचाई ( मीटर में ) है
एक संस्कृत व्यक्ति किसी चीज़ की खोज करता है, किन्तु उसकी संतान को वह अपने पूर्वजों से अनायास प्राप्त हो जाती है। जिस व्यक्ति की बुद्धि ने अथवा उसके विवेक ने किसी भी नए तथ्य का दर्शन किया, वह व्यक्ति ही वास्तविक संस्कृत व्यक्ति है और उसकी संतान जिसे अपने पूर्वज से वह वस्तु अनायास ही प्राप्त हो गई है, वह अपने पूर्वज की भांति सभ्य भले ही बन जाए, संस्कृत नहीं कहला सकती। एक आधुनिक उदाहरण लें। न्यूटन ने गुरुत्वाकर्षण के सिद्धांत का आविष्कार किया। वह संस्कृत मानव था। आज के युग का भौतिक विज्ञान का विद्यार्थी न्यूटन के गुरुत्वाकर्षण से तो परिचित है ही, लेकिन उसके साथ उसे और भी अनेक बातों का ज्ञान प्राप्त है, जिनसे शायद न्यूटन अपरिचित रहा। ऐसा होने पर भी हम आज के भौतिक विज्ञान के विद्यार्थी को न्यूटन की अपेक्षा अधिक सभ्य भले ही कह सकें, पर न्यूटन जितना संस्कृत नही कह सकते। 'न्यूटन ने गुरुत्वाकर्षण बल की खोज की वाक्य को कर्मवाच्य में बदलिए!
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनिए: आज शिक्षक की भूमिका उपदेशक या ज्ञानदाता की-सी नहीं रही। वह तो मात्र एक प्रेरक है कि शिक्षार्थी स्वयं सीख सकें। उनके किशोर मानस को ध्यान में रखकर शिक्षक को अपने शिक्षण कार्य के दौरान अध्ययन-अध्यापन की परंपरागत विधियों से दो कदम आगे जाना पड़ेगा, ताकि शिक्षार्थी समकालीन यथार्थ और दिनप्रतिदिन बदलते जीवन की चुनौतियों के बीच मानवमूल्यों के प्रति अडिग आस्था बनाए रखने की प्रेरणा ग्रहण कर सके। पाठगत बाधाओं को दूर करते हुए विद्यार्थियों की सहभागिता को सही दिशा प्रदान करने का कार्य शिक्षक ही कर सकता है। भाषा शिक्षण की कोई एक विधि नहीं हो सकती। जैसे मध्यकालीन कविता में अलंकार, छंदविधान, तुक आदि के प्रति आग्रह था किंतु आज लय और प्रवाह का महत्त्व है। कविता पढ़ाते समय कवि की युग चेतना के प्रति सजगता समझना आवश्यक है। निबंध में लेखक के दृष्टिकोण और भाषा-शैली का महत्त्व है और शिक्षार्थी को अर्थग्रहण की योग्यता का विकास जरूरी है। कहानी के भीतर बुनी अनेक कहानियों को पहचानने और उन सूत्रों को पल्लवित करने का अभ्यास शिक्षार्थी की कल्पना और अभिव्यक्ति कौशल को बढ़ाने के लिए उपयोगी हो सकता है। कभी-कभी कहानी का नाटक में विधा परिवर्तन कर उसका मंचन किया जा सकता है। मूल्यांकन वस्तुतः सीखने की ही एक प्रणाली है. ऐसी प्रणाली जो रटंत प्रणाली से मुक्ति दिला सके। परंपरागत साँचे का अनुपालन न करे, अपना ढाँचा निर्मित कर सके। इसलिए यह गाँठ बाँध लेना आवश्यक है कि भाषा और साहित्य के प्रश्न बँधे-बँधाए उत्तरों तक सीमित नहीं हो सकते। शिक्षक पूर्वनिर्धारित उत्तर की अपेक्षा नहीं कर सकता। विद्यार्थियों के उत्तर साँचे से हटकर किंतु तर्क संगत हो सकते हैं और सही भी। इस खुलेपन की चुनौती को स्वीकारना आवश्यक है। मूल्यांकन के बारे में सत्य नहीं है।
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनिए: आज शिक्षक की भूमिका उपदेशक या ज्ञानदाता की-सी नहीं रही। वह तो मात्र एक प्रेरक है कि शिक्षार्थी स्वयं सीख सकें। उनके किशोर मानस को ध्यान में रखकर शिक्षक को अपने शिक्षण कार्य के दौरान अध्ययन-अध्यापन की परंपरागत विधियों से दो कदम आगे जाना पड़ेगा, ताकि शिक्षार्थी समकालीन यथार्थ और दिनप्रतिदिन बदलते जीवन की चुनौतियों के बीच मानवमूल्यों के प्रति अडिग आस्था बनाए रखने की प्रेरणा ग्रहण कर सके। पाठगत बाधाओं को दूर करते हुए विद्यार्थियों की सहभागिता को सही दिशा प्रदान करने का कार्य शिक्षक ही कर सकता है। भाषा शिक्षण की कोई एक विधि नहीं हो सकती। जैसे मध्यकालीन कविता में अलंकार, छंदविधान, तुक आदि के प्रति आग्रह था किंतु आज लय और प्रवाह का महत्त्व है। कविता पढ़ाते समय कवि की युग चेतना के प्रति सजगता समझना आवश्यक है। निबंध में लेखक के दृष्टिकोण और भाषा-शैली का महत्त्व है और शिक्षार्थी को अर्थग्रहण की योग्यता का विकास जरूरी है। कहानी के भीतर बुनी अनेक कहानियों को पहचानने और उन सूत्रों को पल्लवित करने का अभ्यास शिक्षार्थी की कल्पना और अभिव्यक्ति कौशल को बढ़ाने के लिए उपयोगी हो सकता है। कभी-कभी कहानी का नाटक में विधा परिवर्तन कर उसका मंचन किया जा सकता है। मूल्यांकन वस्तुतः सीखने की ही एक प्रणाली है. ऐसी प्रणाली जो रटंत प्रणाली से मुक्ति दिला सके। परंपरागत साँचे का अनुपालन न करे, अपना ढाँचा निर्मित कर सके। इसलिए यह गाँठ बाँध लेना आवश्यक है कि भाषा और साहित्य के प्रश्न बँधे-बँधाए उत्तरों तक सीमित नहीं हो सकते। शिक्षक पूर्वनिर्धारित उत्तर की अपेक्षा नहीं कर सकता। विद्यार्थियों के उत्तर साँचे से हटकर किंतु तर्क संगत हो सकते हैं और सही भी। इस खुलेपन की चुनौती को स्वीकारना आवश्यक है। विद्यार्थी के लिए अनुच्छेद में प्रयुक्त अन्य पर्यायवाची शब्द हैं
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